ना आंधी ना बारिश लेकिन फिर भी...
जारी है बिजली की लुका-छिपी

आज से करीब 20 वर्ष पूर्व बिजली के जो हालात थे,  वैसे ही हालात निर्मित करने की कोशिश इन दिनों विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा की जा रही है ! इसके पीछे कंपनियों की क्या मंशा है ? उनके ऊपर कौन सा प्रेशर है ?  जो बे-वजह इन कंपनियों को  बिजली कटौती करने पर मजबूर कर रहा है।  20 वर्ष पहले जो हालात थे वैसे ही हालात इन दिनों देखने को मिल रहे हैं। जबकि वर्तमान में प्रदेश के पास भरपूर सर प्लस में बिजली है उसके बावजूद भी बिजली कटौती कभी मेंटेनेंस के नाम पर कभी फाल्ट के नाम पर कभी भी किसी भी वक्त अचानक से बिजली काट दी जाती है। अब यहां प्रश्न यह उठता है कि मानसून आने से पहले प्री मानसून मेंटेनेंस, सर्दियां आने से पहले  प्री विंटर मेंटेनेंस और कभी समर सीजन मेंटेनेंस के नाम पर यह कंपनियां बिजली कटौती करती हैं। उसके बाद भी इनके पास तमाम अनगिनत बहाने होते हैं बहाने भी ऐसे कि जिन्हें सुनकर एक बच्चे को भी हंसी आ जाए। 

कभी यह कहते हैं तेज हवा चलने के कारण बिजली गुल हो गई कभी यह कहते हैं गिलहरी के कारण इंसुलेटर बस्ट हो गए कभी यह कहते हैं तेज बरसात की वजह से बिजली चली गई। जबकि इनके द्वारा तेज आंधी या बरसात के समय बिजली पहले से ही एतिहातन बंद कर दी जाती है। अरे भैया अब इनसे पूछा जाए कि अगर इन कारणों से बिजली जाती है तो फिर आप मेंटेनेंस के नाम पर बिजली कटौती क्यों करते हो ? इस समय तो ग्वालियर में ना तेज आंधी चल रही है ना तेज बारिश हो रही है फिर बार-बार बिजली कटौती क्यों की जा रही है इसका जवाब किसी के भी पास नहीं है। कॉल सेंटर फोन लगाओ तो 3 घंटे बाद 10 या 15  मिनट के लिए लगातार बिजली की सप्लाई मिलती है उसके बाद उसके बाद फिर वही बिजली की आंख मिचौली शुरू हो जाती है सोमवार और मंगलवार को तो बहुत ही ज्यादा बिजली ने तंग कर रखा है। 

जो लोग यह लेख पढ़ रहे हैं उन्हें शायद यकीन नहीं होगा कि मैं जब यह लेख लिखने के लिए बैठा तो उस समय भी तीन बार बिजली गुल हुई इसके बाद हार थक्कर मैंने यह लेख कंप्यूटर पर लिखने के बजाय मोबाइल पर लिखना ही बेहतर समझा । क्योंकि बार बार बिजली जाने से मुझे मेरे कंप्यूटर के खराब होने का डर भी सताने लगा इसलिए यह लेख मैं मोबाइल की सहायता से पूरा कर पाया । आप यकीन नहीं करेंगे जिस समय में लेख लिख रहा हूं उस समय भी मेरे क्षेत्र में बिजली नहीं है। मैं अंधेरे में बैठकर मोबाइल पर यह एडिटोरियल टाइप कर रहा हूं क्योंकि कंप्यूटर मेरा कंटिन्यू चल नहीं पा रहा है। 

मुझे तो इस बिजली कटौती के पीछे कोई साजिश नजर आती है क्योंकि जब से ऊर्जा विभाग का भार ग्वालियर के ऊर्जावान मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर के कंधों पर आया है तभी से बिजली कटौती की समस्या एकाएक बढ़ गई है। इसके पीछे क्या लॉजिक है यह तो एक जांच का विषय हो सकता है। यह ख्याल मेरे दिमाग में इसलिए भी आया क्योंकि अभी दो-तीन महीने बाद प्रदेश में लगभग 26 सीटों पर उपचुनाव भी होने हैं तो इन उपचुनावों में बिजली कटौती को एक मुद्दा बनाए जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। और पावर कट की समस्या भी ऊर्जा मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में ही सबसे ज्यादा हो रही है। तो फिर क्यों ना मन में यह शंका आए कि कहीं यह एक सोची-समझी रणनीति के तहत किया जा रहा है। जिससे मंत्री को बिजली कटौती जैसे मुद्दे का सामना करना पड़े और उनका वोट बैंक प्रभावित हो। 

