जिससे वाहन चालक बहुत परेशान होते हैं…

फुलवाग क्षेत्र, चौराहों, पड़ाव आदि क्षेत्रों में भिखारियों का है जमावड़ा

ग्वालियर। ग्वालियर में जिला , पुलिस प्रशासन और स्मार्ट सिटी डव्लपमेंट कारपोरेशन कितने ही दावा क्यों न करें कि हमने विभिन्न चौराहों की कायापलट कर दी है लेकिन असलियत इससे उतर है। भीड भरे चौराहों पर वाहनों के लिये सिस्टम व्यवस्थित नहीं है, वहीं चौराहों पर भिखारियों का भी कब्जा है, जो आम वाहन चालक व कार सवारों से भीख मांगने के लिये अडे रहते हैं, जिससे वाहन चालक बहुत परेशान होते हैं। सबसे ज्यादा भिखारी पडाव और फूलबाग चौराहे पर इनकी संख्या एक दर्जन से भी ऊपर है, और यह वाहन चालकों को परेशान करते हैं। 

पैसे मांगने के लिए छोटे-छोटे बच्चे औरतें वाहन चालकों के कपड़े किसके हैं पार्कों में आने वाले महिलाओं के कपड़े पकड़कर बच्चे भीख मांगते रहते हैं जब तक कि सामने वाली महिला यह लड़की पैसे ना दे दे। इन भिखारी लोगों में महिलाओं की संख्या ज्यादा है, जो गर्भवती हैं अपने पेट व होने वाले बच्चे के नाम पर भीख मांगने को लेकर अढी रहती हैं। 

यह महिला छोटे-छोटे बच्चों को लेकर उन्हें जल्दी से भी हालत में बीमार बताकर भीख मांगते हैं हालांकि कुछ महिला ऑपरेशन में कुछ छोटे-मोटे प्लास्टिक के आइटम भी बेचते नजर आ जाते हैं फूल बरसाओ की रेड लाइट पर। यह लोग कहां से आए हैं और यहां ग्वालियर में कब आकर बस गए इसके बारे में जानने की जहमत ना पुलिस ने उठाई ना प्रशासन ने यह लोग शहर में रहकर कोई वारदात को भी अंजाम दे सकते हैं इसलिए पुरुषों पुलिस और प्रशासन को इनसे सतर्क होना चाहिए। 

भीख मांगने वालों की बढ़ती भीड़ से अन्य शहरों से आने वाले पर्यटकों के सामने ग्वालियर की छवि धूमिल होती है। इसके बाद भी इसके बाद भी पडाव पुलिस भी इन पर कार्रवाई नहीं करती। पडाव और फूलबाग चौराहों पर भिखारियों से परेशान होकर वाहन चालक अपने वाहन के शीशे भी बंद कर लेता है, लेकिन यह भिखारी कांच व कार के दरवाजे पर हाथ मारकर जबरदस्ती भीख मांगते हैं। ऐसे में पुलिस व जिला प्रशासन को चाहिये कि इन भिखारियों को तत्काल पकड़ कर सुधार गृह में भेजा जाये, और इनको भीख की जगह काम उपलब्ध कराया जाये ताकि यह भीख मांगकर पेट भरने की जगह काम करकर पेट भर सके।