G News 24 : मध्यप्रदेश सरकार की नई परिवहन नीति के खिलाफ निजी बस संचालक हो रहे हैं लामबंद !

2 मार्च से चक्का जाम की दी चेतावनी...

मध्यप्रदेश सरकार की नई परिवहन नीति के खिलाफ निजी बस संचालक हो रहे हैं लामबंद !

सागर। सरकार की योजना के अनुसार अप्रैल 2026 से नई परिवहन नीति लागू की जानी है. सरकार बसें नहीं खरीदेगी, बल्कि बसें निजी ऑपरेटर्स की होंगी, लेकिन नियंत्रण सरकार के पास रहेगा. मध्यप्रदेश में ‘इस मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा योजना’ को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. 

नई परिवहन नीति के विरोध में निजी बस संचालकों ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है. सागर में रविवार (22 फरवरी) को आयोजित एक बड़े सम्मेलन में प्रदेशभर से आए बस ऑपरेटरों ने सरकार के फैसले के खिलाफ एकजुटता दिखाई और 2 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया.बस संचालकों का कहना है कि अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो वे पूरे प्रदेश में बसों का संचालन बंद कर देंगे, जिससे आम जनता को भी परेशानी उठानी पड़ सकती है.

55 जिलों से पहुंचे 400 से ज्यादा प्रतिनिधि

यह सम्मेलन मध्यप्रदेश बस ओनर्स एसोसिएशन के बैनर तले सागर में आयोजित किया गया. इसमें प्रदेश के 55 जिलों से 400 से अधिक बस ऑपरेटर्स, जिला अध्यक्ष और प्रतिनिधि शामिल हुए. सम्मेलन की अध्यक्षता एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष कुमार पांडेय ने की.

प्राइम रूट एसोसिएशन के अध्यक्ष गोविंद शर्मा सहित कई पदाधिकारियों ने मंच से सरकार की नई परिवहन नीति का विरोध किया. जिला प्रमुखों ने कहा कि सरकार की नीति निजी बस ऑपरेटरों के लिए नुकसानदेह है. उनका आरोप है कि यह नीति धीरे-धीरे निजी बस कारोबार को खत्म कर देगी.

मालिक से किराएदार बना रही है सरकार

बस ऑपरेटर्स का सबसे बड़ा आरोप यह है कि सरकार उन्हें मोटर मालिक से किराएदार बनाने की तैयारी कर रही है. उनका कहना है कि नई व्यवस्था में बसें भले ही निजी ऑपरेटरों की हों, लेकिन नियंत्रण पूरी तरह सरकार या उससे जुड़ी कंपनियों के पास रहेगा.

ऑपरेटर्स का कहना है कि इससे उनका स्वतंत्र व्यवसाय खत्म हो जाएगा और वे केवल अनुबंध पर काम करने वाले बनकर रह जाएंगे. उनका यह भी कहना है कि सरकार प्रदेश में परिवहन का “राष्ट्रीकरण” करना चाहती है, जिससे छोटे और मध्यम स्तर के ऑपरेटर बाहर हो जाएंगे.

20 साल बाद सरकार फिर शुरू कर रही है सेवा

मप्र बस ऑनर्स एसोसिएशन के महामंत्री जय कुमार जैन के मुताबिक, सरकार करीब 20 साल बाद फिर से सार्वजनिक परिवहन सेवा शुरू करने जा रही है. लेकिन सरकार के पास अपनी बसें नहीं हैं, इसलिए यह सेवा पीपीपी मॉडल पर शुरू की जा रही है.

बताया गया कि 7 निजी कंपनियों के माध्यम से अनुबंध किए जाएंगे. बस ऑपरेटर्स का कहना है कि इन कंपनियों से केवल 6 महीने के अनुबंध किए जा रहे हैं. उनका आरोप है कि पहले धीरे-धीरे नई बसें लगाई जाएंगी और फिर पुराने ऑपरेटर्स को बाहर कर दिया जाएगा.

बेरोजगारी बढ़ने का डर

बस ऑपरेटर्स यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष पांडेय ने कहा कि सरकार जमीनी हकीकत को समझना नहीं चाह रही है. मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री से मुलाकात के बाद भी कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला.

उनका कहना है कि अगर नई नीति इसी तरह लागू हुई तो सैकड़ों लोग बेरोजगार हो जाएंगे. ड्राइवर, कंडक्टर, क्लीनर और छोटे स्तर के मालिकों का धंधा बंद हो जाएगा. उन्होंने साफ कहा कि “हमारा धंधा-पानी बंद हो जाएगा और हजारों परिवार प्रभावित होंगे.”

ये हैं बस ऑपरेटर्स की मुख्य मांगें

बस संचालकों ने सरकार से कुछ स्पष्ट मांगें रखी हैं. उन्होंने कहा कि 24 दिसंबर 2025 को राजपत्र में प्रकाशित नई नीति के संशोधन का प्रारूप वापस लिया जाए. 29 जनवरी को प्रकाशित संशोधन को भी पूरी तरह निरस्त किया जाए.

साथ ही वर्तमान में जिस व्यवस्था के तहत बस संचालन हो रहा है, उसे यथावत रखा जाए. ऑपरेटर्स ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपेंगे. यदि उनकी बात नहीं सुनी गई तो 2 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी.

अप्रैल 2026 से लागू होगी नई नीति

सरकार की योजना के अनुसार अप्रैल 2026 से नई परिवहन नीति लागू की जानी है. इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच सस्ती, सुरक्षित और समय पर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है. सरकार खुद बसें नहीं खरीदेगी, बल्कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल पर काम करेगी. बसें निजी ऑपरेटर्स की होंगी, लेकिन नियंत्रण और निगरानी सरकार के पास रहेगी.

इस योजना के संचालन के लिए तीन स्तर की व्यवस्था बनाई गई है. राज्य स्तर पर एक होल्डिंग कंपनी बनाई गई है, जिसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे. संभाग स्तर पर सात कंपनियां काम करेंगी, जबकि जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में समितियां किराया और रूट तय करेंगी. 

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