नए मध्यप्रदेश कॉलोनी एकीकृत अधिनियम 2026 में...
अवैध कॉलोनी के कॉलोनाइजरों को होगी 10 साल की सजा,45 दिन में अवैध कॉलोनी तोड़ना होगी !
भोपाल । अवैध कॉलोनियों पर सख्ती से रोक लगाने और वैध को नियमों के मुताबिक तय समय सीमा में अनुमति मिलने का प्रावधान नए मध्यप्रदेश कॉलोनी एकीकृत अधिनियम 2026 में किया जा रहा है। नगरीय प्रशासन और विकास विभाग ने यह प्रारुप तैयार किया है, जिसमें 45 दिन में अवैध कॉलोनी को हटाने अनिवार्य रहेगा, वहीं अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक की जवाबदेही तय होगी। इसी के साथ 75 दिन में वैध कॉलोनी को अनुमति देना भी जरूरी रहेगा अन्यथा डिम्ड परमिशन मान्य होगी। अवैध कॉलोनाइजर को 10 साल की जेल और 1 करोड़ जुर्माना भुगतना पड़ेगा। पंचायतों से अनुमति के अधिकार मिलेंगे और ग्रामीण क्षेत्र में कलेक्टर तथा शहरी क्षेत्र में एसडीएम को विकास अनुमति जारी करने के अधिकार प्राप्त होंगे। कार्यपूर्ति प्रमाण-पत्र यानी कम्पलिशन सर्टिफिकेट भी 45 दिन में ही देना पड़ेगा।
पहले तो हर विधानसभा चुनाव के दौरान अवैध कॉलोनियों को वैध करने का हल्ला शासन द्वारा मचाया जाता है और हजारों कॉलोनियों को वैध करने का दावा किया जाता है। मगर बाद में गिनती की ही कॉलोनियां वैध हो पाती है। इंदौर नगर निगम ही मात्र सवा सौ कॉलोनियों को वैध कर पाया है, क्योंकि नदी-नाले, तालाब किनारे या नजूल-सरकारी के अलावा प्राधिकरण की योजना व अन्य में शामिल जमीनों पर काटी अवैध कॉलोनियों को वैध नहीं किया जा सका। अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप अवैध कॉलोनियों पर पूरी तरह से अंकुश लगाने और वैध कॉलोनियों को समय सीमा में अनुमति मिलने के साथ-साथ यह भी प्रावधान किया जा रहा है कि अब एक ही लाइसेंस पर बिल्डर और कॉलोनाइजर शहर-ग्रामीण के साथ-साथ पूरे प्रदेश में काम कर सकेंगे।
अभी अलग-अलग लाइसेंस लेना पड़ता है। 5 साल की समयावधि में कॉलोनी का पूर्ण विकास करना पड़ेगा। साथ ही ऑनलाइन कॉलोनी विकास से लेकर भूखंडों की जानकारी भी उपलब्ध रहेगी, ताकि खरीददार पता लगा सके कि उक्त कॉलोनी वैध है या नहीं। वहीं बड़ी संख्या में आम जनता ठगी का शिकार होती है और फिर सीएम हेल्पलाइन से लेकर अलग-अलग फोरम पर अपनी शिकायतें दर्ज करवाती है। नगर पालिका अधिनियम और पंचायत तथा ग्राम स्वरोजगार के मौजूदा अधिनियम में संशोधन किया जा रहा है और कुछ नई धाराएं भी जोड़ी जा रही है।
पंचायतों पर भी आरोप लगता है कि वह बिना सोचे-समझे भवन निर्माण से लेकर कॉलोनी विकास की अनुमतियां जारी कर देता है और पुरानी तारीखों में भी इसी तरह की अनुमतियां इंदौर के जमीनी जादूगर हासिल करते रहे हैं। लिहाजा अब पंचायतों से ये अधिकार छीना जा रहा है और ग्रामीण क्षेत्र में कलेक्टर द्वारा ही मंजूरी दी जाएगी और शहरी क्षेत्र में एसडीएम ही यह अनुमति जारी करेंगे। कॉलोनी के लिए 8 दिन में आवेदन करने के बाद निर्णय लेना होगा और उसके बाद नोटिस की अवधि 15 दिन की रहेगी और फिर 75 दिन पश्चात अनुमति स्वत: यानी डिम्ड मानी जाएगी। कॉलोनाइजरों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा और लगातार होने वाले विकास कार्य की अनुमतियों की जानकारी सब कुछ ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध रहेगा और खरीददार भी इसे ऑनलाइन चैक कर सकेंगे। विकास कार्य पूर्ण ना होने पर बंधक सम्पत्तियों को कब्जे में लेकर शासन यह कार्य करवाएगा। साथ ही ईडब्ल्यूएस और एलआईजी के लिए भी 15 फीसदी आरक्षण रखना पड़ेगा।



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