एक समय में ब्रिटिश शासन का सूरज कभी डूबता ही नहीं था लेकिन अब ...

100 सालों में 70 देशों से 14 आइलैंड में सिमटा साम्राज्य


ब्रिटेन का साम्राज्य भारत, ऑस्ट्रेलिया ही नहीं बल्कि सुपर पावर अमेरिका, कनाडा और अफ्रीका तक फैला हुआ था। प्रथम विश्व युद्ध से पहले ब्रिटेन से बड़ी महाशक्ति पूरी दुनिया में कोई और नहीं थी। एक  समय ब्रिटिश एम्पायर पूरी दुनिया की जमीन के एक चौथाई हिस्से पर राज कर रहा था। क्या आपको पता है कि अफ्रीका से खरीदे गए कुल 12 मिलियन गुलामओं में से 30 लाख केवल और केवल ब्रिटिश स्लेव टेडर्स द्वारा खरीदे गए थे। जिनमें से 2.7 मिलियन ही लंबी यात्राओं में जिंदा बच पाए थे। एक समय ऐसा भी कहा जाता था कि आदमी को औरत और औरत को आदमी बनाने के अलावा इंग्लैंड सबकुछ बना सकता है। लेकिन कैसे ब्रिटिश एम्पायर इतनी बड़ी शक्ति बन गया जिसके बारे में कहा जाता था कि उसके सम्राज्य का सूरज कभी डूबता ही नहीं था। फिर क्यों देखते ही देखते ये 100 सालों में 70 देशों पर राज करने वाला ब्रिटेन 14 आइलैंड में सिमट कर रह गया। आइए आपको ब्रिटिश सम्राज्य के उदय से पतन तक की पूरी कहानी सुनाते हैं।

ब्रिटेन की महारानी एलिजावेथ द्वितीय के निधन के बाद अब उनके बेटे चार्ल्स ब्रिटेन के राजा बन गए हैं। इसी के साथ ब्रिटेन में 70 वर्षों बाद 'किंग युग' शुरू हो गया है। अब उन्हें किंग चार्ल्स तृतीय के रूप में जाना जाएगा। नए सम्राट ने राजगद्दी संभालते ही पहला फैसला यही लिया है। वह चार्ल्स, फिलिप, ऑर्थर और जॉर्ज में से कोई भी एक नाम चुन सकते थे। किंग के रूप में देश को संबोधित करते हुए चार्ल्स तृतीय ने अपनी मां को याद करते हुए कहा कि महारानी और मेरी प्यारी मां हम सभी के लिए उदाहरण थीं। उनका इस प्यार के लिए धन्यवाद। प्रिंस विलियम्स अब राजगी के उत्तराधिकारी हैं। उन्हें तुरंत अपने पिता का खिताव ड्यूक ऑफ कॉर्नवॉल मिल जाएगा। उनकी पत्नी कैथरीन डचेज ऑफ कॉर्नवॉल के रूप में जाना जाएगा।

एक समय ऐसा था जब कहते थे कि ब्रिटेन में कभी सूर्य अस्त नहीं होता। ये बात सच भी थी। लेकिन इसका ये मतलब कतई नहीं था कि ब्रिटेन के पास कोई और सूर्य था और पूरी दुनिया के पास दूसरा। इसका मतलब था कि ब्रिटेन का पूरा सम्राज्य पूरी दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक फैला हुआ था। जब ब्रिटेन में सूर्य अस्त होता तो इसकी भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसी दूसरी कॉलोनी में सूर्य उदय होता था। इसलिए कहा जाता था कि ब्रिटेन का सूर्य कभी अस्त होता ही नहीं है। ब्रिटेन का साम्राज्य भारत, ऑस्ट्रेलिया ही नहीं बल्कि सुपर पावर अमेरिका, कनाडा और अफ्रीका तक फैला हुआ था। प्रथम विश्व युद्ध से पहले ब्रिटेन से बड़ी महाशक्ति पूरी दुनिया में कोई और नहीं थी। जैसे आज के दौर में हम अधिकतर प्रोडक्ट को मेड इन चाइना ही देखते हैं। उसी तरह उस दौर में दुनिया का हर मशीन मेड प्रोडक्ट मेड इन इंग्लैंड होता था। 


