ग्वालियर को संगीत के क्षेत्र में संगीत सम्राट तानसेन से जाना जाता है…

रागायन संगीत संस्था है युवाओं के लिए एक बड़ा प्लेटफार्म : महंत

ग्वालियर। सिद्ध पीठ श्री गंगा दास की बड़ी साला प्राचीन और ऐतिहासिक धार्मिक स्थल है। इसका इतिहास 600 साल से पुराना मुगल बादशाह अकबर भी इस स्थल पर आकर नतमस्तक हो चुके हैं। अब बड़ी साला जो रागायन संगीत संस्था के माध्यम से शास्त्रीय संगीत को बढ़ावा देने के लिए आज शहर का एक बड़ा प्लेटफॉर्म बन चुका है। जो युवाओं को शास्त्रीय संगीत के लिए प्रोत्साहन करने का एक माध्यम है। यह बात पत्रकारों से चर्चा करते हुए महंत रामसेवक दास पूरन बैराठी पीठाधीश्वर श्री गंगा दास की बड़ी साला द्वारा कही । बड़ी साला के महंत रामसेवक दास ने बताया कि ग्वालियर को संगीत के क्षेत्र में संगीत सम्राट तानसेन, लक्ष्मी बाई समाधि एवं राजा मानसिंह के नाम से जाना जाता है और आज शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में जिस तरह ग्वालियर का नाम लिया जाता रहा है मेरा विचार है कि भविष्य में एक संस्कृत एवं संगीत विद्यालय शुरू करने का भी विचार चल रहा है।

बड़ी साला के अंतर्गत शास्त्रीय संगीत को बढ़ावा देने के लिए 30 वर्ष पहले  रागायन संस्था बनाई गई जो आज ग्वालियर शास्त्रीय संगीत में रुचि रखने वाले युवाओं को एक प्लेटफार्म पर लाकर उन्हें प्रोत्साहन करने का हमारे द्वारा निरंतर कार्य किया जाता रहा है। और हर माह संगीत सभा का आयोजन रागायन के माध्यम से चल रहा है ।जिसमें नवोदित से लेकर वरिष्ठ कलाकार अपनी  प्रस्तुतियां देते हैं। संस्था द्वारा हर वर्ष वार्षिक संगीत समारोह भी आयोजित किया जाता है। ग्वालियर को शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में युवाओं को प्रोत्साहन करने के लिए एक अत्याधुनिक विद्यालय की बेहद जरूरत है। जिससे संगीत के क्षेत्र में ग्वालियर का नाम हमेशा बना रहे और संगीत सम्राट तानसेन को  सदियों तक याद करते रहे।

वही महंत जी ने कहा कि बड़ी साला प्रांगण में वर्ष भर संगीत के साथ अनेकों धार्मिक कार्य रामनवमी, श्री कृष्ण जन्मोत्सव, महाशिवरात्रि, तीज त्योहार, श्रावण मास मैं भागवत पुराण के साथ 7 दिन का झूला महोत्सव भी आयोजित किया जाता है। वर्षों से अतिक्रमण कर जमे हैं कई लोग। गंगा दास की साला राम जानकी मंदिर के रहवासी एरिया में कई लोग ऐसे हैं जो विगत वर्षों से गंगा दास की साला की भव्य इमारत के हिस्से में अपना ताला डालकर कई कमरों पर अपना कब्जा किए हुए हैं। वहीं कुछ लोग तो परिवार सहित रह रहे हैं। लेकिन साला के महंत द्वारा जब इन लोगों से किराए के लिए कहा जाता है दबंगई दिखाकर शांत कर दिया जाता है। जबकि प्रशासन द्वारा अतिक्रमणकारियों से शक्ति की जा रही है। और साला के प्रांगण में जो अवैध अतिक्रमण किए हुए हैं उनकी और प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है।