बॉर्डर पर भैरव बटालियन और IBG की तैनाती...
अमेरिका की सह पर पाकिस्तान,अगर इस बार भारत से भिड़ा तो रोएगा खून के आंसू !
जब दुनिया में ईरान और अमेरिका के बीच वॉर का काउंटडाउन चल रहा है. तब भारत और पाकिस्तान के बीच जंग जैसे हालात फिर से बन रहे हैं. पिछले 24 घंटे में यानी कल से अब तक ऐसी कई घटनाएं एक साथ हुई हैं. जिसे देखने के बाद आप आसानी से समझ जाएंगे कि भारत-पाकिस्तान के बीच कभी भी युद्ध छिड़ सकता है.भारतीय सेना तेजी से भैरव बटालियन और IBG की तैनाती की ओर बढ़ रही है. इसका क्या संकेत माना जाए. क्या भारत-पाकिस्तान युद्ध करीब है? अगर दोनों जंग हो गई तो इस बार PAK खून के आंसू रोएगा. बड़ी बात ये है कि आज ही भारतीय सेना ने पाकिस्तान को एक झांकी दिखाई है. इस झांकी का मतलब ये है कि मुनीर अगर युद्ध चाहता है तो युद्ध ही सही. संभावित युद्ध की इस चुनौती से निपटने के लिए भारत ने नए बैटल ग्रुप्स को सेवा में तैनात कर दिया है जिनकी एक झलक गुरुवार को आर्मी डे परेड में देखने को मिली.
भारतीय सेना 4 साल तक के युद्ध के लिए तैयार...
इससे पहले थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी भी कह चुके हैं कि अगर पाकिस्तान से 4 दिन से लेकर 4 साल तक का युद्ध भी हुआ तो भारतीय सेना इसके लिए तैयार है. आज हम भी यही कह रहे हैं कि अगर आसिम मुनीर युद्ध चाहता है तो फिर उसके नापाक इरादों को कुचलने के लिए युद्ध ही सही. इसी लक्ष्य के साथ आज भारतीय सेना ने जयपुर में परेड का आयोजन किया था.
यहां आपको जानना चाहिए कि ये पहली बार है जब सेना ने आर्मी डे पर इतनी बड़ी परेड का आयोजन किसी छावनी क्षेत्र के बाहर किया है. सबसे पहले आपको इस परेड में शामिल उन चेहरों के बारे में जानना चाहिए जिन्हें पाकिस्तान का काल कहा जा रहा है. ये है भारतीय सेना की नई और शक्तिशाली भैरव बटालियन. इस बटालियन के जांबाजों ने आज पहली बार किसी परेड में हिस्सा लिया है.
आपको ये जानना चाहिए आखिर क्यों भैरव बटालियन की इस कदमताल की गूंज रावलपिंडी में पाकिस्तानी फौज के हेडक्वार्टर तक गूंज रही है. भैरव बटालियन का ध्येय वाक्य है Fight Tonight. इसका मतलब है अगर लड़ना है तो अभी लड़ाई शुरु करो. ये ध्येय वाक्य इस बटालियन का लक्ष्य बताने के लिए काफी है. भैरव बटालियन को बॉर्डर पर नहीं बल्कि बॉर्डर पार के ऑपरेशंस के लिए तैयार किया गया है.
दुश्मन के गढ़ में घुसने के लिए ट्रेंड हैं 'भैरव'
यानी ये भैरव कमांडो सीधे दुश्मन के क्षेत्र में घुसकर उसकी सेना या सैन्य संसाधनों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इन कमांडोज को कम वक्त में ज्यादा नुकसान पहुंचाने के मकसद से ट्रेनिंग दी गई है. हर भैरव बटालियन को ऐसे बख्तरबंद वाहन दिए गए हैं जो छोटी दूरी की मिसाइल और मोर्टार दागने वाली यूनिट से लैस हैं. भैरव बटालियन को इस तरह से तैयार किया गया है कि वो शत्रु के बॉर्डर के अंदर 10 किलोमीटर दूर तक नुकसान पहुंचाने का माद्दा रखती है.
