G NEWS 24 : गणतंत्र दिवस पर इस बार उज्जैन में ध्वजारोहण करेंगे मुख्यमंत्री

भव्य परेड और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू...

गणतंत्र दिवस पर इस बार उज्जैन में ध्वजारोहण करेंगे मुख्यमंत्री

धार्मिक नगरी उज्जैन में इस वर्ष राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस का मुख्य आयोजन एक नए ऐतिहासिक स्थल पर किया जाएगा। प्रतिवर्ष पारंपरिक रूप से दशहरा मैदान में आयोजित होने वाला यह समारोह अब कार्तिक मेला ग्राउंड में आयोजित होगा। आयोजन स्थल में बदलाव के साथ प्रशासन ने भव्य परेड और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू कर दी हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा ध्वजारोहण किए जाने की प्रबल संभावना है। अब तक गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारियों के तहत पुलिस, स्काउट-गाइड, होमगार्ड और स्कूली बच्चे दशहरा मैदान में अभ्यास कर रहे थे। हालांकि, भोपाल प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गणतंत्र दिवस समारोह को कार्तिक मेला ग्राउंड पर आयोजित करने की इच्छा व्यक्त की। 

मुख्यमंत्री की इस मंशा के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित निर्णय लेते हुए आयोजन स्थल बदल दिया। अब शेष सभी तैयारियां और रिहर्सल इसी नए स्थल पर की जाएंगी। उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि 26 जनवरी का मुख्य समारोह कार्तिक मेला ग्राउंड में आयोजित किया जाएगा। इसके लिए प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने आयोजन स्थल का निरीक्षण शुरू कर दिया है। मैदान की साफ-सफाई, बैठक व्यवस्था और परेड के लिए ट्रैक तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्तिक मेला ग्राउंड का क्षेत्रफल बड़ा होने के कारण यहां अधिक संख्या में आम नागरिक और श्रद्धालु समारोह में शामिल हो सकेंगे।

उज्जैन में पहली बार शिप्रा नदी के तट स्थित कार्तिक मेला ग्राउंड पर गणतंत्र दिवस की परेड आयोजित की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं ध्वजारोहण करेंगे। इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह की थीम ‘अलौकिक सिंहस्थ’ रखी गई है, जिसका उद्देश्य जन-जन तक सिंहस्थ के संदेश को पहुंचाना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीआईपी रेस्ट हाउस में बताया था कि आगामी सिंहस्थ का आयोजन दत्त अखाड़ा-अंकपात क्षेत्र में होना है। ऐसे में गणतंत्र दिवस समारोह के माध्यम से सिंहस्थ के अलौकिक और दिव्य स्वरूप की जानकारी आमजन तक पहुंचाई जाएगी। ‘अलौकिक सिंहस्थ’ थीम के तहत उज्जैन की आध्यात्मिकता, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत के साथ-साथ सिंहस्थ की दिव्यता, आस्था और परंपराओं का प्रदर्शन किया जाएगा।

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