केस दर्ज होने के बाद भी हुआ हमला…

अर्णव गोस्वामी पर कांग्रेस पार्टी ने करवाया केस दर्ज 


टीवी एंकर अर्णव गोस्वामी पर केस दर्ज होने के बाद भी हमला हो जाता है आखिर क्यों ? क्या इस देश में कानून नाम की कोई व्यवस्था बची भी है या नहीं ? हमला करने वाले कौन हैं ? इसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है  ? इन सवालों का जवाब दीया जाना लाजमी है। अर्णव की बीबी और अर्णव पर हमला, जैसा कि आरोप है, कहाँ तक जायज कहा जायेगा ? अर्णव का बयान मैने सुना उसके एक हिस्से में वो कहते हैं कि क्या इटली वाली सोनिया गांधी पोप को साधुओं की हत्या का रिपोर्ट बना कर भेजेंगी ? इसी से सबका खून 100 डिग्री सेल्सियस हो गया है। इसमें एक पार्टी विशेष या उसके लोगों को इतना है हायपर होने होने वाली कौन सी बात हो गई।

पत्रकार तो सवाल पूछता भी है और अपने विचार भी रखता है और यदि आप उन विचारों से सहमत नहीं है तो आप उसका विरोध भी कर सकते हैं लेकिन इस प्रकार से एक पत्रकार पर हमला बेहद शर्म की बात है। इससे पहले कांग्रेस के लोग भी तो मोदी के लिए तमाम तरह के अपशब्द कहते रहे हैं। और बीजेपी वाले भी कहते हैं लेकिन राजनीतिक लोग एक-दूसरे पर हमला नहीं कि हमला नहीं करते और यदि कोई पत्रकार के मुंह से कुछ निकल जाए, तो हमला हो जाता है।

अभी कांग्रेस की एक नेत्री जिसने दिल्ली चुनाव में कुछ सौ वोट पाकर अपनी क्षमता देख ली थी वो मोदी और शाह के लिए कह रही थी कि इन दोनों को 2002 में ही नाप दिया गया होता तो समस्या नही आती। खैर ये सब नेताओं का बयान कह कर डिफेंड कर सकते हैं और मुद्दा तो मीडिया का है....

अब जहाँ तक मीडिया अजर पत्रकारिया का प्रश्न है मीडिया पहले एकमार्गी था, इसीलिए मीडिया के पत्रकारों का एक वर्ग लगातार मोदी को हत्यारा होने का सर्टिफिकेट देता रहा जबकि अदालतें मोदी को बरी करती रहीं। इसके इनाम के रूप में कई मीडिया पर्सन आज राजनीति में बड़ी जगह पा गए। भारत की मीडिया का एक वर्ग ऐसा है जिसकी खबरों को एभी कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान ने अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय में भारत के खिलाफ सबूत के रूप में प्रस्तुत किया था क्योंकि वो मीडिया का वर्ग भारत के स्टैंड के खिलाफ लिखता है मगर उस पर कोई आग बबूला नही हुआ। मोदी के उदय के बाद राष्ट्रवादी पत्रकारों का भी एक वर्ग आमने आया है।

इस देश की मीडिया ने एक मंत्री को "#Auntinational" कह के मजाक बनाया तो किसी का खून नही खौला, इस देश  की मीडिया ने "And they killed yakub" लिखा तो सबका खून पानी हो गया, जब इस देश की मीडिया ने भारतीय सेना पर दबाव बनाने के लिए तख्तापलट की झूठी स्टोरी चलाई तब किसी की भावना आहत नही हुई, जब इस देश की मीडिया ने पुलवामा हमले के फिदायीन आतंकवादी की जगह "local youth" कह कर बचाव किया और पाकिस्तान का पक्ष लिया तो आपके अंदर के उत्तेजना का ज्वार ठंढा हो गया, इस देश की मीडिया और कांग्रेस के अखबार नेशनल हेराल्ड ने #भारत को #Shit_hole कहा और किसी के खून में उबाल नही आया और आज वो पत्रकारिता में भाषायी संयम की सीख दे रही है।

आज आप पोप को रिपोर्ट भेजने की बात पर आग बबूला हो गए और हर तीसरे बयान में मोदी और भाजपा को "नागपुर" आरएसएस को रिपोर्ट भेजने की बात आपके पालतू पत्रकार कहते हैं । भारत की सेना से लेकर भारत को अपशब्द कहे जाये, भारत को Shit Hole कहा जाए वो भी कांग्रेस के औपचारिक अखबार से कहे जाए, यह सब स्वीकार है बस गांधी परिवार पर प्रश्न उठा दिया तो पेट में मरोड़ उठने लगा। अर्णव गोस्वामी का बहुत बड़ा फैन नही हूँ मगर वो आज ठीक वही कर रहा है जिसकी नींव आप ने बहुत पहले रखी और जैसा हमेशा से करते आ रहे हैं। आज आपको आपकी भाषा में जबाब मिल रहा है तो बिलबिला रहे हैं। यह राह आपकी बनाई हुई है।