ये बात बड़े बड़े वैज्ञानिक ओर अर्नाल्ड डिक्स जैसे लोग भी समझते है ...
जहाँ विज्ञान डगमगाता है, वहीं से आस्था की शुरूआत होती है
जहाँ विज्ञान डगमगाता है। वहीं से आस्था की शुरूआत होती है। विज्ञान और धर्म विपरीत नहीं बल्कि पूरक है। ये बात बड़े बड़े वैज्ञानिक ओर अर्नाल्ड डिक्स जैसे लोग तो समझते है लेकिन भारत मे ही कुछ अध-कचरे वामी नही समझते। विदेशी टनल एक्सपर्ट अर्नाल्ड डिक्स जितने बार भी टनल के अंदर गए और बाहर निकले, उतनी बार पास वापस स्थापित पूजा स्थल के आगे घुटनों पर बैठकर हाथ जोड़े और आंख बंद करके अरदास किया।
इन्हीं अमेरिकी एक्सपर्ट ने आते ही टनल के मुहाने से हटाए गए पूजा स्थल को वापस रखवाया था। कहा था कि हिमालय ने गुस्सा दिखाया है। उन्होंने मजदूरों को बंधक बनाया है। अब हिमालय ही जब चाहेगा, तब उनको छोड़ेगा। हुआ भी ऐसा ही। अमेरिकी मशीन आगर भी पहली बार किसी मिशन पर टूट गया और दरवाजे तक पहुंचकर भी सारे एक्सपर्ट लाचार हो गए थे।
अमेरिकी टनल विशेषज्ञ ने कहा था कि उन्होंने मां काली से एक डील की है। शायद अब वे उस आध्यात्म अनुभव को साझा करेंगे। आज भी अर्नाल्ड उस छोटे से चबूतरे वाले मंदिर के में देवी, भोलेनाथ और बाबा बौखनाथ की पूजा की और बहुत देर तक वहीं बैठे रहे।
सबसे अजूबा तब हुआ, जब इसी पूजा स्थल के पीछे चट्टान पर पानी की धारा निकल गई। और उससे बाबा भोलेनाथ की आकृति सी बन गई। मौसम अचानक साफ हो गया। जबकि बारिश का अनुमान मौसम विभाग ने बता रखा था। उसे देखकर अर्नाल्ड ने कहा कि आज हिमालय और यहां के बाबा भोलेनाथ खुशखबरी देने वाले हैं। एक दूसरे धर्म के प्रख्यात इंजीनियर द्वारा हिंदू धर्म की मान्यताओं को इस स्तर तक समझना और इज्जत देना काफी कुछ कह जाता है।
आप चाहे मोदी के समर्थक हो या मोदी के विरोधी, लेकिन आपको यह स्वीकार करना पड़ेगा, कि इस तरह का बचाव कार्य अभूतपूर्व है। प्रधानमंत्री कार्यालय के पांच लोग 15 दिनों तक दिन रात घटनास्थल पर ही थे वहीं कंटेनर में रहते थे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हर रोज तीन-चार घंटे के लिए मौजूद रहते थे जनरल बीके सिंह नितिन गडकरी और कई अन्य मंत्री वहां अक्सर जाते थे और बचाव कार्य की समीक्षा करते थे।
वायु सेना का विशेष विमान हैदराबाद भेज कर आगर मशीन मंगाई गई स्लोवेनिया से विशेष विमान से दुनिया के सबसे बड़े बचाव विशेषज्ञ को बुलाया गया .. एक खास तरह का प्लाज्मा कटर मनाने के लिए पहले टीम को हैदराबाद भेजा गया फिर विमान को अमेरिका भेजा गया वहां से खास तरह का प्लाज्मा कटर लाया गया।
चार मशीन और रोबोट और ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार स्विट्जरलैंड से विशेष विमान से मंगाए गए। घटनास्थल पर हेलीपैड और एक काम चलाउ रनवे भी बना दिया गया था। दुर्घटना स्थल पर अभिलंब ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट लगा दिया गया। आप दिल पर हाथ रख कर सोचिए कि क्या कभी इतिहास में इस रेस्कयू ऑपरेशन के पहले आपने इतना त्वरित ढंग से और इसकी ऑपरेशन सुना है।










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