आओ हम सब करें अपराध मुक्त भारत का निर्माण..!

अपराध मुक्त भारत मिशन के माध्यम से भारतीय पुलिस का पूर्ण, सामयिक एवं आधुनिक रूपान्तर आवश्यक है आओ मिलकर इसे संभव बनाये। समय की तकनीकी जटिलताओं के लिये हमारे  पुलिस फोर्स अभी पूरी तरह से तैयार नही है। तकनीक का लगातार उन्नत  होने से सामाजिक एवं आर्थिक तानेवाने में आ रहे परिवर्तनों के कारण जमीनी हकीकत ज्यादा पेंचीदगी एवं चुनौतीपूर्ण हो गयी है । पुलिस का कार्य और भी कठिन व चातुर्यपूर्ण हो गया है। पुलिस प्रशिक्षण उसे इसके लिये तैयार करने के लिये समुचित प्रयास भी नही कर पा रहा है। कोरोना के समय डिजिटाइज इन्टरेक्शन में भारी बढ़ोत्तरी हुई है साइबर अपराधों में अप्रत्याशित बढोत्तरी हुई है। 

भारत शासन के द्वारा 30 अगस्त 2019 को साइबर अपराधों की रिपोर्टिंग के लिये एक पोरटल लॉच किया था। गृह मंत्रालय के द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार इस पोर्टल पर 2 लाख से अधिक रिपोर्ट्स प्राप्त होने बाबजूद मात्र 2.5 प्रतिशत प्रकरणों में ही प्राथमिकी दर्ज हुई है। इसका अर्थ है कि 97.5 प्रतिशत प्रकरणों में अपराधों का पंजीयन ही नही हुआ, यह तब हो रहा है जबकि माननीय उच्चतम न्यायालय के लगातार संज्ञेय अपराधों की सूचनाओं पर प्राथमिकी दर्ज करने की अपरिहार्यता पर जोर दिया जा रहा है। अब प्रश्न यह उठता है कि क्या यह सब राजनैतिक सांठगांठ के तहत हो रहा है ? क्या इसे कानून का राज कहा जा सकता है ? 

आम आदमी कहां जाये ? उसकी सुनवायी होगी अथवा नही ? और यदि सुनवाई होगी भी  होगी तो क्या उसे न्याय मिल पायेगा। सबसे बड़ी बात उसके बाद कौन सुनेगा और कहां सुनेगा ? क्योंकि इस गूँगी एवं लंगड़ी व्यवस्था में जनता की रिपोर्टिंग का नक्कारखाने में तूती की आवाज जैसा हस्र होगा। यदि सरकारों में बैठे राजनेताओं और भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत के कारण जनता के साथ घटित होने वाले अपराधों में से अधिकांश केस तो रजिस्टर्ड ही नहीं हो पाते हैं। कारण जो भी हों, क्या इस जिम्मेदारी का निर्वहन बेशर्म राजतंत्र करेगा या किया हम इन्हें जनहित के सामयिक एवं आवश्यक निर्णयों को लेने के लिये मजबूर कर पायेंगें ? 

यदि हाँ तो इसके लिये हमारी रणनीति क्या होनी चाहिए ? मुझे लगता है कि अब समय आ गया है और इसका किसी ना किसी को तो यह बीड़ा उठाना ही होगा। इसलिए हमें यह पहल करना ही होगी। यदि हमारा राजतंत्र स्वार्थी, खुदगर्ज एवं अपराधिक मानसिकता से ग्रसित हो गया है तो हमें इसमें सुधार लाने इसे ठीक करने के लिए पूरी लग्न और एकाग्रता के साथ इस दिशा में कार्य करना होगा इस चुनौती को स्वीकार करना ही पड़ेगा क्योंकि यह समय और परिस्थितियों की मांग भी है। इसके अतिरिक्त और कोई विकल्प वर्तमान परिपेक्ष में नही है। आओ हम सब मिलकर करें अपराध मुक्त भारत का निर्माण।