G News 24 : देश में जब शिक्षा अनिवार्य है, टैक्स अनिवार्य है, तो जनसंख्या नियंत्रण भी अनिवार्य हो !

अधिकार नहीं, संकुचित सोच एवं घोर लापरवाही है ,अधिक बच्चे पैदा करना ...

देश में जब शिक्षा अनिवार्य है, टैक्स अनिवार्य है, तो जनसंख्या नियंत्रण भी अनिवार्य हो !

भारत आज जिस सबसे बड़े मौन संकट से जूझ रहा है, उसका नाम है, बेलगाम जनसंख्या वृद्धि। यह संकट न तो किसी धर्म का है, न किसी जाति का, और न ही किसी राजनीतिक दल का। यह संकट सीधा-सीधा देश के संसाधनों, अर्थव्यवस्था और भविष्य से जुड़ा है। ऐसे में अब समय आ गया है कि सरकार लोकप्रिय नहीं, बल्कि निर्णायक कदम उठाए।

योजनाएं ज़रूरतमंद के लिए, लापरवाह के लिए नहीं...

खाद्यान्न सुरक्षा योजना, आयुष्मान भारत जैसी कल्याणकारी योजनाएं उन नागरिकों के लिए बनाई गई हैं, जो वास्तव में आर्थिक रूप से कमजोर हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या एक ऐसा परिवार, जिसमें पांच से अधिक सदस्य हैं, और जो लगातार जनसंख्या बढ़ा रहा है, उसे बिना शर्त सरकारी सहायता मिलनी चाहिए ?

यदि किसी परिवार में पांच से अधिक सदस्य हैं, तो यह मान लेना अनुचित नहीं कि आय के स्रोत भी अधिक होंगे, या परिवार नियोजन के प्रति लापरवाही बरती गई है

ऐसे में यह प्रस्ताव तार्किक और न्यायसंगत है कि...

1. पांच सदस्यीय एकल परिवार को ही खाद्यान्न, आयुष्मान,उज्ज्वला,पीएम आवास जैसी सभी अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ मिले।

2. पांच से अधिक सदस्य होने पर खाद्यान्न,आयुष्मान,लाड़ली बहना,उज्ज्वला,पीएमआवास जैसी सभी अन्य सरकारी योजनाओंइन योजनाओं का लाभ स्वतः बंद कर दिया जाए।

यह कदम न केवल सरकारी संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित करेगा, बल्कि जिम्मेदार नागरिकता को भी प्रोत्साहित करेगा।

जनसंख्या नियंत्रण: धर्म–जाति से ऊपर राष्ट्रीय नीति...

परिवार नियोजन और नसबंदी जैसे संसाधनों को लेकर दशकों से राजनीति होती रही है। लेकिन अब यह विषय भावना नहीं, भविष्य का है। जनसंख्या किसी धर्म से नहीं बढ़ती, बल्कि गैर-जिम्मेदारी से बढ़ती है।

इसलिए जरूरी है कि...

परिवार नियोजन को धर्म और जाति की परिभाषा से मुक्त किया जाए

नसबंदी और परिवार नियोजन को अनिवार्य नीति के रूप में लागू किया जाए

इसे मानवाधिकार नहीं, बल्कि राष्ट्रीय दायित्व के रूप में देखा जाए

जब शिक्षा अनिवार्य हो सकती है, टैक्स अनिवार्य हो सकता है, तो जनसंख्या नियंत्रण क्यों नहीं?

कठोर निर्णय ही बचाएंगे कल...

आज यदि सरकार ने कठोर निर्णय नहीं लिए, तो कल बेरोजगारी बढ़ेगी,स्वास्थ्य सेवाएं चरमराएंगी, गरीबी और असमानता विस्फोटक रूप ले लेगी। जनसंख्या नियंत्रण किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के पक्ष में है।

अब बहस नहीं, फैसला चाहिए...

देश को अब खोखले नारों की नहीं, ठोस नीति और सख्त क्रियान्वयन की जरूरत है, कल्याणकारी योजनाएं प्रोत्साहन हों, लापरवाही का इनाम नहीं।

  • कम परिवार - बेहतर भविष्य
  • जिम्मेदार नागरिक-मजबूत राष्ट्र

यही आज की सबसे बड़ी राष्ट्रनीति होनी चाहिए...

Reactions

Post a Comment

0 Comments