आपको याद होगा वर्ष 2016 में भारतीय सेना की स्पेशल फोर्सेज के कमांडोज ने PoK में सर्जिकल स्ट्राइक की थी. इसी सैन्य सिद्धांत को अब भारतीय सेना न्यू नॉर्मल बनाने जा रही है. यानी आने वाले वक्त में जब भी पाकिस्तान से कोई आतंकी हमला होगा तो भैरव कमांडो सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कार्रवाई को अंजाम देंगे और ये कार्रवाई पहले से ज्यादा बारूदी और घातक होगी.
जयपुर में पाकिस्तान को भारतीय शक्ति का संदेश देती इस परेड में एक और सैन्य यूनिट को देश ने पहली बार देखा है. ये है भारतीय सेना की शक्तिबाण रेजीमेंट जिसे हाल ही में तैनात किया गया है. शक्तिबाण रेजीमेंट एक ऐसी मिलिट्री यूनिट है जो तोपखाने के साथ ही साथ लंबी दूरी के अटैक ड्रोंस से भी लैस है. यानी इस रेजीमेंट के बहादुर ना सिर्फ ड्रोन से अपने टारगेट को ढूंढेंगे बल्कि जरूरत पड़ने पर 300 किलोमीटर दूर तक ड्रोन दागकर भी दुश्मन को तबाह करेंगे.
पाकिस्तानी फौज को पता है अपनी दुर्गति, फिर भी...
आज भारत की सामरिक शक्ति पाकिस्तान से कई गुना ज्यादा बढ़ चुकी है लेकिन पाकिस्तानी फौज और उसके जनरलों के अंदर हमेशा से भारत के साथ जंग छेड़ने की एक बेबुनियाद जिद रही है. इसी जिद को लेकर मशहूर सामरिक लेखक क्रिस्टिन फेयर ने एक लेख लिखा था, 'पाकिस्तान के जनरल हमेशा भारत से युद्ध करने से पहले अपने नुकसान का आंकलन करते हैं. पाकिस्तानी फौज को पता होता है कि भारत से युद्ध में नुकसान उनका ही होना है लेकिन पाकिस्तान में भारत विरोधी सोच और फौज के खोखले कद को बरकरार रखने के लिए वो हर हार के बाद भारत के साथ एक और युद्ध की तैयारी करने लगते हैं.जो क्रिस्टीन फेयर ने लिखा है उसी डॉक्ट्रिन को आज पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अपना लिया है. मुनीर की कमान में ही ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने भारत से शिकस्त खाई है लेकिन मुनीर दोबारा एक नए युद्ध को अंजाम देने के कोशिश कर रहा है.
हो सकता है, आपके अंदर सवाल उठ रहा हो कि अभी ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को इतना नुकसान पहुंचा है तो फिर मुनीर दोबारा युद्ध के बारे में कैसे सोच सकता है. इस सवाल का जवाब है मुनीर का वो ओवर कॉन्फिडेंस जो उसे अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप से मिला है. मुनीर को लग रहा है कि ईरान और अमेरिका के आशंकित टकराव के बीच वो भारत से युद्ध करेगा तो उसे अमेरिकी मदद मिलेगी. अगर इतिहास की नजर से देखा जाए तो मुनीर का ये आंकलन गलत नहीं है.
अबकी बार भारत संभलने का भी मौका नहीं देगा
जब 1965 में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ तो जंग से कुछ महीने पहले ही अमेरिका ने पाकिस्तान को मजबूत और दमदार पैटन टैंक सप्लाई किए थे. 1971 की जंग में अमेरिका ने अपना नौसैनिक बेड़ा पाकिस्तान की मदद के लिए भेज दिया था. करगिल के युद्ध में भी अमेरिका ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को बचाने के लिए भारत को सैटेलाइट कोओर्डिनेट यानी घुसपैठियों की लोकेशन देने से इंकार कर दिया था.
आज भारत और अमेरिका के रिश्ते पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. ट्रंप ने भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया है तो भारत में ट्रंप के प्रतिनिधि संबंध आगे बढ़ाने की बात कर रहे हैं. मुनीर शायद इसी माहौल का फायदा उठाना चाहता है लेकिन मुनीर ने जो इतिहास पढ़ा है उसका लेटेस्ट चैप्टर शायद वो भूल गया है. ये चैप्टर है ऑपरेशन सिंदूर जिसे इतनी तेजी और सटीक तरीके से इंजाम दिया गया था कि दुनिया के किसी भी किरदार को पाकिस्तान की मदद करने का मौका नहीं मिला था. आज आर्मी डे के मौके पर भारतीय सेना ने एक शॉर्ट फिल्म रिलीज की है.
