धरती पुत्रों की समझिये परेशानी करिये मदद में सहयोग

एक अपील उनसे जो रखते हैं दूसरों की जरूरतों का ख्याल


पूरी दुनिया इस समय कोविड -19 कोरोना से बचाव में लगी है, दूसरी ओर लाॅकडाउन के चलते तमाम स्थानों पर निजी व सार्वजनिक आवागमन के संसाधनों सहित सभी प्रकार के छोटे बड़े उद्योग धंधे, निर्माण कार्य, फैक्टरियां, सर्विस देने वाले दुकान आॅफिस षो रूम आदि सब कुछ बंद है। इस वजह से हजारों परिवारों के सामने भूखों मरने की समस्या मूंह वाये खड़ी है।

सरकार द्वारा जो राषन या आर्थिक मदद दी जा रही है व श्ऊंट के मूंह में जीराश् जैसा है। सरकार द्वारा जो घोषणा या व्यवस्था की जाती है जरूरी नहीं है कि उसका सही स्वरूप व तरीके से पालन होता हो। यही कारण है अभी तक किसी किसी को महीने में 1 बार 10 किलो आटा और जनधन खातों में डाले गये 500 रूपये  मिल गये हैं और किसी को कुछ भी नहीं मिला। और सरकार द्वारा महीने भर के लिये दी जा रही लोगों के लिये काफी है ! इसके बारे में सोचने के लिये किसके पास समय किसे है। क्योंकि मजदूर वर्ग और आम आदमी तो होता ही है परेषानियों का सामना करने के लिये।

इस महामारी से केवल मजदूर वर्ग ही नहीं, मध्यम वर्गीय लोग जिनकी नियमित आय का कोई साधन अभी नहीं होने के बावजूद वे अपना स्वयं का कुछ न कुछ कार्य संपादन करते हुए किसी तरह अपना जीवन यापन कर रहे थे उनका भी इस लाॅकडाउन के चलते बुरा हाल है। इनकी परेषानी तो कभी किसी राजनेता या सरकार दिखती ही नहीं है और न ही इस वर्ग की ओर ध्यान नहीं दिया है। ये लोग तो वे लोग हैं जो किसी के आगे मदद मांगने के लिये हाथ भी नहीं फैला पाते क्योंकि उनके स्वाभिमान को शायद यह गवारा नहीं होता है।

रोज कमा कर अपना व अपने परिजनों का पेट भरने वाले लोगों को यदी सामाजिक संस्थाओं, समाज सेवियों व दानदाताओं का सहारा न मिला होता तो अभी तक जितने लोग करोना से नहीं मर,े उससे कहीं अधिक लोग तो भुखमरी से मर जाते है। लेकिन भगवान का शुक्र है कि देष में दूसरों की भूख प्यास का ख्याल रखने वाले कुछ फरिस्ते भी हैं। जो लोगों की जरूरत को समझते हुए उसे पूरा करने का प्रयास करते हैं। शहर की तमाम ऐसी संस्थाऐं हैं जो लोगों की मदद करने में लगातार जुटी हुई हैं। ऐसी एक संस्था है द फेथ आॅफ पब्लिक स्टूडंेट वेलफेयर एवं षिक्षा समिति जो अपने सीमित संसाधनों व सदस्यों के माध्यम से लगभग पिछले एक माह से लोगों को जरूरत का सामान उपलब्ध करवा रही है। लेकिन संस्था के पास भी संसाधन सीमित होने के कारण अब संस्था के सदस्यों को भी तमाम आर्थिक परेषानियों का सामना करना पड़ रहा है।

इसी परेषानी से निपटने के लियें हर उस नेकदिल इंसान से उम्मीद की जा रही है जो दूसरों के लिए फिक्रमंद रहता है। उससे विनम्र आग्रह है कि वह संस्था के परोपकार में जिस भी तरीके से मदद कर सकते हैं। करें। आप संस्था को खाद्य सामग्री,सेनेटाईजर,मास्क या आर्थिक सहयोग देकर इस परोपकारी कार्य में अपनी भागीदारी सुनष्चित करें। सधन्यावाद।


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