व्यापारियों का चैंबर पर फूटा गुस्सा नाम लिए बगैर सुनाईं खरी-खरी…
व्यापारियों के मसीहा ठेकेदारी बंद करें : व्यापारी मोहन माहेश्वरी

ग्वालियर । कोविड-19, कोरोना वायरस के कारण बीते करीब 2 महीने से शहर के सभी बाजार व तमाम व्यापारिक गतिविधियां बंद हैं। व्यापारी लॉकडाउन से त्रस्त आ चुका है। नतीजा यह है कि आर्थिक समस्याओं के साथ ही व्यापारियों के मतभेत फूटकर सामने आ रहे हैं। बुधवार को बाजार खुलने संबंधी आदेश निरस्त होने पर शहर के व्यापारियों का गुस्सा चैंबर ऑफ कॉमर्स पर फूट पड़ा। शहर के एक प्रमुख व्यापारी संगठन के वाट्सएप ग्रुप पर व्यापारी मोहन माहेश्वरी ने चैंबर ऑफ कॉमर्स का नाम लिए बगैर खूब खरी-खरी सुनाईं। यहां तक लिख दिया कि शहर के सबसे बड़े व्यापारी संगठन को व्यापारी हित में बात करना चाहिए, न कि श्रेय लेने के लिए झूठ प्रसारित करना चाहिए। पदाधिकारियों को व्यापारियों की ठेकेदारी बंद कर देनी चाहिए।

चैंबर के मानसेवी सचिव प्रवीण अग्रवाल ने मैसेज लिखा कि 'सब्र का फल मीठा होता है।' बावजूद इसके व्यापारियों के बीच होने वाली खींचतान सुबह करीब 10 बजे से रात 9 बजे तक भी बंद नहीं हुई। बीच में कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के जिला कॉर्डिनेर दीपक पमनानी भी कूद पड़े। हालांकि पमनानी की कही बातों का कुछ व्यापारियों ने समर्थन किया। चैंबर मानसेवी सचिव प्रवीण अग्रवाल ने वाट्सएप ग्रुप में एक ओर संदेश साझा किया। जिसमें उन्होंने लिखा 'कल बाजार जरूर खलेगा। आदेश जारी करे प्रशासन। किस तरह से खुले बाजार, आज आदेश जारी करना ही होगा। जिला प्रशासन को चैंबर का संदेश। 

इस संदेश पर भी व्यापारी की तीखी प्रतिक्रिया हुई, जवाब मिला- सारे फैसले प्रशासन को लेने हैं, ऐसे में कल बाजार जरूर खुलेगा का संदेश लिख लोगों को भ्रमित किया जा रहा है। आदेश का इंतजार करें या संघर्ष का बिगुल बजाने को तैरा रहें। दरअसल गुरुवार से बाजारों को खोलने के संदर्भ में मंगलवार को प्रशासन की ओर से फाइनल प्लान जारी होना था। यह प्लान शाम होने से पहले पुलिस ने लीक कर दिया, वहीं शाम होते ही चैंबर ने भी यह सूचना वाट्सएप ग्रुप व प्रेस नोट में जारी कर दी, कि बुधवार से बाजार पट्टीवाइज खोले जाएंगे। 

ऐसे में आदेश अटजाने का ठीकरा व्यापारी चैंबर पर भी फोड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि श्रेय लेने के फेर में चैंबर बार-बार अलग-अलग सूचनाएं जारी करता है। जो शासन प्रशासन को नागवार है। खुद को व्यापारियों का मसीहा समझने वाले लोग आए दिन जिला प्रशासन के बीच मीटिंग का उल्लेख कर अपने कार्यों की वाह वाही लूटने का प्रयास कर रहे हैं। करना धरना कुछ नहीं सिर्फ मैसेजों के जरिए हम व्यापारियों के लिए चांद-सितारे तोड़ने की बात कर रहे हैं। कल बाजार खुलेगा, थोड़ी देर बाद अभी नहीं खुलेगा। अभी एक पट्टी खुलेगा, कभी अल्टरनेट हिसाब से बाजार खुलेगा। अरे..जब आपके हाथ में कुछ है ही नहीं तो क्यों झूठा श्रेय लेना चाहते हो। 

शहर की सबसे बड़ी व्यापारिक संस्था को क्या हो गया है, व्यापारिक हित में कोई बात सार्थक रूप से नहीं उठा रहे। अब बहुत हुआ, छोटा व्यापारी महसूस करने लगा है कि बड़ी संस्था के कुछ कर्ताधर्ता वाट्सएप मैसेज व अन्य जरियों से सूचनाएं दे रहे हैं मानो सभी व्यापारियों के यही ठेकेदार हों। कहां हैं बड़ी-बड़ी कमेटियां? दुकानों के कर्मचारी वेतन मांग रहे हैं, मकान मालिक किराया मांग रहा है, बैंक किस्त मांग रही है, बिजली घर बिजली का पेमेंट मांग रहा है। किसी से पूछो तो कहा जा रहा है, हमारी ऊपर बातचीत चल रही है।