हिंदी की एक कहावत है . विनाश काले विपरीत बुद्धि . यानी इंसान का जब विनाश आता है तो नियती उसकी बुद्धि हर लेती है. कुछ ऐसा ही आसिम मुनीर के साथ भी हो रहा है. भारत और अमेरिका को लेकर CFR यानी काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस की लेटेस्ट रिपोर्ट साफ-साफ बता रही है कि भारत से युद्ध करने के लिए मुनीर अलग-अलग पैंतरे अपनाएगा. अब हम आपको भारत-पाकिस्तान के संभावित युद्ध से जुड़ी रिपोर्ट का आंकलन बताने जा रहे हैं.
2026 में पाकिस्तान कर सकता है हमला
CFR की रिपोर्ट के पहले बिंदु में कहा गया है कि भारत के साथ लगती सरहद पर पाकिस्तान अपनी सैन्य तैनाती बढ़ाएगा. दूसरे बिंदु में कहा गया है कि सिंधु नदी जल समझौते को लेकर भी पाकिस्तान सीमित टकराव शुरु कर सकता है. रिपोर्ट के तीसरे और सबसे अहम बिंदु में साफ-साफ कहा गया है कि साल 2026 में भारत को उकसाने के लिए पाकिस्तान की तरफ से आतंकी गतिविधियां बढ़ेंगी.
CFR की रिपोर्ट में युद्ध से जुड़े जिस तीसरे बिंदु का जिक्र किया गया है . उस टेरर प्लान पर मुनीर ने काम करना भी शुरु कर दिया है . इस टेरर प्लान का पूरा खाका भी हम आपको बताएंगे लेकिन उससे पहले जम्मू में अचानक बढ़ी गतिविधियों पर नजर डालना बेहद जरूरी है. हाल ही में जम्मू-कश्मीर बॉर्डर पर लगातार पाकिस्तानी ड्रोंस की तादाद बढ़ी है. हालांकि भारतीय एयर डिफेंस ने कई ड्रोंस को मार गिराया है लेकिन पाकिस्तान की इस हरकत को भारतीय सिक्योरिटी सिस्टम हलके में नहीं ले रहा है.कश्मीर में एक हाई-लेवल मीटिंग के बाद घाटी में काउंटर टेरर ऑपरेशंस बढ़ाने का फैसला ले लिया गया है. आज जम्मू में NSG के ब्लैक कैट कमांडो मैदान में उतर गए हैं और पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप को आतंक से निपटने की ट्रेनिंग दे रहे हैं.
हर बार जम्मू से ही हमला क्यों करता है पाकिस्तान?
जम्मू में सुरक्षा व्यवस्था की तैयारी और तैनाती बढ़ाने की वजह सिर्फ बॉर्डर पर देखे गए पाकिस्तानी ड्रोन ही नहीं है . पाकिस्तान की मिलिट्री बुक में जम्मू हमेशा पहला और बड़ा टारगेट रहा है. पाकिस्तान के जनरल हमेशा जम्मू पर ही पहला हमला क्यों करते हैं. ये समझने के लिए आपको पहले पाकिस्तान की जम्मू डॉक्ट्रिन का इतिहास गौर से देखना और समझना चाहिए.
1947-48 में जब कश्मीर को हथियाने के मकसद से कबाईली हमलावरों ने हमला किया था तो हमले का पहला निशाना जम्मू का पुंछ सेक्टर ही बना था. 1965 के युद्ध में जब पाकिस्तान ने ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम शुरु किया तब भी पहला हमला जम्मू के अखनूर की तरफ किया गया था. इस हमले के जरिए पाकिस्तानी फौज अखनूर के महत्वपूर्ण पुल को कब्जाना चाहती थी. 1971 की जंग में भी पाकिस्तानी फौज ने कश्मीर से पहले जम्मू के छंब सेक्टर पर ही अटैक किया था. यानी हर बार पाकिस्तानी फौज के हमलों का पहला टारगेट जम्मू ही रहा है.
