मध्यप्रदेश में करीब डेढ़ साल बाद…

आख़िर खत्म हुआ स्कूली बच्चों का इंतजार !

भोपाल में करीब डेढ़ साल बाद 6वीं से लेकर 12वीं तक की क्लास बुधवार यानी 1 सितंबर से सप्ताह भर के लिए खुलने जा रही हैं। हालांकि 50% की क्षमता से ही क्लास लगाने के निर्देश के कारण एक बच्चा सप्ताह में तीन ही क्लास अटेंड कर सकेगा। शासन की गाइडलाइन के अनुसार स्कूल में प्रार्थना से लेकर बच्चों के एक जगह जमा होने पर बंदिश है। ऐसे में सरकारी स्कूलों से लेकर प्राइवेट स्कूलों तक में स्टूडेंट्स आपस में कोई सामान न ले सकेंगे और न ही दे सकेंगे। छात्रों को खाने का सामान साथ लाना होगा। 

स्कूलों में पीने का पानी की व्यवस्था तो की है, लेकिन सभी बच्चों को पानी साथ लाने की सलाह दी गई है। प्राइवेट स्कूल ने कैंटीन जैसी सुविधा बंद रखने का निर्णय लिया है, तो सरकारी स्कूल में मध्यान्ह भोजन नहीं मिलेगा। बच्चों को स्कूल भेजना अनिवार्य नहीं है। यह माता-पिता की मर्जी पर है कि वे अपने बच्चे को स्कूल भेजना चाहते हैं या नहीं। भोपाल के सरकारी स्कूल विद्या विहार और होशंगाबाद रोड स्थित प्राइवेट स्कूल ज्ञान गंगा की लाइव रिपोर्ट के माध्यम बताने का प्रयास कर रहे हैं कि स्कूल कितने बदल गए हैं।

  • सिर्फ 50% क्षमता के साथ 9वीं से 12वीं की क्लास लग रही हैं। 11वीं और 12वीं की क्लास सप्ताह में दो दिन है। 9वीं और 10वीं की क्लास सप्ताह में एक दिन।
  • जहां बच्चों के बैठने की समुचित व्यवस्था नहीं है, वहां सप्ताह में एक दिन छोटे-छोटे ग्रुप में क्लास लगाई जा रही।
  • बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अभिभावकों की अनुमति जरूरी होगी।
  • स्कूल में कोरोना से निपटने के लिए सभी तरह के तरीके जैसे सैनिटाइजर, मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन अनिवार्य।
  • सभी शिक्षकों और कर्मचारियों का 100% वैक्सीनेशन अनिवार्य।
  • बच्चे की तबीयत खराब होने पर उसे तत्काल अस्पताल ले जाने के साथ ही अभिभावकों को सूचना देना अनिवार्य है।