पाकिस्तान को गाजा शांति बोर्ड में शामिल करने पर बेंजामिन नेतन्याहू टेंशन में हैं ...
गाजा शांति बोर्ड में भारत - पाकिस्तान को शामिल का ट्रंप ने भेजा न्योता !
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को गाजा के लिए गठित किए जा रहे ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का हिस्सा बनने का न्योता दिया है. ‘बोर्ड ऑफ पीस’ अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल और हमास के बीच हुए सीजफायर समझौते के दूसरे चरण का अहम हिस्सा है. इस बोर्ड की जिम्मेदारी गाजा में पुनर्निर्माण, शासन व्यवस्था, निवेश और पूंजी जुटाने की निगरानी करना होगा.
बोर्ड की अध्यक्षता खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे. शुरुआत में यह संस्था गाजा संघर्ष पर केंद्रित रहेगी, लेकिन बाद में इसे अन्य वैश्विक संघर्षों से निपटने के लिए भी विस्तारित किया जाएगा. यह जानकारी अमेरिकी पत्र और ड्राफ्ट चार्टर के हवाले से दी गई है. यदि भारत इस निमंत्रण को स्वीकार करता है, तो वह अन्य सदस्य देशों की तरह तीन वर्षों के कार्यकाल के लिए बोर्ड का हिस्सा बनेगा.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि कोई देश तीन साल के बाद भी बोर्ड की सदस्यता जारी रखना चाहता है, तो उसे 1 अरब डॉलर (लगभग ₹8,300 करोड़) का योगदान देना होगा. इसके बदले उस देश को बोर्ड की स्थायी सदस्यता मिलेगी. यह राशि बोर्ड की गतिविधियों और संचालन के लिए इस्तेमाल की जाएगी. फिलहाल, शुरुआती तीन साल की सदस्यता के लिए किसी भी तरह के वित्तीय योगदान की आवश्यकता नहीं होगी.
डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने के लिए मिस्त्र और तुर्की के बाद अब पाकिस्तान को भी न्योता दिया है. ये जानकारी पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई है.पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को गाजा शांति बोर्ड में शामिल होने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से न्योता मिला है. बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान गाजा में शांति और सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में शामिल रहेगा, जिससे संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुसार फिलिस्तीन मुद्दे का स्थायी समाधान निकल सके.
इसके बाद ये माना जा रहा है कि अमेरिका के इस कदम से इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की परेशानी बढ़ सकती है, क्योंकि पाकिस्तान खुलेआम हमास का समर्थन करता है और शुरू से ही इजरायल का विरोध करता आया है. पाकिस्तान के अलावा डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी को भी गाजा 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है. इसकी जानकारी दोनों ही देशों की ओर से दी गई है. बता दें कि ये बोर्ड गाजा के अस्थायी शासन की देखरेख करेगा.
तुर्की और मिस्त्र ने क्या कहा
तुर्की के राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि उन्हें ट्रंप से एक पत्र मिला है, जिसमें एर्दोगन को पैनल में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है. मिस्र के विदेश मंत्री ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ट्रंप के निमंत्रण की समीक्षा की जा रही है.
पैनल में कौन-कौन शामिल
व्हाइट हाउस की ओर से शुक्रवार को कहा गया कि ट्रंप की गाजा शांति योजना को लागू करने के लिए एक कार्यकारी पैनल बनाया गया है, जिसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान शामिल हैं. ये पैनल शासन और क्षेत्रीय कूटनीति से लेकर पुनर्निर्माण के लिए फंड और निवेश जुटाने तक के पोर्टफोलियो की देखरेख करेगा.
व्हाइट हाउस के बयान के मुताबिक व्यापक 'बोर्ड ऑफ पीस' रणनीतिक देखरेख प्रदान करेगा और गाजा के संघर्ष से विकास की ओर ट्रांजिशन के दौरान जवाबदेही सुनिश्चित करेगा. अमेरिका ने एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल तैनात करने और बदलाव के तहत गाजा में शासन, सुरक्षा और पुनर्निर्माण प्रयासों के समन्वय के लिए एक उच्च प्रतिनिधि नियुक्त करने की योजना बनाई है.
गाजा में आगे क्या होगा?
एपी (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, बोर्ड के सदस्य देश ट्रंप के सीजफायर प्रस्ताव के दूसरे चरण के तहत गाजा में अगले कदमों की निगरानी करेंगे. इस चरण में शामिल हैं:
- गाजा में एक नई फ़िलिस्तीनी समिति का गठन
- एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती
- हमास का निरस्त्रीकरण
- गाजा का पुनर्निर्माण और दोबारा बसावट
- ‘फाउंडिंग मेंबर्स’ होंगे शामिल देश
ट्रंप द्वारा दुनिया भर के नेताओं को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि इस बोर्ड में शामिल देश इसके फाउंडिंग मेंबर्स होंगे और वे वैश्विक संघर्षों को सुलझाने के लिए एक साहसिक और नए दृष्टिकोण की शुरुआत करेंगे.










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