यहां आपको जानना चाहिए कि जम्मू से लगते पाकिस्तानी बॉर्डर का एक बड़ा हिस्सा मैदानी है. जबकि कश्मीर में एलओसी पर ऊंची नीची पहाड़ियां हैं. मैदानी इलाकों से हमला करने से टैंकों और तोप जैसे भारी हथियारों को आगे ले जाने में मदद मिलती है. इसी वजह से पाकिस्तानी फौज पहले जम्मू को ही निशाना बनाती है. अयूब खान से लेकर जिया-उल-हक और अब आसिम मुनीर इसी रणनीति पर चल रहा है लेकिन पाकिस्तान के फरेब को अब भारत पहचान चुका है.
मुनीर का जंगी बुखार बुखार अब उतर जाएगा
इसी वजह से पाकिस्तान के हर बैटल प्लान की काट भारत पहले ही तैयार कर रहा है. मुनीर के जंगी जुनून को खत्म करने के लिए भारत ने एक और बड़ी तैयारी की है जिसका नाम है IBG यानी इंटीग्रेटिड बैटल ग्रुप. अब हम आपको भारत की इस सैन्य शक्ति से जुड़ी जरूरी जानकारी देने जा रहे हैं.
भारत सरकार ने थलसेना के लिए इंटीग्रेडिट बैटल ग्रुप्स बनाने के प्लान पर मुहर लगा दी है. ये नया ग्रुप बनाने के लिए शुरुआत में सेना की माउंटेन स्ट्राइक कोर यानी पहाड़ों पर लड़ने वाली स्पेशल यूनिट से जवान भर्ती किए जाएंगे. दरअसल IBG एक ऐसा सैन्य गुट होगा जिसके पास तोपखाने से लेकर टैंक, एयरक्राफ्ट, सैनिक और ड्रोन सब एक ही कमान के अंतर्गत तैनात किए जाएंगे.
आमतौर पर किसी युद्ध की तैयारी के लिए सेना की एक डिवीजन को 2 दिन का वक्त लगता है लेकिन एक इंटीग्रेटिड बैटल ग्रुप सिर्फ 12 घंटों के अंदर सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार हो जाएगा. यानी बॉर्डर के अलग-अलग हिस्सों पर छोटी छोटी सेनाएं तैनात कर दी जाएंगी जो अपने बलबूते युद्ध के किसी एक मैदान पर चुनौतियों से निपटने में सक्षम होंगी.
IBG भरेगी दुश्मन में खौफ
यहां आपको जानना चाहिए कि थलसेना तकरीबन 3 साल से इंटीग्रेटिड बैटल ग्रुप्स बनाने के लिए तैयारी कर रही थी लेकिन भारत सरकार ने हालिया तनाव को ध्यान में रखते हुए इस प्लान को हरी झंडी दी है. इसकी सिर्फ एक वजह है. पाकिस्तान की साजिशें और पाकिस्तान से आते वो बयान, जो बार-बार संकेत दे रहे हैं कि भारत को उकसाकर पाकिस्तान सीमित स्तर का टकराव शुरु करना चाहता है. अब से कुछ हफ्ते पहले ही कुछ ऐसे ही इशारे पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ के बयान से भी मिले हैं. आप भी सुनिए कि भारत से जंग करने के लिए पाकिस्तान किस तरह बहाने ढूंढ रहा है.
एक पुरानी कहावत है . जितनी कम क्षमता, उतना ज्यादा अहंकार, घमंड और दंभ. ये कहावत आज पाकिस्तानी सरकार और फौज पर सटीक बैठती है. जिस अमेरिका के सहारे आज मुनीर भारत से युद्ध लड़ने के ख्याली पुलाव पका रहा है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद उसी अमेरिका के एक्सपर्टस् ने कहा था कि पाकिस्तानी फौज के लिए हमला करना दूर की बात है. वो अपने मुल्क की रक्षा भी नहीं कर सकती. ये कड़वा सच मुनीर को भी पता है. यहींवजह है कि मुनीर ने एक बार फिर पाकिस्तान की असली फौज यानी आतंकियों को धार देना शुरु कर दिया है. अब हम आपके सामने मुनीर के इसी टेरर प्लान को एक्सपोज करने जा रहे हैं.
