सावन-भादौ में महाकाल की अंतिम शाही सवारी…

6 स्वरूपों में नगर भ्रमण पर निकले महाकाल

महाकाल की सावन-भादौ की आखिरी सवारी आज शाम 4 बजे से निकाली जा रही है। महाकाल 6 स्वरूपों में नगर भ्रमण पर निकले हैं। शिप्रा घाट पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके बेटे महाआर्यमन सिंधिया ने महाकाल के दर्शन और पूजन किया। दोनों दत्त अखाड़े से बोट में बैठकर नदी पार कर भगवान महाकाल की सवारी में शामिल हुए। सिंधिया ने कहा, महाकाल की कृपा देश पर बनी रहे। हमारा देश उन्नति के शिखर पर पहुंचे। उन्होंने उज्जैन में 4 स्कूली बच्चों की हादसे में मौत पर भी दुख जताया। महाकाल की शाही सवारी राजसी ठाठ-बाठ और वैभव के अनुरूप निकल रही है। देशभर से भक्त रविवार को ही उज्जैन पहुंच चुके थे। सवारी में हाथी, घोड़े, पालकी, भजन मंडली और झांकियां शामिल हैं। 5 बैंड- गणेश बैंड, भारत बैंड, रमेश बैंड, आरके बैंड और राजकमल म्यूजिकल बैंड शामिल हुए हैं। शाही सवारी का रूट 7 किलोमीटर लंबा है। सवारी 6 घंटे नगर में भ्रमण करने के बाद रात 10 बजे मंदिर के अंदर पहुंचेगी। 

रजत जड़ित पालकी में भगवान श्री महाकाल श्री चंद्रमौलीश्वर स्वरूप में विराजित हैं। हाथी पर श्री मनमहेश, गरुड़ रथ पर श्री शिव तांडव प्रतिमा, नंदी रथ पर श्री उमा महेश के मुखारविंद, डोल रथ पर श्री होलकर स्टेट का मुखारविंद और बैलगाड़ी में डोल रथ पर श्री सप्तधान मुखारविंद विराजित हैं।SP सत्येंद्र कुमार शुक्ल के अनुसार, शाही सवारी के लिए जिले के अलावा अन्य जिलों से करीब 1500 पुलिस अधिकारी और कर्मी व्यवस्था में लगाए गए हैं। सवारी मार्ग पर CCTV कैमरों से नजर रखी जा रही है। जगह-जगह बैरिकेड्स भी लगाए गए हैं। बता दें, सावन-भादौ की ये 7वीं सवारी है। सावन में 5 सवारी और भादौ की 1 सवारी इससे पहले निकल चुकी हैं।बाबा महाकाल की शाही सवारी के दौरान बांटने के लिए मां छत्रेश्वरी चामुंडा माता मंदिर भक्त समिति ने 30 क्विंटल खिचड़ी बनाई है। 

इसी के साथ यह रिकॉर्ड गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड में दर्ज हो गया है। चामुंडा माता मंदिर के पं. सुनील चौबे ने बताया कि 5 घंटे में 50 कर्मचारियों ने साबुदाने की खिचड़ी तैयार की है।भारत बैंड के फिरोज बताते हैं कि वे चार पीढ़ियों से भगवान महाकाल की सवारी में बैंड बजाते आ रहे हैं। एक बार में एक से डेढ़ रुपए खर्च आता है, लेकिन हम इसका चार्ज नहीं लेते। हां, मंदिर समिति प्रसाद स्वरूप जो भी राशि दे देती है, उसे स्वीकार कर लेते हैं। सवारी में भजन के लिए एक हफ्ते पहले से प्रैक्टिस शुरू कर देते हैं। एक बैंड के साथ 40 लोग शामिल होते हैं। इनके खाने-पीने का इंतजाम वे खुद करते हैं। फिरोज के मुताबिक, हम चार पीढ़ियों से सवारी में शामिल हो रहे हैं। कर्भी धर्म आड़े नहीं आया, न ही हमें किसी ने रोकने की कोशिश की।  गणेश बैंड में भी मुस्लिम समाज के लोग शाही सवारी में शामिल होते हैं। 30 साल से सवारी में शामिल होते आ रहे गणेश बैंड के प्रमुख विजय सरगरा बताते हैं कि उनके बैंड के लिए 100 लोग 4 दिन से प्रैक्टिस कर रहे हैं। 

उनके खाने-पीने और मेहनताना वे ही देते हैं। 5 मुस्लिम कलाकार भी हमारे बैंड का हिस्सा हैं। फिरोज, सलीम, अफजल आरिफ, मुश्ताक और मुमताज बाबा की सेवा में हर साल शामिल होते हैं। भजन फिरोज भाई गाते हैं। 4 लाख से अधिक का खर्च होता है। हर बार नई ड्रेस, गाड़ी की सजावट और लाइटिंग करना होती है। शाम 4 बजे से शुरू होकर शाही सवारी गुदरी चौराहा, कहारवाड़ी, हरसिद्धि पाल से रामघाट पहुंचेगी। रामघाट पर पूजन-अर्चन के बाद शाही सवारी रामानुजकोट, मुंबई वालों की धर्मशाला, गणगौर दरवाजा, खाती समाज का जगदीश मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, कमरी मार्ग, टंकी चौराहा, तेलीवाड़ा, कंठाल, सतीमाता मंदिर, छत्री चौक होते हुए गोपाल मंदिर पर पहुंचेगी। यहां सिंधिया स्टेट द्वारा परंपरानुसार पालकी में विराजित भगवान श्री चंद्रमौलेश्वर का पूजन किया जाएगा। उसके बाद सवारी पटनी बाजार, गुदरी चौराहा, कोट मोहल्ला, महाकाल चौराहा होते हुए मंदिर परिसर पहुंचेगी।