फूलबाग से किला गेट तक ...

सड़क चौड़ीकरण में बाधक निर्माणों की तुड़ाई का हो रहा है विरोध ! 

ग्वालियर l ग्वालियर। फूलबाग से सेवानगर तक बन रही रोड के अतिक्रमण को हटाने के लिए निगम के अमले से शनिवार दोपहर से फिर तुड़ाई शुरू की। जैसे ही निगम के अमले ने मकानों पर अतिक्रमण हटाना शुरू किया। वैसे ही जेसीबी के सामने कांग्रेसी नेता आ गए और विरोध करना शुरू कर दिया। जेसीबी से हो रही भवनों की तोडफ़ोड़ से क्षेत्र में दहशत का माहौल है और लोग अपने अपने घरों को जल्दी से जल्दी तोडऩे में लगे हुए है। निगम ने दूसरे चरण में अतिक्रमण हटाने के लिए किला गेट से लेकर सेवानगर के बीच में 244 संपत्तिमालिकों को नोटिस जारी किए थे। साथ ही अतिक्रमण हटाने के लिए समय सीमा भी दी थी। समय सीमा के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटा तो शनिवार दोपहर को निगम का अमला पुलिस के साथ जेसीबी लेकर अतिक्रमण हटाने के लिए मौके पर पहुंच गया। जैसे ही अमले ने एक दुकान को तोडऩे के लिए जेसीबी चलाई वैसे ही जैसीबी के सामने कांग्रेस नेता आ गए और बैठ गए। ऐसे में जेसीबी को रोकना पड़ा। हालांकि इससे पहले तोडफ़ोड़ का विरोध आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी किया। लेकिन पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया। किलागेट से फूलबाग के बीच बन रही रोड के चौडीकरण में बाधक 70 से 80 साल पुराने करीब 244 मकानों को तोडने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस व नगर निगम ने कार्रवाई शुरू की। प्रशासन की इस कार्रवाई के विरोध में आम आदमी पार्टी, कांग्रेस के नेता व कार्यकर्ता हंगामा करने पर उतर आए। पुलिस ने पहले उनको बातचीत कर हटाने का प्रयास किया, लेकिन जब नहीं माने तो हल्का बल प्रयोग कर करीब एक सैकडा कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी कर उन्हें पुलिस वाहनों में भरकर पुलिस लाइन पहुंचा दिया गया है।

कांग्रेस ने इसे भाजपा शासन का गरीब लोगों के प्रति अन्याय बताया है। विधायक सतीश सिकरवार का कहना है कि जब लोग स्वेच्छा से मकान तोड रहे हैं तो जेसीबी चलाकर उनका नुकसान क्यों किया जा रहा है। दोपहर बाद भी प्रशासन की कार्रवाई जारी थी। काफी तादाद में पुलिस बल मौजूद रहा है। किलागेट से सेवा नगर पुलिया तक रोड के दोनों ओर की संपत्तियों पर निशान लगने के बाद लोगों ने न सिर्फ सामान समेटने का काम शुरू किया बल्कि अपने निर्माण के चिह्नित क्षेत्र की तुडाई भी खुद शुरू करा दी है। उधर, सराफ बाजार के निवासियों ने भी अपनी संपत्तियों को तोडना शुरू कर दिया है। लोगों द्वारा खुद ही हटाए जा रहे निर्माण को देखते हुए नगर निगम ने कार्रवाई को समय दे दिया है। किलागेट चौराहे पर 17 संपत्तियां तोडने के बाद नगर निगम ने किलागेट से सेवा नगर पुलिया तक रोड के दोनों ओर की 244 संपत्तियों पर कार्रवाई के लिए छह घंटे के नोटिस चस्पा किए थे।

