उपचुनाव की आहट के बीच…

ग्वालियर-चंबल अंचल में बढ़ी हथियार व नशीले पदार्थों की तस्करी



ग्वालियर । उपचुनावों की आहट के साथ ही मप्र के ग्वालियर-चंबल अंचल में अवैध हथियारों के साथ-साथ शराब, स्मैक, गांजे की तस्करी बढ़ने लगी है। बीते 26 दिन में सिर्फ ग्वालियर शहर से ही 24 पिस्टल और 15 कट्टे पकड़े जा चुके हैं। यही हाल अंचल के अन्य जिलों का भी है। हाल ही में मुरैना और दतिया के बड़ौनी में भी काफी मात्रा में हथियार पकड़े गए थे। इससे पहले भी चुनाव के नजदीक आते ही अंचल में अवैध हथियारों का चलन बढ़ जाता है। इसका प्रमुख कारण यह भी है कि इस समयावधि में लाइसेंसी हथियार थानों में जमा करा लिए जाते हैं। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में जिन 27 सीटों पर उपचुनाव होने हैं, उनमें से सर्वाधिक 16 सीटें ग्वालियर-चंबल अंचल की हैं। इसीलिए सभी दलों की यहां की सीटों पर खास नजर है। 

24 पिस्टल, 15 कट्टे व 120 कारतूस जब्त ग्वालियर में बीते 30 दिनों में पुलिस ने .32 बोर की 24 पिस्टल पकड़ी हैं। करीब 15 कट्टे और 120 कारतूस भी जब्त किए हैं। इन कारतूसों में से 43 राउंड 9 एमएम पिस्टल के हैं। यह सिर्फ 10 बदमाशों से मिले हैं, जबकि वर्ष 2019 में पुलिस ने 200 बदमाशों को पकड़ने के साथ 219 अवैध हथियार व 412 कारतूस जब्त किए थे। नशीले पदार्थों की तस्करी बढ़ी ग्वालियर व उसके आसपास के जिलों में गांजा, स्मैक, ब्राउन शुगर की तस्करी के मामले भी सामने आए हैं। बीते 30 दिन में पुलिस ने काफी मात्रा में गांजा, स्मैक व ब्राउन शुगर पकड़ी है। जिले में वर्ष 2019 में 261 अवैध हथियार पकड़े गए थे। 

जबकि वर्ष 2020 के 7 महीने में 164 अवैध हथियार पकड़े जा चुके हैं। गुणवत्ता कंपनी जैसी खरगोन, खंडवा से आने वाली पिस्टल, कट्टे की गुणवत्ता ऐसी होती है कि हथियारों के शौकीन देखते ही रह जाएं। हाल में पकड़ी गईं 15 पिस्टलों की गुणवत्ता देखकर खुद ग्वालियर एसपी अमित सांघी भी दंग रह गए। फिनिशिंग के मामले में कहीं से भी कंपनी में बनने वाले लाइसेंसी हथियारों से कम नहीं थी। .32 बोर की पिस्टल ख़ंडवा-खरगोन से महज 10 से 12 हजार रुपये में मिल जाती है, जबकि अंचल में ये 20 से 25 हजार रुपये में मिलती हैं।

इनका कहना है जिले की क्राइम ब्रांच ने अवैध हथियार के साथ बदमाशों को पकड़ा है। पता लगा है कि हथियार खरगोन से लेकर आए थे। जल्द टीम वहां पहुंचाई जाएगी। उपचुनाव से पहले अवैध हथियारों को पकड़ना बड़ी सफलता है। पता लगा रहे हैं इनका उपयोग कहां और कैसे होना था। - अमित सांघी, एसपी ग्वालियर, मप्र