दिग्गी के करीबी मूलसिंह के बेटे को BJP में शामिल कराने की तैयारी…

शनिवार को 'राजा' के गढ़ में कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचेंगे 'महाराज'

बीजेपी और कांग्रेस के लिए शनिवार का दिन बड़ा हो सकता है। इस दिन बीजेपी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पूर्व CM दिग्विजय सिंह के गढ़ और गृह नगर में बड़े कार्यक्रम में शामिल होने पहुंच रहे हैं। इस दौरान महाराज (सिंधिया) 'राजा' (दिग्विजय सिंह) को बड़ा झटका दे सकते हैं। पता चला है कि दिग्गी के करीबी और राघोगढ़ सीट से दो बार विधायक रहे मूलसिंह दादाभाई के पुत्र हीरेन्द्र सिंह (बंटी बना) को BJP में शामिल करा सकते हैं। वे कांग्रेस का दामन छोड़कर कई समर्थकों के साथ सिंधिया की मौजूदगी में BJP की सदस्यता ले सकते हैं। सिंधिया के करीबी एक नेता ने दावा किया है कि हीरेंद्र सिंह लंबे समय से सिंधिया के संपर्क में हैं। ऐसे में उनके बीजेपी में आने की अब तक केवल अटकलें ही लगती रहीं, लेकिन राघोगढ़ के आईटीआई ग्राउंड में सिंधिया का कार्यक्रम होना है। 

वहां गुरुवार को कलेक्टर और SP राघोगढ़ तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे। उनके साथ हीरेंद्र भी मौजूद थे। उन्होंने भी प्रशासन के साथ वहां की व्यवस्थाएं देखीं। बता दें कि अभी तक कभी भी सिंधिया ने दिग्विजय के इलाके में सार्वजनिक कार्यक्रम या सभा नहीं की। 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले केवल एक बार (16 मई 2018) जयवर्धन सिंह के बुलावे पर वे राघोगढ़ किले पर भोजन करने पहुंचे थे। उस समय सभा आयोजित नहीं की गई थी। मार्च 2020 में BJP का दामन थामने के बाद भी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अभी तक दिग्विजय सिंह के इलाके में कार्यक्रम नहीं किया था। भाषणों में भी सिंधिया दिग्विजय सिंह पर खुलकर कुछ नहीं बोले हैं। 

2020 के उपचुनावों में भी सिंधिया ने कमलनाथ पर ही ज्यादा शब्दबाण चलाए थे। हालांकि, दिग्विजय सिंह और उनके पुत्र जयवर्धन सिंह लगातार सिंधिया पर हमला करते रहे हैं। सिंधिया समर्थक और पंचायत मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया जरूर कुछ महीनों पहले राघोगढ़ पहुंचे थे। वहां कई कार्यक्रमों में भाग लिया था। वे भी लगातार दिग्गी परिवार पर मुखर होते रहे हैं। अभी तक दो ही ऐसे मौके आए हैं, जब राघोगढ़ विधानसभा में सिंधिया और जयवर्धन सिंह साथ किसी कार्यक्रम में रहे हैं। पहला मौका था, जब आरोन में आयोजित दौड़ में सिंधिया और जयवर्धन सिंह साथ दौड़े थे। उस समय सिंधिया कांग्रेस में थे। विधानसभा चुनावों की चुनाव प्रचार समिति के प्रमुख थे। 

दूसरा मौका तब आया, जब विधानसभा चुनावों के दौरान वर्ष 2018 में जयवर्धन सिंह के बुलावे पर सिंधिया राघोगढ़ किले पर लंच करने पहुंचे थे। उस समय दोनों ने एकजुटता दिखाने के प्रयास किए थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया के BJP में जाने के बाद से ही यह चर्चा थी कि अब गुना जिले के 'चौपेट के इस पार सिंधिया और उस पार दिग्विजय' के मुहावरे पर कब विराम लग सकता है। अब लगभग डेढ़ साल बाद BJP बड़ी सेंध लगाने में कामयाब हुई है। माना जा रहा है कि जिस तरह उपचुनावों में दिग्विजय सिंह, उनके भाई लक्ष्मण सिंह और राघोगढ़ विधायक जयवर्धन सिंह चौपेट नदी की सीमा लांघकर सिंधिया के इलाके में चुनाव प्रचार करने आए थे, अब सिंधिया भी चौपेट नदी की सीमा लांघकर राघोगढ़ में दम दिखाएंगे।