आखिर इस प्रकार की साजिश के पीछे कौन सी ताकतें काम कर रही हैं यह तो शासन और प्रशासन द्वारा ही पता लगाया जा सकता है। और शासन प्रशासन को इसका पता लगाना भी चाहिए कि इस प्रकार की घटना के पीछे किसका हाथ है, क्योंकि अचानक से इतने सारे फॉल्ट होना अचानक से बार-बार बिजली गुल हो जाना कहीं ना कहीं संदेह तो पैदा करता ही है। साथ ही इन कंपनियों और उनके मातहतों की कार्यकुशलता पर प्रश्न खड़े करता है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर को भी इस समस्या का समाधान करने के लिए सख्ती के साथ अफसरों व कर्मचारियों को निर्देशित किया जाना चाहिए जिससे बिजली कटौती के कारण उनकी कार्य प्रणाली पर भी प्रश्न चिन्ह बिजली कंपनियों की वजह से लग रहा है । जबकी श्री तोमर की कार्यप्रणाली से प्रदेश के लोग भलीभांति परिचित हैं इसलिए इस समस्या के लिए पूरी तरह से बिजली कंपनी दोषी हैं। जो शहर को नियमित बिजली की सप्लाई देने में कहीं न कहीं फेल होती नजर आ रही है। 

इसके अलावा कंपनी की एक लापरवाही और भी सामने आ रही है वह यह है कि कई क्षेत्रों में विद्युत वितरण कंपनी द्वारा मनमाने तरीके से एवरेज बिल, भेजे जा रहे हैं, उपभोक्ताओं के घरों पर लगे मीटर की समय पर रीडिंग ना लेना, कहीं-कहीं प्रति माह रीडिंग लेने के बजाय 2 महीने की रीडिंग एक साथ लेना बिजली कंपनी की लापरवाही को दर्शाता है। साथ ही इस प्रकार की लापरवाही से उपभोक्ता को अनावश्यक रूप से आर्थिक हानि भी होती है क्योंकि सही समय पर रीडिंग ना होने से उपभोक्ता का मीटर तय रीडिंग से ज्यादा चल जाता है और फिर उसका यूनिट अधिक हो जाने से बिल की राशि भी यूनिट के आधार पर बढ़कर अधिक से अधिक हो जाती है । 

जिसका अंतत  भुगतान उपभोक्ता को ही करना पड़ता है जिससे उस को भारी आर्थिक क्षति पहुंचती है जिसके लिए सिर्फ और सिर्फ बिजली कंपनी जिम्मेदार है। लेकिन भुगतना उपभोक्ता को करना पड़ता है। इसलिए मंत्री जी को विद्युत वितरण कंपनी से यह सुनिश्चित करवाना चाहिए कि प्रत्येक उपभोक्ता की विद्युत खपत की रीडिंग प्रतिमाह नियमित तरीके से हो और खपत के अनुसार ही बिल जनरेट हो, किसी भी क्षेत्र में एवरेज बिल वितरित न किए जाएं इस बात की ताकीद श्री तोमर को विद्युत वितरण कंपनी को करना चाहिए। 

साथ ही विद्युत वितरण कंपनी के ऊपर भी कोई दंड प्रक्रिया तय करना चाहिए कि बिना किसी उचित घटना या कारण के जिस भी क्षेत्र में अगर दिन में 1 घंटे से ज्यादा बगैर पूर्व सूचना के बिजली कटौती की जाती है या बार-बार बिजली काटी जाती है, तो उस क्षेत्र के अभियंता के ऊपर दंडात्मक कार्यवाही भी सुनिश्चित होना चाहिए । और उसकी जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। जिससे कि वह अपने कार्य के प्रति सजग और सतर्क रहेगा।