सुप्रीम कोर्ट जमानत पर आज सुनाएगा फैसला...
अब तय होगा कि उमर खालिद और शरजील इमाम को मिलेगी राहत या फिर खाते रहेंगे जेल की हवा !
सुप्रीम कोर्ट सोमवार को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े कथित बड़े षड्यंत्र मामले में आरोपी शरजील इमाम, उमर खालिद और अन्य की जमानत याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाएगा.न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और एन वी अंजारी की पीठ ने 10 दिसंबर को सभी पक्षों की दलीलें सुनकर फैसला सुरक्षित रखा था.
इन सभी आरोपियों ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया गया था. न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन वी अंजारी की पीठ गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद द्वारा दायर जमानत याचिकाओं पर भी फैसला सुनाएगी. अदालत ने सभी पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद 10 दिसंबर को अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था.
याचिकाकर्ताओं ने दी ये दलीलें
जमानत याचिकाओं की सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से पेश वकीलों ने मुख्य रूप से मुकदमे में हो रही अत्यधिक देरी को आधार बनाया. अदालत को बताया गया कि आरोपी पिछले 5 वर्षों से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि अब तक मुकदमे की शुरुआत होने की कोई ठोस संभावना नजर नहीं आ रही है. याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि इतने लंबे समय बाद भी अभियोजन पक्ष इस बात का कोई प्रत्यक्ष सबूत पेश नहीं कर पाया है, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपियों ने हिंसा भड़काई थी. वकीलों ने दलील दी कि लंबे समय तक बिना ट्रायल के हिरासत में रखना व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है.
दिल्ली पुलिस का पक्ष
वहीं, दिल्ली पुलिस ने सभी जमानत याचिकाओं का कड़ा विरोध किया. पुलिस ने अदालत में कहा कि यह मामला केवल हिंसा का नहीं, बल्कि राज्य को अस्थिर करने की एक सुनियोजित साजिश से जुड़ा हुआ है. अभियोजन पक्ष के अनुसार, ये विरोध प्रदर्शन खुद पैदा नहीं हुए थे, बल्कि सत्ता परिवर्तन और आर्थिक गतिविधियों को बाधित करने के उद्देश्य से रची गई एक साजिश का हिस्सा थे.
दिल्ली पुलिस ने यह भी दावा किया कि कथित साजिश को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति की भारत यात्रा के साथ जानबूझकर जोड़ा गया था, ताकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान आकर्षित किया जा सके और नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के मुद्दे को वैश्विक स्तर पर उठाया जा सके. पुलिस का कहना था कि CAA को शांतिपूर्ण विरोध के नाम पर एक कट्टरपंथी उत्प्रेरक के रूप में इस्तेमाल किया गया. अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपियों द्वारा रची गई गहरी जड़ें जमा चुकी, पूर्व नियोजित और सोची-समझी साजिश के परिणामस्वरूप 53 लोगों की मौत हुई और बड़े पैमाने पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा. दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि अकेले दिल्ली में इस हिंसा के बाद 753 एफआईआर दर्ज की गई थीं. साथ ही यह भी कहा गया कि रिकॉर्ड में मौजूद साक्ष्यों से संकेत मिलता है कि इस साजिश को देश के अन्य हिस्सों में भी दोहराने की कोशिश की जा रही थी.
अभियोजन पक्ष ने विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुप्स, दिल्ली प्रोटेस्ट सपोर्ट ग्रुप (DPSG) और जामिया जागरूकता अभियान टीम का उल्लेख करते हुए दावा किया कि ये प्लेटफॉर्म कथित साजिश के समन्वय और प्रचार के लिए इस्तेमाल किए गए थे. दिल्ली पुलिस ने यह भी तर्क दिया कि मुकदमे में हुई देरी के लिए खुद आरोपी जिम्मेदार हैं और यदि वे सहयोग करें, तो ट्रायल 2 वर्षों के भीतर पूरा किया जा सकता है.
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2 सितंबर को शरजील इमाम, उमर खालिद और सात अन्य आरोपियों मोहम्मद सलीम खान, शिफा उर रहमान, अतहर खान, मीरान हैदर, शादाब अहमद, अब्दुल खालिद सैफी और गुलफिशा फातिमा की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं. उसी दिन एक अलग पीठ ने आरोपी तसलीम अहमद की जमानत याचिका भी खारिज कर दी थी. उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि प्रथम दृष्टया पूरी साजिश में इमाम और खालिद की भूमिका गंभीर प्रतीत होती है. अदालत ने टिप्पणी की थी कि उन्होंने कथित तौर पर सांप्रदायिक आधार पर भड़काऊ भाषण देकर मुस्लिम समुदाय के लोगों को बड़े पैमाने पर लामबंद करने की कोशिश की थी.
जानें क्या है पूरा मामला...
बता दें, फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भयंकर हिंसा भड़क उठी थी. इस हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे. दिल्ली पुलिस ने शरजील इमाम को 2020 में UAPA के तहत गिरफ्तार किया था और उन्हें इस दंगा मामले में मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक बताया गया था. उमर खालिद और अन्य आरोपियों पर भी दंगों के पीछे बड़ी साजिश का हिस्सा होने का आरोप है. अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि लंबे समय से जेल में बंद इन आरोपियों को जमानत मिलेगी या नहीं.









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