फिर आतंकियों के सहारे पाकिस्तान
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तानी फौज ने लश्कर के हेडक्वार्टर यानी मुरीदके के आतंकी मदरसे को दोबारा खड़ा करने का दावा किया था. अब खबरें आ रही हैं कि हाफिज सईद के हेडक्वार्टर के निर्माण का काम तकरीबन पूरा हो गया है और 5 फरवरी यानी अगले महीने इस इमारत में दोबारा आतंकियों की जमात बैठेगी. मुनीर ने अपना वादा पूरा किया है और वो उम्मीद कर रहा है कि हाफिज भी भारत को जख्म देने का अपना वादा निभाएगा.
आजकल पाकिस्तानी फौज और मुनीर की दिमागी स्थिति उस मुकाम पर पहुंच चुकी है. जहां वो पाकिस्तानी सेना से ज्यादा खर्च आतंकी तंजीमों पर कर रहे हैं. अब हम आपको पाकिस्तान में आतंकियों पर हो रही मेहरबानी से जुड़ा एक और बड़ा अपडेट बताने जा रहे हैं. ये खुलासा आपको बताएगा कि ऑपरेशन सिंदूर में मार खाने के बाद पाकिस्तान की टेरर डॉक्ट्रिन भी बदल गई है.
पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क पर भारतीय खुफिया एजेंसियों की लेटेस्ट रिपोर्ट में बताया गया है पाकिस्तानी फौज ने लश्कर-ए-तैयबा और खालिस्तानी आतंकी गुटों को नए संसाधन सप्लाई करने शुरु कर दिए हैं. इन नए संसाधनों में लंबी दूरी के ड्रोन के साथ ही साथ पैरा-ग्लाइर्स शामिल हैं. खैबर पख्तून्ख्वा के कुछ टेरर कैंप्स में आतंकियों को पैरा-ग्लाइडर चलाने की ट्रेनिंग भी दी जा रही है.
हमास वाली साजिश अब नहीं चलेगी!
ये खुलासा बताता है कि अब हाफिज के टेरर सिलेबस यानी दौरा-ए-आम और दौरा-ए-खास में पैराग्लाइडिंग का भी चैप्टर जोड़ दिया गया है. यहां आपको जानना चाहिए कि ये आइडिया भी मेड इन पाकिस्तान नहीं है...बल्कि इसे हजारों मील दूर फिलिस्तीन से चुराया गया है.
आपको याद होगा कि वर्ष 2023 में जब हमास ने इजरायल के म्यूजिक फेस्टिवल पर हमला किया था तो हमास के आतंकी पैरा-ग्लाइडर्स से ही आए थे. चूंकि ये ग्लाइडर बहुत कम ऊंचाई पर उड़ते हैं और इनसे ज्यादा ध्वनि भी नहीं पैदा होती. इसी वजह से इजरायली राडार हमास के इन उड़ते आतंकियों को नहीं पकड़ पाए थे. हमास की इसी टेरर नीति को मुनीर ने अपना लिया है और अब वो लश्कर के आतंकियों को भी हमास जैसी टेरर तकनीक देना चाहता है.
कहते हैं कि मरता क्या ना करता. मुनीर ने ऑपरेशन सिंदूर में भारत से टक्कर लेकर ये समझ लिया है कि सामरिक शक्ति के क्षेत्र में भारत का मुकाबला नामुमकिन है. इसी वजह से वो आतंकियों पर दांव लगा रहा है ताकि पाकिस्तानी अवाम को भारत को जख्म देने की झूठी अफीम चटाई जा सके. हालांकि इसी ऑपरेशन सिंदूर ने भी बता दिया है कि भारत ने अपनी नीतियां बदल दी हैं.
पाकिस्तान की करतूतें उसकी बर्बादी की वजह बनेंगी
अगर हाफिज का हेडक्वार्टर एक बार तबाह किया गया तो दोबारा भी किया जा सकता है .अगर लश्कर के टेरर कैंप एक बार उड़ाए गए हैं तो पैरा-ग्लाइडिंग वाला टेरर सेंटर भी बर्बाद किया जा सकता है. अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करके भारत बार-बार यही संदेश दे रहा है कि पाकिस्तान की करतूतें उसकी बर्बादी की वजह बनेंगी. हमारे इस विश्लेषण को मुनीर भी समझ जाए, यही पाकिस्तान के लिए बेहतर होगा. हो सकता है कि मुनीर को हमारी जुबानी नसीहत समझ नहीं आए.










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