भारत सरकार एवं गृह मंत्रालय को सतर्क रहना चाहिए ...
140 करोड़ में से 10-20 लाख को भड़काना,मुश्किल काम नहीं,कुछ मक्कारों के अब भी प्रयास जारी है !
140 करोड़ की जनसख्या में से 10 -20 लाख लोगों को कुछ ले दे कर भड़काना की मुश्किल काम नहीं है। इसके लिए देश में कुछ मक्कारों के लगातार प्रयास जारी है !इनके द्वारा इसकी भूमिका तो बनाई जा चुकी है और लगातार प्रयास भी किये जा रहे हैं। लेकिन बार बार ये असफल हो जाते हैं उसका कारण भारत के लोगों का जागरूक होना। लेकिन काम केवल जागरूक होने से नहीं चलेगा इनसे सतर्क भी रहना जरूरी है। इतिहास गवाह है आक्रांता गोरी भी 17 बार पृथ्वीराज चौहान से हारा था लेकिन एक गद्दार जयचंद के कारण एक बार हारने पर देश का जो हाल हुआ सभी जानते हैं। पृथ्वीराज चौहान ने गोरी 17 बार जीवनदान दिया था और उसकी यही सबसे बड़ी गलती थी। गोरी को सिर्फ एक मौका मिला तो उसने देश में जो किया किसी से छिपा नहीं है। इसलिए आप ऐसी कोई गलती भूल से भी मत कर देना। ऐसा न हो इसके लिए भारत सरकार एवं गृह मंत्रालय को सतर्क रहना चाहिए।
इनके इरादों से तो ये जाहिर होता है कि यह होकर रहेगा, 140 करोड़ में से दस बीस लाख को भड़काना की मुश्किल काम नहीं, कुछ मक्कारों के लगातार प्रयास जारी है !इनकी प्लानिंग के अनुसार देश के कुछ गद्दार रुपयों पर बिकेंगे , कुछ विचारधारा पर और कुछ अंधविरोध के नाम पर, विपक्ष का आचरण ये सब साफ साफ बता रहा है। अब हमें और आपको तय करना है कि हमें श्रीलंका , बांग्लादेश , नेपाल बनना है या हिंदुस्तान ही बने रहना है।
सूत्रों की माने तो खबर पक्की है,
अगले महीने से दिल्ली की "C" कंपनी के युवराज और उसके #toolkit एक और क्रांति की कोशिश करने वाले हैं। एक ओर अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर पंजाब और पश्चिमी यूपी के किसानों को फिर से सड़कों पर उतारने की योजना है (योगेन्द्र यादव को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है), वहीं बिहार-उत्तर प्रदेश में जातिवादी संगठनों से संपर्क किया जा रहा है ताकि वे अपने- अपने लोगों को सड़कों पर उतार सकें। ये सब उत्तर प्रदेश चुनावों तक चलेगा। यानि लगभग एक साल। इनके आचरण और व्यवहार और भाषा को देखकर "योगी- मोदी ... तेरी कब्र खुदेगी" महज़ एक नारा नहीं, उनका संकल्प है" स्पष्ट हो जाता है।
कभी गौर किया है कि सोशल मीडिया का एल्गोरिथम (Algorithm) बदलने लगा है? आपकी नजरों से हाल फ़िलहाल वही वीडियो और पोस्ट गुजर रहे हैं, जिससे आपको लगे कि देश में जाति-धर्म के नाम पर लोगों के साथ अन्याय हो रहा है। या फिर जातिवाद की भावना भड़काने वाले वीडियो और पोस्ट ज़्यादा दिख रहे हैं?
याद रखें, बड़ी मुश्किल से देश की अर्थव्यवस्था ने रफ्तार पकड़ी है, बड़ी मुश्किल से यूपी संभला है, बड़ी मुश्किल से सनातन पुनर्जागरण काल आया है। ये भी याद रखिए कि सदियों के बाद मोदी-योगी- शाह जैसा संयोग बनता है। एक बार आपसी लड़ाई में ये सब बर्बाद हो गया, तो फिर खोने के लिए आपके और हमारे पास कुछ नहीं होगा और शायद हम और आप भी नहीं होंगे !!!










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