नवाचार के तौर पर उगाया, मिले दो लाख रूपये…

काला धान उगाने से बदली पिंदर सिंह की तकदीर

 

मुरैना। मुरैना विकासखण्ड के ग्राम रिठौराकलां के कृषक पिंदर पुत्र बंता सिंह ने चार बिस्वा जमीन में काला धान उगाकर पैसा ही नहीं, बल्कि अच्छी खासी आय प्राप्त होने से उसकी तकदीर बदल गई है। पिंदर सिंह ने अपने शब्दों में बताया कि मैं परम्परागत खेती को अपनाता था। सफेद चावल (काली मूंछ) प्रतिवर्ष उगाया करता था। किन्तु पिछले वर्ष कृषि अधिकारियों, कर्मचारियों ने ग्राम रिठौराकलां में कैम्प लगाकर कृषि से उन्नत फसल अपनाने के लिये अलग-अलग नुस्खे बताये।

कैम्प में उन्होंने एक नुस्खा काला धान उगाने की बात मुझे समझाई। उन्होंने बताया कि काला धान की पैदावार बहुत कम जगह में अधिक मात्रा में होती है, इस फसल को उगाने से लोगों की आय में वृद्धि होती है, जिससे कुछ तकदीर और तस्वीर दोंनो ही बदल सकती है। पिंदर सिंह ने बताया कि कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में मैंने अपने खेत चार बिस्वा में 10 किलो काला धान उगाने का निर्णय लिया। उनके द्वारा बताये गये अनुसार मैं पंजाव से काला धान का बीज क्रय करके लाया।

बीज को उपचारित करके पौध तैयार की गई और कुछ समय बाद पौध को रोपा गया, पौध में रासायनिक खादों के अलावा गोबर खाद का उपयोग किया। कुछ समय के बाद धान में अच्छी बालियां आने लगी, धान पकने के बाद थ्रेसिंग की गई। जिसमें 16 क्विंटल धान पैदा हुई। मेरे द्वारा धान को शिवपुरी के व्यापारी को ढ़ाई लाख रूपये में बेचा गया। जिसमें मुझे लगभग खाद, बीज, पानी का खर्चा काटकर शुद्ध दो लाख रूपये की आय प्राप्त हुई। जिससे मेरी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ, अब खेती घाटे का सौदा नहीं, बल्कि फायदे का सौदा बनी है।