शराब की दुकानें अगर बंद नही की तो…

 "पूरा देश रेड जोन हो जायेगा" 


महत्वपूर्ण बात शराब खरीदने के लिए पैसा है पर राशन व खाना मुफ्त चाहिए।
हर आदमी जो शराब खरीद रहा है उसकि अंगुली पर चुनावों वाली स्याही का निशान लगा देना चाहिए।
दारू ओर गुटके के लिए 4 गुना, 5 गुना जिस  रेट में भी मीले लेने को तैयार हैं।
इसके लिए चाहे आधार कार्ड से या चुनाव इंक से चयन क्यों न करना पड़े परन्तु ऐसे लोगो को राहत सामग्री से बेदखल अवश्य किया जाना चाहिए।*
कल तक जिन घरों में खाने को राशन नहीं था, भोजन नहीं था, आज वे ही लोग शराब की दुकानों पर लम्बी लाइनों में खड़े हैं। सरकार की भी सहमति है क्या जैन समाज की अनेक संस्थाएं ऐसे ही लोगों के घरों में जाने -अनजाने में भोजन, राशन, मास्क, सेनेटाइजर तो नहीं बांट रही है जिनके घरो में मांस, मछली, अंडा, दारू का खुलेआम उपयोग होता है?*
अब देखिए, कल तक जिनके घरों में राशन खरीदने को पैसे नहीं थे, वे शराब की दुकानों पर घंटों लाइने लगाकर खड़े हैं। इसका मतलब पैसा सबके पास है। जरुरत है, पहचानने की।
जैन समाज का पैसा पुण्य, पुरुषार्थ, सद्कर्म से कमाया पैसा होता है लेकिन खर्च कहां किया जा रहा है?मांस, मछली, अंडे खाने तथा दारू पीने वालें पर? अतः मेरा ऐसा मानना है कि यदि शराबबंदी पर तुरंत लगाम नहीं लगी तो महामारी की भयावह स्थिति होना तय है।