G News 24 : सुबह-सुबह भयंकर भूकंप से कांपी धरती, 6.2 तीव्रता का आया भूकंप !

 लोगों से सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा गया है...

सुबह-सुबह भयंकर भूकंप से कांपी धरती, 6.2 तीव्रता का आया भूकंप !

मंगलवार को जापान के पश्चिमी हिस्से में 6.2 तीव्रता का भूकंप आया. जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) ने बताया कि भूकंप का केंद्र शिमाने प्रांत के पूर्वी क्षेत्र में स्थित था. फिलहाल जान-माल के नुकसान की कोई तत्काल सूचना नहीं मिली है. प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है.

सुनामी का कोई खतरा नहीं

जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने बताया कि भूकंप के तुरंत बाद सुनामी की कोई चेतावनी जारी नहीं की गई. प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और आधिकारिक सूचनाओं पर नजर बनाए रखने की अपील की है.

भूकंप की तीव्रता को लेकर अलग-अलग आकलन

जहां जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने भूकंप की तीव्रता 6.2 बताई है, वहीं अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने इसकी तीव्रता थोड़ी कम, यानी 5.8 दर्ज की है. भूकंप के आंकड़ों को लेकर दोनों एजेंसियों के आकलन में मामूली अंतर देखा गया है.

सैन्य बलों ने शुरू किया हवाई सर्वे

जापान के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि संभावित नुकसान का आकलन करने के लिए सैन्य विमानों के जरिए हवाई निरीक्षण किया जा रहा है. फिलहाल किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है.

यासुगी शहर में तेज झटके महसूस

शिमाने प्रांत के यासुगी शहर में भूकंप के झटके जापान की शिंदो स्केल पर ऊपरी स्तर 5 तक दर्ज किए गए. इस स्तर पर बिना बंधा हुआ फर्नीचर गिर सकता है और वाहन चालकों को गाड़ी नियंत्रित करने में परेशानी हो सकती है. भूकंप के बाद स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां सतर्क हो गई हैं. लोगों से सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा गया है.

31 दिसंबर को आया था भूकंप

31 दिसंबर को भी जापान में तेज भूकंप के झटके महसूस किए गए थे. उस दिन आए भूकंप की तीव्रता 6.0 मापी गई थी. यह भूकंप जापान के पूर्वी नोडा क्षेत्र के तट के पास आया था, जिसका केंद्र जमीन से करीब 19.3 किलोमीटर नीचे स्थित था. लगातार आ रहे इन भूकंपों ने जापान में चिंता बढ़ा दी है. इसकी एक बड़ी वजह यह है कि देश आज भी साल 2011 की भीषण आपदा की यादों से उबर नहीं पाया है. उस समय 9.0 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप आया था, जिसके बाद आई सुनामी ने भारी तबाही मचाई थी. इस आपदा में करीब 18,500 लोगों की मौत हुई थी या वे लापता हो गए थे.

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