आउटसोर्स मैनपावर के परिषद ठहराव रद्द,अब नए सिरे से होगी प्रक्रिया...
कार्यादेश यदि जारी हो जाता, तो निगम को उठाना पड़ता 3.22 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय भार !
ग्वालियर। आउटसोर्स मैनपावर की त्रुटिपूर्ण टेंडर प्रक्रिया को लेकर नगर निगम में लंबे समय से चला आ रहा विवाद शासन के हस्तक्षेप से समाप्त हो गया है। सूत्रों की माने तो 65 करोड़ रुपए के आउटसोर्स मैनपावर टेंडर में सर्विस चार्ज की गलत गणना से नगर निगम को होने वाली संभावित वित्तीय हानि को देखते हुए नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने परिषद द्वारा पारित सभी ठहरावों को रद्द कर दिया है। अब निगम को मैनपावर के लिए नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू करनी होगी।
2025 में शासन ने मांगा था मार्गदर्शन
सूत्रों के अनुसार नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय ने परिषद के निर्णय से निगम को होने वाली 3.22 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आर्थिक मार को देखते हुए पहले ठहराव पर पुनर्विचार प्रस्ताव भेजा था, लेकिन परिषद ने इसे स्वीकार नहीं किया। इसके बाद मार्च 2025 में आयुक्त ने पूरे मामले में शासन से मार्गदर्शन मांगा था। गत 7 जनवरी को नगरीय विकास एवं आवास विभाग के सचिव शीलेंद्र सिंह ने परिषद के ठहरावों को रद्द कर अंतिम निर्णय सुना दिया।
गलत गणना से बिगड़ा पूरा खेल
वर्ष 2024 में ग्वालियरनगर निगम ने आउटसोर्स मैनपावर के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी, जिसमें सर्विस चार्ज पर प्रतिस्पर्धा होनी थी। टेंडर में दो कंपनियों को पात्र पाया गया, लेकिन सर्विस चार्ज की त्रुटिपूर्ण गणना सामने आने पर विधिक अभिमत के आधार पर प्रक्रिया को निरस्त करने का प्रस्ताव मेयर-इन-काउंसिल को भेजा गया था।
निगम को उठाना पड़ता अतिरिक्त वित्तीय भार
एमआइसी ने इस प्रस्ताव अस्वीकार करते हुए मैसर्स बिलीव साल्यूशंस सर्विसेज, सेंगर सिक्योरिटी लेवर सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के ऑफर को स्वीकार कर परिषद को भेज दिया। परिषद ने न केवल इस पर ठहराव पारित किया, बल्कि आयुक्त द्वारा भेजे गए पुनर्विचार प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया। यदि कार्यादेश जारी होता, तो निगम को 3.22 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय भार उठाना पड़ता।










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