हिंदु्स्तानी सिनेमा ने खोया एक नायाब सितारा...

बेमिसाल अदाकारी के लिए मशहूर इरफ़ान ने दुनिया को कहा अलविदा


नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के लाजवाब अभिनेताओं की फेहरिस्त में सबसे आगे खड़े नज़र आने वाले इरफान खान नहीं रहे. उन्होंने 54 साल की उम्र में मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में बुधवार सुबह करीब 11 बजे आखिरी सांस ली और इस तरह हिंदु्स्तानी सिनेमा ने अपना एक नायाब सितारा खो दिया. इरफान ऐसे दौर में सभी को छोड़ कर गए, जब उनके लाखों चाहने वाले, यहां तक कि उनका परिवार भी उन्हें वो विदाई ना दे सका, जिसके वो हकदार थे.

इरफान खान को मुंबई के वर्सोवा में मौजूद कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया. इस मौके पर चुनिंदा लोग ही उनके आखिरी सफर में उनके साथ रह सके. इरफान के सालों पुराने दोस्त तिग्मांशु धूलिया ने उनके जनाज़े को कंधा दिया. मुंबई में इरफान का घर है. उनकी पत्नी सुतापा सिकदर और दो बेटे हैं.

कोरोना के कहर के चलते देशभर में लॉकडाउन है. यही वजह थी कि डॉक्टरों ने उन्हें सलाह दी कि अस्पताल से ही उनके आखिरी सफर की शुरूआत हो और हुआ भी ऐसा ही. ऐसे में दफ्न करते वक्त कब्रिस्तान में उनके दोनों बेटे बाबिल और अयान मौजूद रहे.

करीब 32 साल के फिल्मी करियर में इरफान ने कई फिल्मों को अपने अभिनय से यादगार बनाया. मीरा नायर के निर्देशन में बनी फिल्म 'सलाम बॉम्बे' में जब उन्होंने काम किया, तब उनकी उम्र करीब 21 साल रही होगी. दुबले पतले से नौजवान इरफान ने पहली फिल्म में बहुत छोटा किरदार निभाया था, मगर किसे मालूम था कि ये लड़का एक दिन हिंदी सिनेमा समेत कई देशों की फिल्मों अपने अभिनय का जादू बिखेरेगा. इरफान ने 'सलाम बॉम्बे' से फिल्मी सफर का आगाज़ किया था और साल 2020 में 13 मार्च को उनके निधन से 46 दिन पहले उनकी आखिरी फिल्म 'अंग्रेज़ी मीडियम' बड़े परदे पर आई.

इरफान खान दो साल से ज्यादा वक्त से अपनी बीमारी का इलाज करवा रहे थे. लंदन से आने के बाद भी वो कोकिलाबेन अस्पताल में वक्त वक्त पर अपनी जांच के लिए जाया करते थे. इसे किस्मत का लिखा कहें या इरफान की बेबसी कि चंद रोज़ पहले ही 95 साल की उम्र में उनकी मां सईदा बेगम चल बसीं, लेकिन लॉकडाउन के चलते इरफान आखिरी मरतबा उनके पास बैठकर उन्हें देख तक न सके. उनके पास जा न सके. उनकी मय्यत को कांधा न दे सके. हालांकि कहा गया कि इरफान ने मां को आखिरी विदाई वीडियो कॉल के ज़रिए दी.

कुछ ऐसी ही हालत इस वक्त इरफान के करीबियों और उनके हज़ारों लाखों चाहने वालों की है. मौत की खबर सुनकर भी कोई उनके जनाज़े में शामिल न हो सका. लोग सुपुर्द-ए-खाक करते वक्त इरफान की कब्र में मिट्टी डालना चाहते होंगे, लेकिन ये मुमकिन नहीं, ये ऐसा मलाल है, जो ताउम्र उनके करीबियों के दिलों में रहेगा.

किस बीमारी से पीड़ीत थे?
इरफान खान 'न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर' नामक बीमारी से जूझ रहे थे. ये बीमारी बेहद दुर्लभ है और दुनिया में बेहद कम लोगों को ही होती है. मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ये बीमारी क्यों होती है, इसका अब तक पता नहीं चल पाया है. इरफान ने 5 मार्च 2018 को इंस्टाग्राम के ज़रिए अपने सभी चाहने वालों को बताया था कि वो एक गंभीर बीमारी से पीड़ीत हैं और इलाज के लिए विदेश जा रहे हैं. बाद में बीमारी को लेकर लगाई जा रहीं अटकलों को विराम देने के लिए उन्होंने एक और पोस्ट शेयर किया और जानकारी दी थी कि वो 'न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर' नामक बीमारी से जूझ रहे हैं.

इरफान खान की मौत की जानकारी देते हुए परिवार की ओर से आधिकारिक बयान जारी किया गया है, जो काफी भावुक कर देने वाला है. जारी बयान में कहा गया, '' 'मुझे भरोसा है, मैंने आत्मसमर्पण कर दिया है'. इरफान खान अक्सर इन शब्दों का प्रयोग किया करते थे. साल 2018 में कैंसर से लड़ते समय भी इरफान ने अपने नोट में ये बात कही थी. इरफान खान बेहद कम शब्दों में अपनी बात कहा करते थे और बात करने के लिए आंखों का ज्यादा इस्तेमाल करते थे.''

इन फिल्मों में किया कमाल
यूं तो इरफान जिस फिल्म में भी दिखे, उनके अभिनय से बड़ा परदा गुलज़ार हो गया. लेकिन अगर उनकी चुनिंदा कुछ यादगार फिल्मों पर नज़र डालें तो उनमें पान सिंह तोमर, द लंच बॉक्स, हिंदी मीडियम, पीकू, हासिल, हैदर, लाइफ ऑफ पाई, कारवां, मकबूल, स्लमडॉग मिलिनियर और मदारी हैं. इन फिल्मों में इरफान की अदाकारी हर किसी को पसंद आई. वो लोगों को जिस आसानी से रुला दिया करते थे, उतनी आसानी से उन्हें हंसाने की कला भी आती थी. स्क्रीन पर उनकी एंट्री देखनी हो तो विशाल भारद्वाज की हैदर देखी जा सकती है. इसमें उन्होंने रूहदार का किरदार अदा किया था. उनके आने भर से ही फिल्म का वज़न चार गुना बढ़ जाता है.