यूरोप में आधुनिक युग की शुरुआत 1453 से मानी जाती है। जब ऑटोमन एम्पायर के नए सुल्तान मोहम्मद महबत ने कुस्तुन्तुनिया पर कब्जा किया था। यह एक अति महत्वपूर्ण घटना थी। इस घटना के फलस्वरूप रोमन साम्राज्य का अन्त हो गया जो लगभग 1500 वर्षों से चला आ रहा था। ये घटना इतनी महत्वपूर्ण थी कि जिस रास्ते से यूरोप और एशिया के बीच व्यापार होता था। अब उस रास्ते पर तुर्को का अधिकार हो गया था। यहीं से मॉर्डन हिस्ट्री यानी आधुनिक युग की शुरुआत होती है। यूरोप के नए आधुनिक युग की भी और समुद्री मार्गों को खोजने की भी शुरुआत यहीं से होती है। ट्यूडर काल को इंग्लैड का सबसे शानदार युग माना जाता है। इस युग में हेनरी सप्तम, हेनरी अष्टम, एडवर्ड षष्ठम, मेरी और एलिजाबेथ का नाम सबसे ऊपर आता है। ब्रिटिश साम्राज्य दुनिया के इतिहास में सबसे बड़ा साम्राज्य रहा है। 16वीं सदी के बाद ब्रिटेन ने अपने देश के बाहर दुनिया में अपने पैर पसारने शुरू किए। 16वीं से 18वीं सदी के दौरान ब्रिटेन ने यूरोपीय ताकतों जैसे फ्रांस, स्पेन और पुर्तगाल को पछाड़ते हुए दुनिया के सबसे ताकतवर साम्राज्य की नींव रखी।  

19वीं और 20 सदी में ब्रिटिश साम्राज्य दुनिया का सबसे बड़ा साम्राज्य बन गया। इस दौरान ब्रिटेन ने दुनिया के करीब 80 देशों और आइलैंड पर शासन किया। 1913-1922 के दौरान ब्रिटिश साम्राज्य का कब्जा दुनिया की करीब 25 % या फिर कहे 45 करोड़ की आबादी पर था। ब्रिटिश साम्राज्य की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उस वक्त 3.5 करोड़ वर्ग किलोमीटर यानी दुनिया के करीब 26% इसके अधीन थे। 

महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने जब 1950 के दशक की शुरुआत में राजशाही की बागडोर संभाली थी तब द्वितीय विश्व युद्ध को समाप्त हुए सात साल ही हुए थे। पुनर्निर्माण के प्रयास चल रहे थे। उस दौर में महारानी के पदासीन होने के साथ ‘नये एलिजाबेथ युग’ की शुरुआत मानी गयी। समाज बदल रहा था और एक युवा, सुंदर महारानी ने राजशाही को संभाला था। एलिजाबेथ द्वितीय ने पिछले कुछ दशकों के इतिहास में संभवत: सबसे अधिक तेजी से होने वाले प्रौद्योगिकी विस्तार तथा सामाजिक-राजनीतिक बदलाव के दौर में गद्दी संभाली। यदि एलिजाबेथ प्रथम का कार्यकाल औपनिवेशिक विस्तार, विजय और प्रभुत्व का दौर था तो ‘नया एलिजाबेथ युग’ उपनिवेश खत्म होने और साम्राज्य के कमजोर होने से जुड़ा था। जब एलिजाबेथ द्वितीय राजगद्दी पर बैठी थीं तो ब्रिटिश साम्राज्य के अंतिम चिह्न बचे थे। महारानी ऐसे समय में पदासीन हुई थीं जब प्रजातांत्रिक राजनीतिक परिवर्तन का दौर था। लेबर पार्टी के नेता क्लीमेंट एटली 1945 में चुनाव में जबरदस्त तरीके से जीते थे l जिससे मतदाताओं की बदलाव की इच्छा सामने आई। विंस्टन चर्चिल की कंजरवेटिव पार्टी ने 1952 में सत्ता संभाली। ऐसा माना जाता है कि 1997 में हॉन्ग कॉन्ग को चीन को सौंपने के साथ ही ब्रिटिश साम्राज्य का अंत हो गया। फिलहाल ब्रिटिश साम्राज्य दुनिया के 14 आइलैंड तक ही सिमटकर रह गया है। इनमें से ज्यादातर आइलैंड वीरान हैं और इनकी कुल आबादी महज 2.72 लाख वर्ग किलोमीटर है।

-रवि यादव