विपक्षी नेपाल कांग्रेस के साथ मिलकर उठाया था भारत विरोधी कदम…
भारत की जमीन को अपने नक्शे में दिखाने के विवाद में झुका नेपाल

नई दिल्ली l भारत के साथ सीमा विवाद को हवा देने वाले नेपाल ने विवादित मानचित्र के लिए संवैधानिक संशोधन को फिलहाल टाल दिया है. इस मानचित्र में नेपाल ने भारतीय क्षेत्रों को अपना बताया है. संविधान संशोधन के बाद नए नक्शों को कानूनी रूप मिल जाएगा. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि एकदम से संविधान संशोधन विधेयक को नेपाल की प्रतिनिधि सभा के एजेंडे से क्यों हटा लिया गया. सरकार द्वारा विपक्षी नेपाल कांग्रेस के साथ मिलकर उठाये गए इस भारत विरोधी कदम को अभी केंद्रीय समिति की बैठक में मंजूरी मिलना बाकी है.

काठमांडू पोस्ट ने नेपाली कांग्रेस के कृष्ण प्रसाद सिटौला के हवाले से बताया है कि मानचित्र को अपडेट करने का निर्णय आगामी केंद्रीय कार्य समिति की बैठक में लिया जाएगा. इसलिए पार्टी ने संशोधन को कुछ समय के लिए टालने का अनुरोध किया है. नेपाल के कानून मंत्री डॉ. शिवमया को बुधवार को संसद की बैठक में नेपाल संविधान संशोधन विधेयक 2077 पेश करना था.

नेपाली सरकार ने पिछले हफ्ते देश का एक नया विवादास्पद नक्शा जारी किया था, जिसमें भारतीय क्षेत्र लिपुलेख, कालापानी, लिंपियाधुरा को अपना बताया गया था. इस महीने की शुरुआत में नेपाली राष्ट्रपति ने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए कहा था कि देश के नए नक्शे प्रकाशित किए जाएंगे, और उन सभी क्षेत्रों को उसमें शामिल किया जाएगा जिसे नेपाल अपना मानता है. 

वैसे इन इलाकों को लेकर विवाद नया नहीं है. 1816 में सुगौली संधि के तहत नेपाल के राजा ने कालापानी और लिपुलेख सहित अपने कुछ हिस्सों को ब्रिटिशों को सौंप दिया था. गौरतलब है कि हाल ही में नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कोरोना संकट के लिए भी भारत को जिम्मेदार ठहराया था. उन्होंने कहा था कि नेपाल में बढ़ते संक्रमण के पीछे भारत से अवैध रूप से आने वाले लोग हैं. इससे पता चलता है कि दोनों देशों के बीच रिश्ते कितने तल्ख़ हो गए हैं.