विद्या भारती उच्च षिक्षा संस्थान एवं JU के संयुक्त तत्वावधान में...

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में संगोष्ठी 26 को

उच्च षिक्षा के आदर्ष स्वरूप और गतिविधियों का निर्धारण कर उद्धेष्यानुकूल गुणवत्तापूर्ण षिक्षा की संकल्पना को साकार करने के लिए विद्या भाररती उच्च षिक्षा संस्थान की स्थापना की गई है। यह संस्थान अखिल भारतीय स्तर पर षिक्षा की गुणवत्ता एवं प्राचीन भारत की श्रेष्ठ संकल्पनाओं को आकार देने का कार्य कर रहा है। उच्च षिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत संस्थानों के साथ संपर्क, संवाद व समन्वय स्थापित कर एक सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिषा में कार्य करने की महती आवष्यकता है। संस्थानों के बीच परस्परपूरकता व सहयोग का वातावरण निर्मित कर महाविद्यालयों में प्राचीनता और नवीनता, पाष्चात्य (व्बबपकमदजंस) और पौर्वात्य (व्तपमदजंस) तथा भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक षिक्षा के समन्वय के आधार पर उच्च षिक्षा की संरचना देष में विकसित किए जाने की आवष्यकता है। उच्च षिक्षा के क्षेत्र में षिक्षण के साथ-साथ शोध और कौषल विकास को प्रोत्साहित करने की महती आवष्यकता है। इसके लिए यह संस्थान प्रतिबद्ध है। 

संपूर्णता में संस्था/महाविद्यालय को फनंसपजल ब्पतबसम या ब्मदजतम व िम्गबमससमदबम के रूप में विकसित करने का प्रयास करना है। विद्या भारती उच्च षिक्षा संस्थान का दृष्टिकथन भारतीय षिक्षा-दर्षन, मनोविज्ञान और जीवन मूल्यों के आधार पर सृजनषीलता, जीवन दृष्टि, चिंतन कौषल, सामाजिक संवदेना, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अभिरूचि, क्षमता और व्यवहार-कौषल का युगानुकूल विकास कर सहयोग, सक्षम, सच्चरित्र और अध्यवसायी पीढ़ी का निर्माण करना जो देष-भक्ति, समाज सेवा और वैष्विक दृष्टि से ओत-प्रोत हो तथा समरस, सुसंपन्न तथा सुसंस्कृत समाज व राष्ट्र के निर्माण हेतु कृतसंकल्प हो। जीवाजी विष्वविद्यालय (श्रन्) ग्वालियर, अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विष्वविद्यालय है। इस विष्वविद्यालय का नाम ग्वालियर के जीवाजीराव सिंधिया के नाम पर रखा गया है। विष्वविद्यालय की स्थापना 23 मई 1964 को हुई थी। भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति सर्वपल्ली डाॅ. राधाकृष्णन ने 11 दिसंबर 1964 को वि.वि. परिसर की आधारषिला रखी थी। 

जीवाजी विष्वविद्यालय का ध्येय वाक्य है-‘‘विद्या प्राप्यते तेजः’’ जिसका अर्थ है, विद्या के द्वारा ही तेज प्राप्त किया जा सकता है। विष्वविद्यालय ग्वालियर और चंबल संभाग के आठ जिलों ग्वालियर, मुरैना, भिण्ड, गुना, अषोकनगर, षिवपुरी, दतिया, और श्योपुर कलां, में उच्च षिक्षण संस्थानों को संबद्धता प्रदान करता है। इसकी शुरूआत 29 संबद्ध काॅलेजों से हुई थी। और अब 400 से अधिक महाविद्यालय इससे संबद्ध हैं। विष्वविद्यालय ने सत्र 1966-67 से अपने स्नातकोत्तर षिक्षण और अनुसंधान का प्रारम्भ किया। राष्ट्रीय षिक्षा नीति 2020, इक्कीसवीं सदी की पहली षिक्षा नीति है और इसका उद्धेष्य हमारे देष की कई बढ़ती विकासात्मक अनिवार्यताओं को पूर्ण करना है। यह नीति भारत की परम्पराओं और मूल्य प्रणालियों पर आधारित व्यक्तित्व का निर्माण करते हुए 21वीं सदी की षिक्षा के आकांक्षात्मक लक्ष्यों के साथ संरेखित एक नई प्रणाली बनाने के लिये, इसके नियमन और शासन के साथ षिक्षा संरचना के सभी पहलुओं का प्रस्ताव करती है। राष्ट्रीय षिक्षा नीति 2020 प्रत्येक व्यक्ति की रचनात्मक क्षमता के विकास पर विषेष बल देती है। षिक्षक को षिक्षा प्रणाली में मूलभूत सुधारों के केन्द्र में होना चाहिये। 

राष्ट्रीय षिक्षा नीति सभी स्तरों पर हमारे समाज के सबसे सम्मानित और आवष्यक सदस्य के रूप में षिक्षकों को स्थापित करने की भूमिका पूर्ण करती है क्योंकि वे वास्तव में हमारी अगली पीढ़ी के नागरिकों का निर्माण करते हैं। संगोष्ठी दिनांक 26 फरवरी 2021 को गालव सभागार जीवाजी विष्वविद्यालय में प्रातः 09 से सायं 05 बजे तक संपन्न होगी। संगोष्ठी में पंजीयन का कार्य प्रातः 09ः00 बजे से होगा और उद्घाटन सत्र प्रातः 10ः00 बजे से रहेगा। इस संगोष्ठी की संरक्षक प्रो. (डाॅ.) संगीता शुक्ला कुलपति जीवाजी विष्वविद्यालय ग्वालियर हैं। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के.एन. रघुनंदन, अखिल भारतीय सह-संगठन मंत्री, विद्या भारती उच्च षिक्षा संस्थान, का मार्गदर्षन प्राप्त होगा साथ ही गोविन्द प्रसाद शर्मा, अध्यक्ष नेषनल बुक ट्रस्ट आॅफ इंडिया, का भी आषीर्वाद प्राप्त होगा। संगोष्ठी का संयोजन डाॅ. केषव सिंह गुर्जर, निदेषक महाविद्यालय विकास परिसर एवं डाॅ. षिवकांत द्विवेदी, अधिष्ठाता छात्र कल्याण, जीवाजी विष्वविद्यालय, ग्वालियर एवं सह-संयोजक चंद्रप्रताप सिंह सिकरवार, निदेषक महात्मा गाँधी विधि विष्वविद्यालय, ग्वालियर हैं।