स्वदेशी मेला में हुआ झांसी की रानी महानाट्य का मंचन ...
स्वदेशी मेला में 60 मिनट अंदर 100 कलाकारों ने 80 दृश्यों में दिखाया 350 साल का इतिहास !
ग्वालियर। रणभेरी बजते ही तोपें गरज उठीं, तलवारें चमक उठीं। दर्शकों को ऐसे लगे मानो वे सचमुच स्वदेशी मेला प्रागंण में युद्ध शुरू हो गया। यह नजारा सोमवार की शाम स्वदेशी मेला में वंदेमातरम समूह द्वारा स्वदेशी, स्वाबलंबन एवं स्वाभिमान पर आधारित महानाट्य झांसी की रानी लक्ष्मीबाई मंचन के दौरान देखने को मिला। रंगबिरंगी आतिशबाजी से वीरांगना मेला प्रागंण नहा उठा।
इस मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य यशवंत इंदापुरकर प्रांत से कार्यवाह विजय दीक्षित मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष अशोक जादौन स्वदेशी मेला के संयोजक आरती महेश्वरी स्वदेशी जागरण मंच के प्रांत सहसंयोजक राकेश शर्मा प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
नाटककार चंद्रप्रताप के निर्देशन में देश के अनेक वीरों की शहादत को नमन करने के लिए ध्वनि एवं प्रकाश पर आधारित प्रस्तुत किया गया भव्य नाट्य मंचन दर्शकों में कौतुहल पैदा कर गया। 60 मिनट में 80 दृश्यों में 100 कलाकारों ने 350 साला का इतिहास दिखा दिया।
महानाट्य में निर्देशक चंद्रप्रताप सिंह सिकरवार ने कई नवीन प्रयोग किए। झांसी की रानी एवं गंगाधरराव के विवाह का दृश्य नाटक में सबसे खुशनुमा और उल्लासित करने वाला था। कलाकारों ने जब राजस्थानी लोकनृत्य की सामुहिक प्रस्तुति दी, तो सारा वातावरण प्रफुल्लित हो उठा। एक घंटे की इस नाट्य प्रस्तुति में 4 वर्ष से लेकर 65 वर्ष तक के कलाकारों ने भागीदारी की।
उधम बुंदेला की बगावत...
महानाट्य में उधम सिंह बुंदेला की बगावत को प्रमुखता से दिखाया गया,जिसमेंं वह अपनी बु्ंदेली भाषा में हमें न तंग करो काहे पन्हैया सी देत हो..के माध्यम से निर्देशक लोकल टच देने मेें सफल रहे। अंत में अंग्रेजों से लोहा लेते हुए रानी वीरगति को प्राप्त हुई। और लोगों की आंखें सचमुच में नम हो गईं।




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