श्री सक्सेना ने अंतरविभागीय समन्वय समिति की बैठक में दिए निर्देश…

शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति पर सतत रखें निगरानी : संभागायुक्त

ग्वालियर। पंचायत निर्वाचन एवं नगरीय निकायों के निर्वाचन की सभी तैयारियां समय रहते पूरी की जाएं। निर्वाचन के संबंध में राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों का अक्षरश: पालन हो, यह भी सुनिश्चित किया जाए। संभागीय आयुक्त आशीष सक्सेना ने बुधवार को संभागीय अंतरविभागीय समन्वय समिति की बैठक में निर्वाचन एवं अन्य योजनाओं की समीक्षा बैठक में यह बात कही। संभागीय आयुक्त कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में संभागीय आयुक्त आशीष सक्सेना ने कहा है कि गर्मी के मौसम को देखते हुए शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति पर सतत निगरानी रखी जाए। 

निर्वाचन की आचार संहिता लागू होने के पश्चात भी पेयजल वितरण व्यवस्था में कोई परेशानी नहीं आना चाहिए। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति की सतत निगरानी की जाए। संभागीय आयुक्त श्री सक्सेना ने अमृत सरोवरों (तालाबों) के निर्माण की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने कहा कि ग्वालियर-चंबल संभाग के सभी जिलों में स्वीकृत तालाबों के निर्माण का कार्य निर्धारित समयावधि में पूर्ण हो, यह सुनिश्चित किया जाए। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए हैं कि विभाग के सब इंजीनियरों को तालाबों के निर्माण की मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी सौंपी जाए। सीएम हैल्पलाइन की समीक्षा के दौरान संभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि प्रत्येक सोमवार को दोनों संभाग के प्रत्येक जिलों की सबसे पुरानी शिकायतों के निराकरण की पहल करें। 

शिकायत करने वाले व्यक्ति को भी व्यक्तिगत रूप से बुलाकर उनकी समस्या का निराकरण सुनिश्चित किया जाए। सीएम हैल्पलाइन के प्रकरणों को अधिकारी पूर्ण गंभीरता से लें। संभाग आयुक्त श्री सक्सेना ने कहा कि समय रहते बाढ़ नियंत्रण की सभी तैयारियाँ ग्वालियर-चंबल संभाग के सभी जिलों में सुनिश्चित कर ली जाए। बरसात के पूर्व जलाशयों में एकत्र जल की मात्रा एवं बरसात के दौरान आने वाले संभावित जल को देखते हुए जल संसाधन विभाग आवश्यक कार्रवाई करें। बैठक में अंकुर अभियान की भी समीक्षा की गई। सभी अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि अपने-अपने विभाग में अधिक से अधिक वृक्षारोपण की तैयारी करें। प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर भी कम से कम 75 पौधे रोपने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।