टीकाकरण के बाद हाेगी इम्युनोजैनिसिटी जांच…

भोपाल में 2 से 3 हजार लोगों पर होगा कोवैक्सीन का ट्रायल

गांधी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध हमीदिया अस्पताल और एक निजी अस्पताल में अगले हफ्ते 2 से 3 हजार लोगों पर कोरोना की कोवैक्सीन का तीसरे चरण का क्लीनिकल ट्रायल होगा। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया और क्लीनिकल ट्रायल रजिस्ट्री ऑफ इंडिया ने भोपाल के हमीदिया और एक निजी अस्पताल सहित देश के 23 संस्थानों में इसकी मंजूरी दे दी है। देशभर में इस वैक्सीन का तीसरे चरण का क्लीनिकल ट्रायल 23 संस्थानों में 28500 लोगों पर होगा। सीटीआरआई से भारत बायोटैक इंटरनेशनल लिमिटेड और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की कोवैक्सीन का पहले और दूसरे चरण का क्लीनिकल ट्रायल पूरा हो चुका है। यह ट्रायल 1100 लोगों पर हुआ था। पहले चरण के ट्रायल में वैक्सीन का डोज और दूसरे चरण के ट्रायल में उसकी प्रभावशीलता को जांचा गया है। तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल में शामिल प्रत्येक वालेंटियर को कोवैक्सीन के दो डोज लगाए जाएंगे। प्रत्येक डोज 0.5 एमएल का होगा। ट्रायल में शामिल व्यक्ति को कोवैक्सीन का पहला डोज दिए जाने के 28वें दिन दूसरा डोज दिया जाएगा। ट्रायल में शामिल वालेंटियर की सेहत की जांच टीका लगाए जाने के बाद 7 से 15 दिन के अंतराल में अगले तीन महीने तक की जाएगी। 

लेकिन, टीका लगाने से पहले संबंधित वाॅलेंटियर का आरटीपीसीआर तकनीक से कोविड टेस्ट और एंटी बॉडी टेस्ट भी कराया जाएगा। क्लीनिकल ट्रायल में 18 साल से कम उम्र का कोई भी बच्चा, किशोर , किशोरी शामिल नहीं होगी। इसके अलावा इस प्रोजेक्ट में गर्भवती महिलाएं भी बतौर वाॅलेंटियर वैक्सीन नहीं लगवा सकेंगी। ये प्रावधान सीटीआरआई में भारत बायोटैक इंटरनेशनल लिमिटेड द्वारा सबमिट की गई क्लीनिकल ट्रायल स्टडी प्रोजेक्ट रिपोर्ट में किए गए हैं। क्लीनिकल ट्रायल प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अनुसार कोवैक्सीन 18 साल से 99 साल तक के स्वस्थ महिला अथवा पुरुष को उसकी सहमति लेकर लगाई जाएगी। इससे पहले क्लीनिकल ट्रायल में शामिल होने की अनुमति देने वाले महिला, पुरुष की मेडिकल जांच की जाएगी। भोपाल (मध्यप्रदेश), अहमदाबाद (गुजरात), कांचीपुरम, चेन्नई (तमिलनाडु), जाजपुर (ओडिशा), कामरूप (असम), मुंबई , नागपुर (महाराष्ट्र), हैदराबाद (तेलंगाना), एम्स (दिल्ली) , फरीदाबाद, रोहतक (हरियाणा), पटना (बिहार), पुडुचेरी, बेंगलुरू (कर्नाटक), विशाखापट्टनम, गुंटूर (आंध्रप्रदेश), गोवा, अलीगढ़ (उत्तरप्रदेश), कोलकाता (बंगाल) । क्लीनिकल ट्रायल स्टडी में 30 प्रतिशत ऐसे वाॅलेंटियर को वैक्सीन लगाई जाएगी, जो बीपी, डायबिटीज से पीड़ित हैं। लेकिन, दवाओं से उनकी बीमारी की स्थिति नियंत्रण में हैं। 

ट्रायल में इस श्रेणी के 30 प्रतिशत वाॅलेंटियर रखने की वजह कोविड मरीजों में बड़ी संख्या में कोमोर्बेडिटी का मिलना है। टीकाकरण के बाद वाॅलेंटियर की इम्युनोजैनिसिटी जांच की जाएगी। इस जांच में टीकाकरण के बाद संबंधित व्यक्ति के इम्यून सिस्टम में हुए बदलावों का एनालिसिस किया जाएगा। इसके अलावा प्रत्येक वाॅलेंटियर का टीकाकरण के बाद एंटी बॉडी टेस्ट एक निश्चित समयांतराल के बाद किया जाएगा। ताकि संबंधित में वैक्सीनेशन के बाद एंटी बॉडी बनने के लेवल को जांचा जा सके। क्लीनिकल ट्रायल प्रोजेक्ट में शामिल एक संस्थान के इन्वेस्टिगेटर ने बताया कि ट्रायल में शामिल कोई भी महिला कोवैक्सीन का पहला डोज लेने के बाद अगले तीन महीने तक गर्भधारण नहीं करेगी। इसकी लिखित सहमति संबंधित महिला को ट्रायल प्रोजेक्ट के अनुबंध-पत्र में देनी होगी। इसी तरह इन्वेस्टिगेटर के अनुसार वैक्सीन का पहले डोज के बाद अगर कोई महिला वाॅलेंटियर प्रेग्नेंट होगी तो उसे वैक्सीन का दूसरा डोज नहीं लगाया जााएगा। लेकिन, महिला की सेहत में होने वाले सभी बदलावों की निगरानी की जाएगी।