ये अनिल कपूर श्रीदेवी की फिल्म नहीं हकीकत है...
पत्नी ने डेढ़ करोड़ लेकर अपना पति, उसकी प्रेमिका को सौंप दिया !
भोपाल। फिल्मों में लव ट्रायंगल की कहानियों में कहीं हीरो अपने प्रेम को त्याग कर दूसरे को दे देता है तो कहीं हीरोइन अपना प्रेमी किसी दूसरे को सौंप देती है फिल्मों में ड्रामा होता है और ड्रामा जितना ज्यादा हो फिल्म चलने की संभावना उतनी अधिक होती है इसलिए फिल्मों में ऐसी काल्पनिक घटनाएँ गढ़ी जाती हैं। लेकिन भोपाल के कुटुम्ब न्यायालय में इसी तरह का एक अजीबो-गरीब मामला आया जहाँ पत्नी खुद चाहती थी के पति उसकी प्रेमिका के साथ रहे और उसने अपने पति का सौदा लगभग ₹15000000 में किया।
इस घटना से यह तो साफ हो गया कि काल्पनिक घटनाएं आज के कलियुग में हकीकत बनने लगी हैं और इसे कलियुग नहीं धनयुग कहें तो बेहतर होगा क्योंकि यहां धन के लिए सब कुछ हो सकता है।ऐसा ही एक महिला ने भोपाल में किया है जिसने अपने शादीशुदा जीवन में उसके पति के जीवन में आई प्रेमिका को ही अपने पति को सौंप दिया और उसके बदले में डेढ़ करोड़ रुपया लिया। यह सुनकर हो सकता है कि आपको कोई फिल्म की कहानी याद आ रही हो लेकिन यह फिल्म नहीं हकीकत है।
भोपाल के कुटुम्ब न्यायालय में इसी तरह का एक अजीबोगरीब मामला आया जहाँ पत्नी खुद चाहती थी के पति उसकी प्रेमिका के साथ रहे और उसने अपने पति का सौदा लगभग ₹15000000 में किया। पत्नी ने एक डुप्लेक्स मांगा ₹2700000 नकद लिए और अपने पति को प्रेमिका के साथ रहने की इजाजत दे दी। यह पूरा मामला घंटों की काउंसलिंग के बाद सुलझा और तीनों पक्ष इस बात पर राजी हुए। प्रेमिका भी खुश थी कि उसे प्रेमी मिल रहा था और पत्नी भी खुश थी कि उसे पैसा मिल रहा था लेकिन क्या वह पुरुष खुश था या नहीं। इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है।
इस कहानी के किरदार असली हैं लेकिन हम आपको उनकी पहचान नहीं बताएंगे लेकिन इस फिल्म की कहानी काफी हद तक 1997 आई राज कंवर निर्देशित फिल्म जुदाई से मिलती जुलती है। इस फिल्म में अनिल कपूर पति की भूमिका में हैं और श्रीदेवी उनकी पत्नी हैं। अनिल कपूर जिस कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करते हैं उसके मालिक की बेटी का दिल अनिल कपूर पर आ जाता है और वह किसी भी कीमत पर अनिल कपूर को पाने का प्रयास करती है।अनिल कपूर की पत्नी श्रीदेवी लालची होती है उसे हाईफाई लाइफ चाहिए होती है। इसलिए प्रेमिका उर्मिला पत्नी से उसके पति अनिल कपूर को खरीदने का एक सौदा करती हैं। और इसके आगे क्या कुछ हुआ?वह आप मेरी फिल्म देखी हो तो आप जानते ही हैं।
बिल्कुल इस फिल्म की तर्ज पर ही भोपाल में यह घटना घटी जहां पति एक सरकारी कार्यालय में काम करते हैं और उनका प्रेम अपने ही विभाग की एक महिला अधिकारी से हो जाता है। धीरे धीरे नजदीकियां बढ़ती हैं और घर से दूरी बढ़ती जाती है। इस हकीकत की कहानी में भी इस पुरुष के दो बेटियाँ हैं। लेकिन यहां पर कुटुंब न्यायालय में शिकायत बड़ी बेटी ने दर्ज कराई थी क्योंकि वह घर के अशांति से परेशान थी। जब कुटुंब न्यायालय ने पति पत्नी को काउंसलिंग के लिए बुलाया तो पति ने अपने सहकर्मी से संबंधों को स्वीकार किया और इच्छा जताई कि वह न तो पत्नी को तलाक देना चाहता है और न ही प्रेमिका को छोड़ना। शुरुआत में तो कुटुंब न्यायालय भी इस बात को लेकर अचंभित हुआ लेकिन काउंसलिंग के द्वारा निष्कर्ष निकालने का प्रयास किया।
कई बार की काउंसलिंग के बाद पत्नी ने खुद की और बेटियों की आर्थिक सुरक्षा की मांग को रखते हुए घर कैश और तमाम शर्तें रखीं और पति की प्रेमिका ने इसे स्वीकार कर लिया और प्रेमिका अधिकारी थी और वह भी चाहती थी कि पत्नी की माँग कोई गलत नहीं है इसलिए पूरे मामले का समझौता डेढ़ करोड़ में करना तय हुआ। एक तरफ तो इस तरह का लिया गया समझौता। यह सवाल खड़े करता है कि क्या सामाजिक रूप से यह सही है लेकिन दूसरी ओर यह एक ज्वलंत उदाहरण इस बात का भी है कि यदि खुशी खुशी सामंजस्य बिठाकर किसी वैवाहिक और आंतरवैवाहिक मामले का निष्कर्ष निकाला जा सकता है तो फिर इसमें गलत ही क्या है !!!










0 Comments