अगर हम सूक्ष्मता से विचार करें तो…

सेट डिजाइनिंग रंगमंच का एक महत्वपूर्ण पक्ष है : डॉ. द्विवेदी 

राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के नाटक एवं रंगमंच संकाय में एमपीए तृतीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिये  चल रही 45 दिवसीय सेट डिजाइनिंग कार्यशाला का समापन हुआ, सेट डिजाइनिंग की कार्यशाला विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ हिमांशु द्विवेदी द्वारा दी जा रही थी , कोविड-19 के चलते यह क्लासेस ऑनलाइन  एवं ऑफलाइन के माध्यम से  आयोजन किया गया है, जिसमें विद्यार्थियों को सेट कैसे तैयार किया जाता है डॉ हिमांशु द्विवेदी ने विद्यार्थियों को कार्यशाला में बताया की किसी ही वस्तु की रुप या आकृति को उसका विन्यास या डिजाइन कहा जाता है डिजाइन एक ऐसा शब्द है जिस पर अलग- अलग व्यक्ति का अलग अलग मत हो सकता है कोई इसे सिर्फ बनावट कह सकता है तो कोई इसे वस्तु की पहचान स्थापित करने का माध्यम अगर हम सूक्ष्मता से विचार करें तो देखते हैं यह एक आंशिक रूप से सत्य है।

वास्तव में डिजाइन की अवधारणा इससे अधिक व्यापक है वस्तुओं के रूप और सौंदर्य अभिवृद्धि के साथ-साथ कई बातें भी डिजाइन की परिधि में आती हैं एक अच्छा डिजाइन वही है जिसमें सौंदर्य के साथ-साथ सुविधाजनक उपयोगिता मजबूती आदि गुण होता है डिजाइन किसी एक वस्तु का वस्तुओं के समूह का होता है उन्होंने सेट डिजाइन, स्टेज डिजाइन या प्रोडक्शन डिजाइन के रूप में भी जाना जाता है नाटय दृश्यों का निर्माण होता है स्टेज पिक्चर रूप लुक नाटक के लिए मंच का भौतिक रूप है मंच की तस्वीरों को डिजाइन और स्पर्श के उपयोग के अच्छे सिद्धांतों को व्यक्त करना। 

सेट डिजाइन दर्शकों के लिए दृष्टिकोण होता है सेट की भूमिका में एक्टिंग स्पेस और उसके आसपास की हर चीज के बारे में निर्णय लेना होता है फर्नीचर, उठे हुए प्लेटफार्म, फ्लाइंग स्पेस ,प्रवेशद्वार, निकास द्वार और स्पेस उसका आकार जिसमें प्रोडक्शन दृश्यों को चित्रित किया जाता है सेट डिजाइनर का काम करता है।डिजाइन करते समय कई बातों को ध्यान रखना पड़ता है निर्माण संभव हो, प्रयोग संभव हो वितरण संभव हो ! यह डिजाइन तत्वों के सहयोग से बनते हैं यह चार प्रकार के तत्व होते हैं। अवधारणात्मक, दृश्यात्मक, संबंधात्मक, व्यवहारात्मक होता है सेट कई तरह से बनाए जा सकते हैं यह लकड़ी के भी बनाए जा सकते हैं गत्ते के भी बनाए जा सकते हैं इनके मेजरमेंट के हिसाब से सेट को डिजाइन किया जाता है। 

जिसमें विद्यार्थियों ने कई नाटकों को लेकर अपने  सेट को डिजाइन किया है । जिन विद्यार्थियों ने सेट डिजाइन किए उनके नाम मनोज कुशवाह,  सुमित कुमार सैनी, रवि राज सरल, अमित कर्णावत, रेखा सिसोदिया, मयंक पाराशर, लक्ष्य अरोरा, गौरव शर्मा, प्रसून भार्गव, अभिदीप सुहाने, राहुल शाक्य। यह कार्यशाला 45 दिवस तक लगातार चली, जिसमें सेट डिजाइनिंग के इतिहास, परंपरा एवं उसकी निर्माण विधि को विस्तार से समझाया गया,  अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर पंडित साहित्य कुमार नाहर, विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉक्टर कृष्ण कांत शर्मा एवं वित्त नियंत्रक दिनेश पाठक ने छात्र छात्राओं को शुभकामनाएं दीं।