पाकिस्तान के 9,3000 सैनिकों को आत्मसमर्पण करने पर कर दिया था मजबूर...

ग्वालियर से भोपाल के लिए रवाना हुई स्वर्णिम विजय मशाल या़त्रा

 

ग्वालियर। भारत की पाकिस्तान पर 1971 शुद्ध की विजय के उपलक्ष्य में विगत 24 दिसम्बर 2020 को मुरार छावनी में लाई गई स्वर्णिम विजय मशाल या़त्रा शनिवार को ग्वालियर शहर से आगे गंतव्य के लिए रवाना हुई। उक्त विदाई कार्यक्रम शनिवार सुबह बाज आॅडिटोरियम में आयोजित किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर ग्वालियर पुलिस महानिरीक्षक अविनाश शर्मा विशेष अतिथि के रूप में अपर कलेक्टर किशोर कान्याल पुलिस अधीक्षक अमित सांघी उपस्थित रहे।

वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता स्टेशन कमांडर ब्रिगेडियर सुशील विश्वास ने की। इस अवसर पर कार्यक्रम में स्वर्णिम विजय मशाल या़त्रा को सेना के जवानों और अधिकारियों ने सशस्त्र सलामी देकर आगे गंतव्य के लिए रवाना किया, वहीं कार्यक्रम में अतिथियों ने स्वर्णिम विजय मशाल या़त्रा पर बोलते हुए कहा कि यह विजय मशाल हमें हमारे सेना के गौरव और बलिदान को याद दिलाते हुए हमें गर्व करने का एक असीम अवसर प्रदान करती है।

उल्लेखनीय है कि 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध में भारत ने महज़ 13 दिन में पाकिस्तान को हराते हुए पाकिस्तान के 93000 सैनिकों को आत्मसमर्पण करने पर मजबूर कर दिया था। जिस युद्ध के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूरे देश में सेना को दिल्ली के शहीद स्मारक से चार मशाल प्रज्वलित कर विजय प्रतीक के रूप में देश की चारों दिशाओं में एक यात्रा के रूप में भेजी है। जिसकी कड़ी में यह एक विजय मशाल ग्वालियर पहुँची थी, शनिवार को वह ग्वालियर से रवाना होकर भोपाल पहुँचकर कन्याकुमारी तक एक विजय का संदेश लेकर पहुँचेगी।