इतिहास में पहली बार ग्रामीणों को…
गांव में आबादी भूमि पर रहने वालों को मालिकाना हक देंगे : शिवराज 

धार। गांवों में आबादी की भूमि पर रहने वालों का सर्वे कर उन्हें जमीन का मालिकाना हक दिया जाएगा। इसके पहले चरण में प्रदेश के 10 जिलों के 10553 गांवों में सर्वे होगा। सबसे पहले हरदा व डिंडोरी जिले के कुछ गांवों में जून में काम शुरू करना प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इतिहास में पहली बार ग्रामीणों को उनकी आबादी भूमि में मालिकाना हक देने के लिए स्वामित्व योजना शुरू की है। इस योजना में गांवों की आबादी भूमि का सर्वे कर रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। उसके आधार पर ग्रामीणों को मालिकाना हक दिया जाएगा। सर्वे के डाटाबेस से पंचायत स्तर पर संपत्ति रजिस्टर भी तैयार किए जाएंगे।

योजना के पहले वर्ष में भोपाल, मुरैना, श्योपुर, सागर, शहडोल, खरगोन, विदिशा, सीहोर, हरदा और डिंडोरी जिले शामिल किए गए हैं। यहां सर्वे का कार्य तीन चरणों में किया जाएगा। शेष जिलों में दूसरे व तीसरे वर्ष सर्वे किया जाएगा। सर्वे में उन्हीं को शामिल किया जाएगा, जो 25 सितंबर 2018 को आबादी भूमि पर काबिज थे या जिन्हें इस तारीख के बाद आबादी भूमि में भूखंड का आवंटन किया गया हो। जहां ग्रामीण दखलरहित भूमि पर बसे होंगे, वहां कलेक्टर उस भूमि को जांच कर आबादी भूमि घोषित कर सकेंगे।

ग्रामीणों को संपत्ति पर अधिकार अभिलेख और स्वामित्व प्रमाण पत्र मिलेगा। संपत्ति पर बैंक से लोन लेना आसान होगा। संपत्तियों के पारिवारिक विभाजन, हस्तांतरण, नामांतरण, बंटवारे की प्रक्रिया आसान होगी और पारिवारिक संपत्ति के विवाद कम होंगे। रिकॉर्ड बन जाने से ग्राम पंचायतों को संपत्ति कर मिलेगा, जो गांव के विकास में काम आएगा। गांवों में लोग पुरखों के जमाने से मकान बनाकर रह रहे हैं। जहां वह रह रहे हैं, उसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। एक ही खसरा नंबर पर हजारों लोग बसे हैं। कोई नाप या पैमाना नहीं है कि किसकी कितनी जमीन है। ऐसी ही जमीन को आबादी क्षेत्र कहा जाता है।