ठंड की लहर

उत्तर भारत के इलाकों में अचानक मौसम ने करवट ली और पारा नीचे लुढ़क आया। पहाड़ों में बर्फ गिरने के बाद वहां से आ रही ठंडी हवा पूरे मैदानी इलाके में लोगों को ठिठुरा रही है। मौसम विज्ञान विभाग अपनी शब्दावली में इसे ठंड और भीषण ठंड की स्थिति कह रहा है। मैदानों में ऐसी स्थिति का निर्धारण दो आधारों पर होता है। एक, न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस के नीचे हो और दो, अधिकतम तापमान में सामान्य से क्रमशः 4.5 डिग्री सेल्सियस और 6.4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जाए। इस लिहाज से दिल्ली के सफदरजंग में मंगलवार को अधिकतम तापमान 18.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से 5 डिग्री कम है और पालम में यह 16.7 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से 7 डिग्री सेल्सियस कम है। कमोबेश यही स्थिति पंजाब, हरियाणा और उत्तर-पश्चिमी राजस्थान के इलाकों में भी है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले कुछ दिन यही हाल बना रहने वाला है। ध्यान रहे, तापमान में इस तरह की अचानक आने वाली कमी स्वास्थ्य के लिहाज से घातक मानी जाती है। इसकी वजह यह है कि शरीर इस बदलाव के लिए तैयार नहीं रहता। 

इस कारण उसकी प्रतिरोध शक्ति इतनी कमजोर पड़ जाती है उसके न सिर्फ ठंड पकड़ने बल्कि, तरह-तरह के वायरसों की चपेट में आने का खतरा भी बढ़ जाता है। जाहिर है, यह बात कोरोना वायरस पर भी लागू होती है। समझा जा सकता है कि इन हालात में राजधानी दिल्ली के आसपास कृषि कानूनों को लेकर आंदोलन कर रहे लाखों किसानों का दिन-रात सड़क पर ही रहना उनके लिए कितना जोखिम भरा है। धक्कामुक्की के छिटपुट मामलों को छोड़ दें तो 22 दिन से चल रहे इस आंदोलन में अब तक कोई हिंसा नहीं हुई है। बावजूद इसके, 22 से ज्यादा किसानों की मौत हो चुकी है। ज्यादातर किसानों की जान रात-दिन प्रतिकूल स्थितियों में खुले में बैठे रहने से गई है। 

अब जब मौसम ने भी अपना कठोर चेहरा दिखाने का फैसला किया है तो उनको लेकर चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। लेकिन यह चिंता समाज के अलावा सरकार के रुख में भी दिखनी चाहिए। यह सही है कि किसान अपनी मांगों पर जरा भी झुकने को तैयार नहीं हैं। सरकार ने कुछ लचीलापन जरूर दिखाया है, लेकिन बातचीत किसी सिरे चढ़ सके, इसके लिए वह काफी नहीं है। दोनों पक्षों के पास अपने स्टैंड को लेकर अलग-अलग तर्क हैं इसलिए कोई हल न निकलने के लिए किसी एक पक्ष को दोषी ठहराना ठीक नहीं है। फिलहाल सवाल सिर्फ एक है कि हल निकलने तक दोनों पक्ष एक-दूसरे के प्रति कैसा रुख अपनाते हैं। बेहतर होगा कि सरकार अभी के समय में आंदोलनकारी किसानों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दे। वे भारत के सम्मानित नागरिक हैं और सरकार से कुछ उम्मीद लगाकर ही अपने घर से दूर इतना कष्ट झेल रहे हैं। इस जानलेवा ठंड में बतौर अभिभावक केंद्र सरकार को उनकी सुरक्षा के उपाय करने चाहिए।