मां लक्ष्‍मी भी होंगी प्रसन्‍न !

लड्डू गोपाल की पूजा में  सफेद मिठाइयों का लगाएं भोग 

19 अगस्‍त, शुक्रवार को जन्‍माष्‍टमी मनाई जा रही है. जन्‍माष्‍टमी के शुक्रवार के दिन पड़ने से यह दिन मां लक्ष्‍मी को प्रसन्‍न करने के लिए भी खास हो गया है. वैसे भी भगवान कृष्‍ण और मां लक्ष्‍मी का संबंध बेहद अहम है. भगवान श्रीकृष्‍ण, विष्‍णु जी का ही अवतार हैं और वे मां लक्ष्‍मी के पति हैं. इसलिए जन्‍माष्‍टमी के दिन भगवान श्रीकृष्‍ण के साथ-साथ भगवान विष्‍णु और माता लक्ष्‍मी की भी पूजा करने से खूब धन-समृद्धि मिलती है. इसके साथ कुछ अन्‍य नियमों का भी पालन करें. 

 जन्माष्टमी के दिन लड्डू गोपाल के साथ-साथ श्री हरि विष्णु और लक्ष्‍मी जी की पूजा जरूर करें. धन की देवी लक्ष्‍मी का आशीर्वाद पाने के लिए जन्‍माष्‍टमी, शुक्रवार की शाम को अपने घर के मुख्‍य द्वार को कमल के फूलों से सजाएं. ऐसा करने से माता लक्ष्‍मी आपके घर में निवास करेंगी. जन्‍माष्‍टमी के दिन भगवान श्रीकृष्‍ण और माता लक्ष्‍मी को सफेद मिठाइयों का भोग लगाएं. कन्‍याओं-बच्‍चों को पंचामृत और सफेद मिठाई बांटें. 

जन्‍माष्‍टमी के भोग में तुलसी दल जरूर डालें. ऐसा करने से श्रीकृष्‍ण जी और मां लक्ष्‍मी दोनों प्रसन्‍न होते हैं. तुलसी जी मां लक्ष्‍मी का ही रूप हैं. जिस घर में तुलसी जी की पूजा होती है वहां मां लक्ष्‍मी हमेशा निवास करती हैं. लड्डू गोपाल की पूजा के बाद उन्‍हें झूला जरूर झुलाएं. ऐसा करने से घर में हमेशा सुख-शांति रहती है. मां लक्ष्‍मी हमेशा कृपा करती हैं. 

जन्‍माष्‍टमी के दिन व्रत में केवल फलाहार ग्रहण करें लेकिन इस दिन खीरा नहीं काटें. कान्‍हा जी के जन्‍म के बाद ही खीरा काटें क्‍योंकि खीरे को बच्‍चे की नाल समझकर कान्‍हा के जन्‍म के समय काटा जाता है इसलिए उससे पहले खीरा काटना अच्‍छा नहीं माना जाता है. जन्‍माष्‍टमी व्रत रखने वाले लोग इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें. जन्‍माष्‍टमी के दिन तुलसी जी की भी विधि-विधान से पूजा करें. इससे मां लक्ष्‍मी प्रसन्‍न होंगी.