अंबेडकर जैसे व्यक्तित्व बार-बार जन्म नहीं लेते : राजेश सोलंकी

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का  पुण्यस्मरण...

अंबेडकर जैसे व्यक्तित्व बार-बार जन्म नहीं लेते : राजेश सोलंकी

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जैसे व्यक्तित्व बार-बार जन्म नहीं लेते वह इतने अद्भुत व्यक्तित्व थे उनकी अध्ययन क्षमता का आकलन हम इसी से कर सकते हैं कि लाइब्रेरी में 35000 पुस्तको का संकलन के साथ नियमित अध्यन करने की दिनचर्या थी।संविधान बनाने का जब उनको दायित्व मिला तो उन्होंने 60 देशों के संविधान का अध्ययन किया और उसमें उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग के हितों की रक्षा कैसे हो सकती है इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को सुरक्षित एवं संरक्षित करने के लिए संविधान में व्यवस्था की। 

समाज के रचनात्मक विकास में महिलाओं की भूमिका को भी उन्होंने रेखांकित किया और उनका मानना था जब तक किसी देश का पूर्ण विकास नहीं हो सकता जब तक उस देश का युवा एवं महिलाए विकास की मुख्यधारा से नहीं जुड़ेगा डॉक्टर अंबेडकर ने कृषि के महत्व को भी महत्वपूर्ण बताया और उन्होंने कहा जब तक गांव का गरीब दलित किसान आर्थिक रूप से समृद्ध नहीं होगा तब तक किसी देश को आत्मनिर्भर नहीं कहा जा सकता उन्होंने संविधान में अधिकार कर्तव्य सारे बिंदुओं को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया। 

वह बहुत विद्वान व्यक्ति थे उन्हें 9 भाषाओं का ज्ञान था और 64 विषयों में उन्होंने स्नातकोत्तर तक शिक्षा ग्रहण की देश के प्रथम कानून एवं न्याय मंत्री बने संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष बने उन्होंने समाज में आव्हान किया था शिक्षित बनो संगठित रहो संघर्ष करो जब हम शिक्षित होकर संगठित रूप से रहते हुए किसी भी क्षेत्र में संघर्ष करते हैं तो निश्चित ही सफलता हमारी कदम चूमती है। उक्त उद्गार समाजसेवी राजेश सोलंकी ने ग्वालियर की तरुणाई संस्था के तत्वाधान में भारत रत्न डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के पुण्यस्मरण मैं हस्सू हद्दू खां सभागार रामा जी का पुरा में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता की आसंदी से व्यक्त किए। 

इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में प्रोफेसर विशाल कदम उपस्थित थे कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री होतम सगर जी ने की मुख्य वक्ता श्री राजेश सोलंकी ने कहा 1990 में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को भारत रत्न दिया गया आज की सरकारें समाज में एवं राष्ट्र निर्माण की दिशा में जो कार्य कर रही हैं वह सब डॉक्टर अंबेडकर ने अपने संविधान में 6 मौलिक अधिकार दिए थे दिए हैं। इस अवसर पर समाज के विभिन्न वर्गों का समाज सेवा का कार्य कर रहे 25विभूतियों का सम्मान किया गया स्वागत भाषण मनीष राजोरिया ने दिया कार्यक्रम का संचालन गब्बर जाटव ने किया।

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