विशेषज्ञों के मुताबिक...

देश में पहली बार हुआ प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना का इलाज


नई दिल्ली l देश में पहली बार प्लाज्मा थेरेपी  से कोरोना वायरस  के मरीज का इलाज किया जा रहा है. ये मामला दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी का है, जहां एक ही परिवार के चार लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे. 15 अप्रैल को ​संक्रमण से पिता की मौत हो गई. वहीं बेटी और मां को ​अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है. ये दोनों ठीक हो गए थे. लेकिन परिवार का एक और सदस्य इनका बेटा अभी वेंटिलेटर पर है. कोरोना वायरस संक्रमण के चलते जान गंवाने वाले आर.एस. चड्ढा  डिफेंस कालोनी के RWA प्रेसीडेंट थे.

परिवार के दो सदस्य ठीक हुए हैं. लेकिन बेटा अभी भी जिंदगी और मौत से जूझ रहा है. सभी का इलाज साकेत के मैक्स अस्पताल में चल रहा है. अब अस्पताल ने सरकार से मंजूरी ली है जिसके बाद अस्पताल में भर्ती बेटे का इलाज प्लाज्मा थेरेपी से किया जा रहा है. संक्रमण कैसे फैला इसे लेकर परिवार का आरोप था कि सिक्योरिटी गार्ड जमात जाता था, इसी के चलते पूरा परिवार कोरोना वायरस की चपेट में आया. इसकी शिकायत चड्ढा परिवार ने पुलिस में भी की थी.

क्या है प्लाज्मा थेरेपी
अगर कोई व्यक्ति कोरोना वायरस के संक्रमण से ठीक हो जाए, तो उसके शरीर में इस वायरस  को बेअसर करने वाले एंटीबॉडीज बन जाते हैं. इन एंटीबॉडीज की मदद से वायरस से संक्रमित दूसरे मरीजों के शरीर में मौजूद कोरोना वायरस को खत्म किया जा सकता है.

विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी मरीज के ठीक होने के 14 दिन बाद उसके शरीर से एंटीबॉडीज लिए जा सकते हैं. इस प्रक्रिया में स्वस्थ हो चुके मरीज के शरीर से रक्त निकाला जाता है. रक्त में मौजूद एंटीबॉडीज केवल प्लाज्मा में मौजूद होते हैं. इसीलिए रक्त से प्लाज्मा निकालकर बाकी खून फिर से उस मरीज के शरीर में वापस डाल दिया जाता है.

प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल गंभीर रूप से संक्रमित मरीजों पर किया जा सकता है और इस थेरेपी को शुरू करने के 48 से 72 घंटे के भीतर मरीज की हालत में सुधार आ सकता है. ICMR से मंजूरी मिलने के बाद अब देश में प्लाज्मा थेरेपी पर काम शुरू हो गया है.विदेश की बात करें, तो इस समय चीन और दक्षिण कोरिया में इसका इस्तेमाल हो रहा है. बता दें कि कोरोना संक्रमण के इलाज के लिए अब तक कोई टीका या दवाई तैयार करने में सफलता नहीं मिली है. संक्रामक रोगों के लिए वर्षों से प्लाज्मा थेरेपी का ही इस्तेमाल हो रहा है. इससे पहले SARS, MERS और H1N1 जैसी महामारी का इलाज भी प्लाज्मा थेरेपी से ही किया गया था.