ग्वालियर में मिले 11 संदिग्धों पर मरकज से लौटने का संदेह...

निजामुद्दीन के मरकज से अब तक 1200 से ज्यादा लोगों को पहुंचाया हॉस्पिटल !


दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में इस्लामिक धार्मिक आयोजन (मरकज) के बाद 1500 से 1700 ज्यादा लोग एक ही जगह पर रूके हुए थे। पिछले तीन दिनों से इन्हें यहां से निकाला जा रहा है। रविवार से लेकर अब तक 1200 से ज्यादा लोगों को डीटीसी बसों के जरिए अलग-अलग हॉस्पिटल्स ले जाया जा चुका है। इनकी जांच की जा रही है। रविवार के दिन 200 लोगों को यहां से हॉस्पिटल ले जाया गया था, जिनमें से 34 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। बाकी लोगों की रिपोर्ट का इंतजार है।

अभी भी यहां 200 से 300 लोग मौजूद हैं, जिन्हें 32-32 की खेप में बसों के जरिए हॉस्पिटल ले जाया जा रहा है। बसों में इन लोगों को दूर-दूर ही बैठाया जा रहा है। यहां मौजूद प्रशासन, एनडीएमसी और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि 4 बजे तक सभी लोगों को यहां से निकाल लिया जाएगा।

देश में लॉकडाउन के ऐलान के बाद इस तरह लोगों का इकट्ठा होना अपराध है। लेकिन, मरकज आयोजित करने वाले मस्जिद प्रशासन का कहना है कि उन्होंने किसी तरह के नियमों का उल्लंघन नहीं किया है। इनका कहना है, 'यह आयोजन हर साल एक बार होता है। प्रधानमंत्री मोदी ने जब जनता कर्फ्यू की घोषणा की थी, उसी दिन से मरकज को बंद कर दिया गया, लेकिन ट्रेनें न चलने के कारण मरकज में आए लोग यहीं फंसे रह गए। जनता कर्फ्यू के एक दिन पहले ही रेलवे ने देशभर की कई ट्रेनों को रद्द कर दिया था। 22 तारीख को रात 9 बजे तक कहीं नहीं निकला जा सका।

इसी दिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 23 तारीख को सुबह 6 बजे से 31 मार्च राज्य में लॉकडाउन का ऐलान कर दिया और फिर 25 मार्च से पूरे देश को ही लॉकडाउन कर दिया गया। ऐसे में मरकज में आए लोगों कहीं नहीं जा पाए। हालांकि 1500 से लेकर 1700 से ज्यादा लोगों को किसी तरह निजी वाहनों के जरिए घरों तक पहुंचाया गया। लेकिन करीब इतने ही लोग यहां फंसे रह गए।

इस सब के बीच इस आयोजन में जो लोग आसपास के राज्यों से लोग शामिल हुए थे वे भी किसी न किसी तरह अपने अपने राज्यों को वापस चले गए । इससे इन राज्यों में भी कोरोनावायरस की महामारी फैलने का अंदेशा बढ़ गया है। आयोजन में शामिल होने वाले ऐसे लोगों की तलाश में अब इन राज्यों की पुलिस जुटी हुई है।

हमें हमारे सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि लगभग 11 लोग ग्वालियर में भी आवाडपूरा क्षेत्र में एक मस्जिद में ठहरे थे
।  जिनके बारे में पहले स्थानीय लोगों ने ज्यादा गौर नहीं किया था । और ना ही मस्जिद प्रबंधन के लोगों ने इनके बारे में स्थानीय लोगों को यह बताया था कि यह लोग दिल्ली से आए हैं।

लेकिन जब यह घटना पूरी मीडिया पर चलने लगी तब लोगों ने इनके बारे में जानना चाहा तो ये लोग वहां नहीं मिले । जब की हमने फोन पर वहां के स्थानीय निवासी आसिफ अली जरदारी इस संबंध में बात की तो उन्होंने बताया कि वे लोग तो काफी टाइम पहले फरीदाबाद से आए थे । 

अब यह लोग कहां हैं, किसके घर में रह रहे हैं, कहां से आए हैं और कब आए हैं । इन सभी सवालों के बारे में जानकारी  प्रशासन ज्यादा सही तरीके से जुटा सकता है। प्रशासन का दायित्व बनता है कि वह बाहर से आने वाले लोगों के बारे में पूरी जानकारी रखें। और किसी प्रकार का कन्फ्यूजन होने पर यह जानकारी लोगों के बीच भी शेयर की जाना चाहिए।  सही जानकारी व तथ्य लोगों के सामने लाए लोगों व मीडिया के सामने लाए ।  

क्योंकि कोरोना को लेकर पूरा देश महामारी की चपेट में है और लोगों के बीच एक भय का माहौल बना हुआ है। ऐसे में इस प्रकार बाहर से आए हुए लोग शहर में रुकते हैं और व भी लॉक डाउन के दौरान तो लोगों में  स्वाभाविक है भय का माहौल है। सही जानकारी ही लोगों को भय से मुक्ति दिला सकती है।