राष्ट्रीय जल सम्मेलन के समापन पर जल जन घोषणापत्र 2021 जारी...

 मध्यप्रदेश में सामुदायिक जलाधिकार कानून बने- राजेन्द्र सिंह

ग्वालियर- 12 दिसम्बर 2021- आई. आई. टी. टी. एम. सभागार में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय जल सम्मेलन के समापन अवसर पर जल सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ग्वालियर जल जन घोषणापत्र 2021 जारी किया और सरकार से मांग की कि नदियों की अविरलता सुनिश्चित करने के लिए कानून बनाए जायें। सम्मेलन के समापन अवसर पर जारी ग्वालियर जल जन घोषणापत्र 2021 में, सभी राज्यों में जल साक्षरता की पहल करने के लिए केन्द्र और राज्य सरकारों से मांग की गई है कि नदी और जल स्त्रोंतों की पहचान, सीमांकन और अधिसूचना सुनिश्चित करके अतिक्रमण की रोकथाम के लिए तत्काल हस्तक्षेप करें। 

सम्मेलन के तीन दिवसों के निष्कर्षों में निकल कर आया कि केवल बजट आवंटन से जल संकट का समाधान नहीं हो सकता, इसके लिए जल संरक्षण में जन भागेदारी बढाने की आवश्यकता है। देश भर के कृषि विश्वविद्यालयों एवं शोध केन्द्रों में कम पानी और न्यूनतम लागत की पद्धतियों को बढाने के लिए सरकार को विशेष पहल करने की आवश्यकता है। जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव को रोकने के लिए व्यवहार परिवर्तन करना आवश्यक है, जिसके लिए समाज को जागरुक करना जरुरी है। पानी, किसानी, जवानी के मूल्यों के माध्यम से जल संरक्षण को बढावा देने की आवश्यकता है।

 सरकार रुफ वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य करे। छोटी नदियांे को पुर्नजीवित करने के लिए उनके बेसिन में चोटी से घाटी के सिद्धान्त के आधार पर कार्य किया जाये, जल जन जोडो अभियान के जल सहेली मॉडल को पूरे देश में लागू किया जाये। नई शिक्षा नीति में जल साक्षरता को बढावा दिया जाये। जल जीवन मिशन के स्थायित्व के लिए तात्कालिक रुप से सरकार को भूजल भरण हेतु अटल भूजल जैसी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता है। मध्य प्रदेश में सामुदायिक जल अधिकार कानून बने, मध्य प्रदेश में शिक्षा विभाग में जल साक्षरता हेतु जल शिक्षण पाठयक्रम आरम्भ होना चाहिए। मध्य प्रदेश के सभी कृषि विश्वविद्यालयों में जल शिक्षण का विधिवत पाठयक्रम आरम्भ किया जाये। 

मध्य प्रदेश की खेती और जल का संरक्षण और किसान के कल्याणकारी कार्यो को प्राथमिकता देकर भू-सांस्कृतिक खेती और मौसमी कृषि परिस्थितिकी विविधता का सम्मान करके, यहां के सांस्कृतिक कृषि परिस्थितिकी विविधता का सम्मान करके, जल प्रबंधन करने की जरूरत है। मध्य प्रदेश के सभी भू-सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय क्षेत्रों में जल संरक्षण एवं प्रबंधन को बढावा देने के लिए सामुदायिक प्रयास सुनिश्चित किया जाये, ग्वालियर चंबल संभाग में नदी यात्राओं का आयोजन किया जाये ताकि नदी से समाज को जोडने के लिए प्रयास हो सके। ‘आओ नदी को जाने’ प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से युवा पीढी को विशेष तौर से जोडने के लिए प्रयास किए जायें तथा नदी के किनारे के समाज को जोडकर नदी घाटी संगठनों का निर्माण किया जाये। 

कार्यक्रम में तेलंगाना जल बोर्ड के अध्यक्ष कैबिनेट मंत्री प्रकाश राव, प्रो. विनोद बोदनकर, उड़ीसा की बितान्ती जेना, भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के निदेशक गिर्राज गोयल, निकेत लोहिया, प्रो. जयन्त सिंह तोमर, रामधीरज सिंह, डॉ मुहम्मद नईम, डॉ. संजय गुप्ता, स्नेहिल डौंदे, मुकेश पण्डित, परमार्थ के निदेशक अनिल सिंह, वरुण सिंह, आई.आई.टी.टी.एम. के निदेशक प्रो. आलोक शर्मा, शेखर निबालकर, आर्यशेखर, पारस सिंह,   शिवानी सिंह, सोनिया पस्तोर, सत्यम, जितेन्द्र यादव, महताब आलम, धीरज सिंह. मानवेन्द्र सिंह , सहित देशभर के 22 राज्यों से आए लोग इस सम्मेलन में प्रतिभागी रहे। कार्यक्रम के अन्त में, मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री तुलसी सिलावट की पहल पर बुन्देलखण्ड परिक्षेत्र में कार्य कर रही जल सहेलियों को शाल, मानपत्र के माध्यम से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का संचालन एवं जल जन घोषणापत्र का प्रस्तुतिकरण डॉ. संजय सिंह ने एवं आभार सर्वाेदय जन कल्याण परिषद के अध्यक्ष मनीष राजपूत ने व्यक्त किया। कार्यक्रम के बाद युवाओं से संवाद हेतु जलपुरुष राजेन्द्र सिंह उज्जैन विरासत बचाओ यात्रा हेतु रवाना हुए। सर्वाेदय जन कल्याण परिषद के अध्यक्ष मनीष राजपूत ने बताया कि सम्मेलन में निकले निष्कर्षाें को आगे बढाने के लिए सर्वाेदय जन कल्याण परिषद नदी यात्रा करेगी, जिसके प्रारम्भिक चरण में स्वर्णरेखा, क्वांरी और सिन्ध नदियों की यात्रा कर समुदाय को जागरुक किया जायेगा।