सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या...
बाहरी चकाचौंध और अंदर से खोखले जीवन की कहानी

जैसे ही फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या की खबर आई वैसे ही मन में कई सारे सवालों ने एक साथ जन्म ले लिया माया नगरी की चकाचौंध भरी जिंदगी और सफलता का स्वाद चखने वाले सुशांत को आखिर जीवन में किस बात की कमी रह गई जो उन्होंने इतना बड़ा आत्मघाती कदम उठाया फोकी हमारे देश के युवा और हर तबके का व्यक्ति कहीं ना कहीं फिल्म और इनसे जुड़े हुए अभिनेताओं से प्रेरणा पाता है और इन्हें अपना रोल मॉडल मानता है अपने फिल्मी कैरियर में बेहतर पोजीशन में चल रहे सुशांत की जिंदगी में इन दिनों क्या चल रहा था यह तो धीरे-धीरे परत दर परत सामने आएगा लेकिन अपने अभिनय के माध्यम से लोगों को जिंदा दिल जीने की नसीहत देने वाले सुशांत और सुशांत जैसे युवाओं को एक बार उन लोगों की तरफ भी देखना चाहिए जो बहुत ही विपरीत परिस्थितियों में अपने आप को संभाले हुए हैं देश में कोरोना महामारी के दौरान हमको काफी सारे दृश्य इस प्रकार के देखने को मिले जहां लोग अपने जीवन के लिए जद्दोजहद करते हुए दिखाई दिए लेकिन उनके चेहरे पर ना तो कोई शिकन थी और ना ही कोई मलाल पूरी तरीके से अपने आपको जीवन की चुनौतियां स्वीकार कर रहे थे इस कोरोना महामारी के दौरान देशभर में लाखों लोग अपना सब कुछ छोड़ कर जीवन के दोराहे पर खड़े हैं अपनी हंसती खेलती जिंदगी को संघर्ष में बदल कर यह लोग पूरे जोश खरोश के साथ कोरोना महामारी के बाद भूख बेरोजगारी गरीबी से संघर्ष करने में जुटे हुए हैं बड़े महानगर और उन में रह रहे सफल लोग आखिरकार इतने अकेले कमजोर और बेबस क्यों है यह एक सोचनीय प्रश्न है आज की युवा पीढ़ी को यह सोचना चाहिए और देखना चाहिए कि चकाचौंध भरी जिंदगी में सब कुछ अच्छा नहीं है हमको अपने अंदर भी झांकना चाहिए।