परिवार की चिंता किए बिना पूरी निष्ठा से...

अग्रिम योद्धा के रूप में रेखा राठौर कोरोना की जंग में दे रही हैं योगदान 


ग्वालियर। कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने जहां विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी जंग में योगदान दे रहे हैं, वहीं स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक, पैरामेडीकल स्टाफ एवं लैब टेक्नीशियन भी आने वाले संदिग्ध मरीजों की कोरोना उपचार से पहले स्क्रीनिंग एवं स्वास्थ्य परीक्षण उपरांत रिकॉर्ड संधारण का कार्य कर रहे हैं।

जिला चिकित्सालय मुरार में पदस्थ लैब टेक्नीशियन रेखा राठौर प्रथम पंक्ति में एक योद्धा के रूप में कोरोना के आने वाले संदिग्ध मरीजों की सबसे पहले जानकारी प्राप्त कर अपने परिवार की चिंता किए बिना अपना कार्य पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी के साथ अग्रिम योद्धा के रूप में कोरोना की जंग में अपना योगदान दे रही हैं।

श्रीमती राठौर ने बताया कि उनके परिवार में उनके पति एवं दो बेटियां हैं। सबसे बड़ी बेटी 10 वर्ष की है जबकि छोटी बेटी 10 माह की है। पति भिण्ड चिकित्सालय में लैब टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत है। ऐसे में अपने कार्य के साथ परिवार की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है।

उन्होंने बताया कि जिला चिकित्सालय मुरार में एक माह के दौरान लगभग 850 मरीजों की स्क्रीनिंग एवं जांच हेतु नमूने लेकर जुकाम, खाँसी, बुखार आदि लक्षण, हिस्ट्री की जानकारी प्राप्त कर उनका रिकॉर्ड तैयार कर संधारित किया गया है। इस दौरान कोरोना से बचाव हेतु सभी सावधानियां, सुरक्षा का भी ध्यान रखना पड़ता है। कार्य के दौरान पीपीई किट, सर्जीकल दस्ताने, मास्क एवं हैडकैप पहनकर तथा सेनेटाइज्ड करने के बाद ही वे अपने कार्य को अंजाम देती हैं।

उन्होंने बताया कि वे प्रतिदिन लगातार 10 घंटे अपनी ड्यूटी कर रही हैं। ड्यूटी के पश्चात घर पहुँचने पर उनकी बड़ी बेटी घर के बाहर सेनेटाइजर, साबुन एवं पानी की व्यवस्था करती हैं, जिससे परिवार के सदस्य भी कोरोना के संक्रमण से बचे रहें।

श्रीमती राठौर ने बताया कि संदिग्ध मरीजों की सेम्पलिंग एवं रिकॉर्ड तैयार करते वक्त मरीजों को काउंसलिंग कर उन्हें बताया जाता है कि कोरोना से डरना नहीं है, बल्कि उससे लड़ना है एवं बचाव हेतु सावधानियां बरतना हैं। इसके लिये शासन द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुरूप अपने घरों में रहकर लॉकडाउन का पालन करें व चेहरे को मास्क या गमछे से ढककर रखने, हाथों को हैण्डवॉश या साबुन से धोने की समझाइश दी जाती है।