G NEWS 24 : 2600 यात्रियों की क्षमता वाली हाइड्रोजन ट्रेन में सिर्फ 40-60 यात्री ही करते हैं सफर !

कम यात्री संख्या को देखते हुए रेलवे अब ट्रेन का रूट दिल्ली तक बढ़ाने की तैयारी...

2600 यात्रियों की क्षमता वाली हाइड्रोजन ट्रेन में सिर्फ 40-60 यात्री ही करते हैं सफर !

नई दिल्ली। भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन 2600 यात्रियों की क्षमता के बावजूद फिलहाल बेहद कम यात्रियों के साथ चल रही है। हरियाणा के 89 किलोमीटर लंबे जींद-सोनीपत सेक्शन पर चलने वाली इस ट्रेन में पूरे सफर के दौरान आमतौर पर सिर्फ 40 से 60 यात्री ही मिलते हैं। कम यात्री संख्या को देखते हुए रेलवे अब ट्रेन का रूट दिल्ली तक बढ़ाने की तैयारी कर रहा है, हालांकि इसके लिए तकनीकी और संचालन से जुड़ी चुनौतियों को दूर करना होगा। 

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, उत्तर रेलवे पिछले करीब दो महीने से हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन कर रहा है। शुरुआत में जींद और सोनीपत के बीच प्रतिदिन दो फेरे लगाने की योजना थी, लेकिन कम यात्री मिलने के कारण फिलहाल ट्रेन सिर्फ एक आने-जाने का फेरा लगा रही है। ट्रेन के संचालन और नई तकनीक की निगरानी के लिए विशेषज्ञों की एक टीम भी लगातार काम कर रही है। 

भारत की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन का संचालन 17 जुलाई से शुरू हुआ था। यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित ट्रेन है और इसे क्लीन तथा सस्टेनेबल ट्रांसपोर्टेशन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया है। इसमें डीजल इंजन की तरह सीधे डीजल का इस्तेमाल नहीं होता, बल्कि हाइड्रोजन से बिजली बनाई जाती है, जिसका उपयोग ट्रेन चलाने में किया जाता है। रेलवे के अनुसार भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जो हाइड्रोजन आधारित रेल परिवहन तकनीक पर काम कर रहे हैं।

जींद-सोनीपत रूट पर हाइड्रोजन ट्रेन के अलावा तीन अन्य डेमू ट्रेनें भी चल रही हैं, लेकिन इनमें भी ज्यादा भीड़ नहीं होती। रेलवे से जुड़े कर्मचारियों के अनुसार इस रूट पर रोजाना ऑफिस आने-जाने वाले यात्रियों और विभिन्न उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या सीमित है। यही वजह है कि ट्रेनों को पर्याप्त यात्री नहीं मिल पा रहे हैं। ईंधन के मामले में फिलहाल कोई बड़ी समस्या नहीं बताई जा रही है। 

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, हाइड्रोजन ट्रेन एक बार टैंक पूरी तरह भरने के बाद करीब 250 से 300 किलोमीटर तक चल सकती है। दिल्ली से जींद की दूरी करीब 130 किलोमीटर है, इसलिए क्षमता के लिहाज से ट्रेन एक टैंक में यह सफर कर सकती है। हालांकि, अभी ट्रेन में हाइड्रोजन भरने की सुविधा केवल जींद में उपलब्ध है। ऐसे में दिल्ली तक सेवा बढ़ाने से पहले ईंधन भरने की व्यवस्था और ट्रेन के संचालन की पूरी योजना पर काम करना होगा।

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