नोटिस के अनुसार रोड की चौडाई 18 मीटर प्रस्तावित थी, लेकिन बाद में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के हस्तक्षेप के बाद रोड की चौडाई घटाकर 12 मीटर कर दी गई। इससे प्रभावित संपत्तियों की संख्या कम हो गई। इसके बाद लोगों ने खुद ही अपने निर्माण का चिह्नित भाग तोडना शुरू कर दिया। हालांकि तमाम लोग अब भी इस इंतजार में हैं कि शायद किसी राजनीतिक हस्तक्षेप से तुडाई रुक जाए। स्थानीय नागरिक रविन्द्र कुमार का कहना है कि 70 से 80 साल से यहां रह रहे हैं। जायज मकान है। इसके बाद भी प्रशासन ने लाल निशान लगा दिया। यह पहली बार नहीं है छटवीं बार निशान लगाया है। सडक चौडी करने के चक्कर में कई लोगों को पूरे के पूरे मकान ही जा रहे हैं। ऐसे सौंद्रीयकरण का क्या फायदा। एडवोकेट उमेश गुप्ता का मकान तीन दिन पहले किलागेट पर तोडा गया था। उनका कहना है कि एक इंच भी मकान गैर कानूनी नहीं था। 12 फीट का नोटिस दिया और 20 फीट तोड दिया। मुआवजा तो दूर की बात 6 घंटे का नोटिस देकर पूरी कार्रवाई की गई है। हमें हमारे घरों से ऐसे निकाला गया है जैसे कोई आतंकवादी हो। जब टूट गया तो भाजपा-कांग्रेस व आप वाले आ रहे हैं। सब अपनी राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं।

किला गेट से लेकर सेवानगर रोड पर निगम की कार्रवाई के विरोध में लोगों ने अपनी दुकानों व प्रतिष्ठानों को बंद कर दिया है। तकरीबन पूरा बाजार ही बंद था और किसी तरह का कारोबार नहीं हो रहा था। किला गेट के पास एक भाजपा कार्यकर्ता की दुकान है। इस दुकान का शुभारंभ केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर ने फीता काटकर किया था। लेकिन अतिक्रमण में होने की वजह से निगम की जेसीबी इसे भी तोडऩे के लिए पहुंच गईं। जेसीबी पहुंचने के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया। जो लोग अपने मकानों को तोड़ नहीं रहे थे। वे भी जल्दी जल्दी स्वयं ही मकानों को तोडऩे लगे। इसकी वजह यह है कि जेसीबी से तुड़ाई होने पर पूरा मकान ही खराब हो जाता है। ऐसे में लोग मजदूरों से अपने मकानों को जल्द से जल्द तुड़ाने में लगे हुए है।

महापौर डॉ.शोभा सिकरवार के गत दिवस किलागेट से सेवानगर तक लोगों से चर्चा के बाद उन्हें यह उम्मीद बंधी थी कि अब कार्रवाई रुक सकती है, इस कारण जो लोग खुद ही तोड़-फोड में लगे थे उन्होंने भी तुड़ाई बंद कर दी। वहीं कांग्रेस के प्रदेश महासचिव सुनील शर्मा द्वारा इस मुद्दे को लेकर लगातार किए जा रहे आंदोलन को देखते हुए भी लोग मान रहे थे कि प्रशासन उन्हें राहत देगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। महापौर के यहां से जाते ही आस-पास मौजूद निगम अधिकारी फिर उन लोगों के पास पहुंचे जिन्हें नोटिस दिए गए थे। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने भी यहां हुई कार्रवाई के बाद लोगों के बीच पहुंचकर उनकी बात सुनी थी, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि कार्रवाई तो होना है। हम आने वाली पीढ़ी के भविष्य को देख रहे हैं। इसलिए सभी को इसके लिए रास्ता निकालना चाहिए। वे प्रशासन के साथ बातचीत के लिए तैयार है।

फिलहाल प्रशासन ने दो दिन के लिए तोड़फोड़ की कार्यवाही स्थगित करतेहुए उस पर दो दिन के रोक  लगा दी है l