मुरैना जिले के लिये बनाई गई बाढ़ नियंत्रण योजना…
बाढ़ की सूचना मिलते ही आपदा प्रबन्धन प्रभावी कार्यवाही करें : श्री ओझा

मुरैना l चंबल संभाग के कमिश्नर एमबी ओझा ने मुरैना जिले के लिये बनाई गई बाढ़ नियंत्रण योजना का प्रभावी तरीके से अमल करने के निर्देश अधिकारियों को दिये है। उन्होंने कहा कि पिछली वर्ष आई बाढ़ के समय जो कमिया देखी गई हो, उन्हंे रेखांकित कर उन पर प्रभावी अमल सुनिश्चित किया जाये। उन्होंने कहा कि नाव चलाने वाले नाविकों, गौताखोरों सहित आपदा प्रबन्धन में लगने वाले मैदानी अमले को पूरी तरह से प्रशिक्षित किया जाये। चंबल कमिश्नर श्री ओझा शुक्रवार को जिला कलेक्टर कार्यालय मुरैना के सभाकक्ष में आगामी वर्षाऋतुु में अतिवर्षा बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिये मुरैना के अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। बैठक में कलेक्टर प्रियंका दास, पुलिस अधीक्षक डाॅ. असित यादव, जिला पंचायत के सीईओ तरूण भटनागर, अपर कलेक्टर एसके मिश्रा, नगर निगम आयुक्त अमरसत्य गुप्ता, सिंचाई, होमगार्ड सहित अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।  

उन्होंने कहा कि 68 ऐसे गांव है जो चंबल नदी से लगे हुये है। उन्होंने बताया कि कोटा बैराज से पानी छोड़ने के 24 घंटे बाद ही चंबल नदी में फ्लड़ बढ़ता है। उन्होंने बताया कि चंबल में पानी बढ़ने का लेवल जब 138 मीटर का पर आता है तो जिले के 8 गांव प्रभावित होते है। इनमें सबलगढ़ के 3, अम्बाह के 2, पोरसा के 3 ऐसे टोटल 8 गांव है, जो बाढ़ से प्रभावित हो जाते है। इसी तरह बाढ़ खतरे का लेवल 140 मीटर पर आता है, तब मुरैना के 4 गांव प्रभावित होते है। जब खतरे का लेवल 142 मीटर पर आता है तो जिले के 32 गांव बाढ़ की चपेट में आ जाते है। इनमें सबलगढ़ के 9, जौरा के 4, मुरैना के 6, अम्बाह के 9 और पोरसा के 4 गांव है। खतरे का लेवल 144.40 और 145 मीटर आने पर 24 गांव प्रभावित हो जाते है, इनमें सबलगढ़ के 10, जौरा के 3, मुरैना के 2, अम्बाह के 3 और पोरसा के 6 गांव है।
 
इसी तरह चंबल में पानी का फ्लड़ बढ़ने से 68 गांव बाढ़ से प्रभावित होते है। इनमें सर्वाधिक 22 गांव सबलगढ़ के, मुरैना के 12, अम्बाह के 14, पोरसा के 13, जौरा के 7 गांव है। जैसे ही कोटा बैराज से पानी छोड़ने की सूचना मिलती है बैसे ही इन प्रभावित गांव के लोंगो को वहां से हटाकर बनाये गये कैम्पों में स्थापित कर दिया जाता है। 

कमिश्नर श्री ओझा ने कहा कि बाढ़ से बचाव एवं नियंत्रण कार्य में लगे सभी अधिकारी मैदानी अमला अलर्ट रहे। वे भयभीत न हो। इस दौरान प्रभावी कम्यूनिकेशन रहे। सभी के मोबाइल नंबर गु्रप में बनाकर रखें। जिला स्तर सहित तहसील स्तरों पर बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किये जाये। कक्षों के टेलीफोन नंबरों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाये। कमिश्नर ने निर्देश दिए कि होमगार्ड बाढ़ से निपटने हेतु गोताखोरों की व्यवस्था, बाढ़ के दौरान उपयोग में आने वाले उपकरणों एवं संसाधनों की व्यवस्था भी सुनिश्चित करें। उन्होंने निर्देश दिए कि जिला मुख्यालय पर बाढ़ नियंत्रण प्रकोष्ठ का गठन कर उसके टेलीफोन नम्बर, पुलिस कंट्रोल एवं कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक कार्यालय एवं निवास सहित प्रशासन एवं पुलिस अधिकारियों को दें। बाढ़ नियंत्रण प्रकोष्ठ का नोडल अधिकारी अपर कलेक्टर स्तर के अधिकारी को बनाया जाए। 
 
कमिश्नर श्री ओझा ने कहा कि बाढ़ से निपटने के कार्य में स्थानीय ग्राम सुरक्षा समितियों, नगर सुरक्षा समितियों, जल उपभोक्ता संथाओं के पदाधिकारियों को भी जोड़ें। इसके लिये उन्हें प्रशिक्षण भी प्रदाय किया जाए। किसी भी हालत में बाढ़ एवं अतिवृष्टि के कारण जन एवं पशु हानि न हो। पूर्व में जो आपदा प्रबंधन की योजना बनाई गई है उसे अद्यतन करें। कमिश्नर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पुल-पुलियों पर से पानी बहने की स्थिति में वाहन न निकलें। इसके लिये पुल-पुलियों, रपटों पर साइन बोर्ड लगाने के साथ होमगार्ड के जवानों की भी ड्यूटी लगाई जाए। 

श्री ओझा ने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जलाशयों से पानी छोड़ने के पूर्व एवं अन्य सहायक नदियों से आने वाले पानी की सूचना समय रहते संबंधित जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक तथा पुलिस कंट्रोल रूम को भी दें, जिससे लोगों को सूचित किया जा सके। उन्होंने कहा कि अधिक तकनीकी जानकारी ग्वालियर नगर निगम से लें, ताकि डेनिज कार्य में कहीं दिक्कत नहीं आयें। उन्होंने कहा कि शहर में पानी भरने का कहीं कोई इश्यू नहीं बनें। पगारा बांध भरने से पहले वहां के लोंगो को सुरक्षित स्थल पर शिफ्ट किया जाये।