संक्रमित मरीजों के लिये आइसोलेशन में बदले…
कोविड वार्ड के तौर पर तैयार 5 हजार कोच में से आधे श्रमिक एक्सप्रेस में होंगे इस्तेमाल

नई दिल्ली। देश में कोरोना का संक्रमण शुरू होने के साथ ही देशभर में लॉकडाउन कर दिया गया था. जिस दौरान रेलवे ने देश के अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड की कमी के कारण ट्रेनों में इन्हें बनाया था. अब रेलवे ने शनिवार को कहा कि कोविड-19 के संक्रमित मरीजों के लिए आइसोलेशन में बदले गए 5 हजार 213 डिब्बों में 50 प्रतिशत का उपयोग श्रमिक स्पेशल स्पेशल ट्रेन चलाने में किया जाएगा.

अधिकारियों ने बताया कि इन गैर-एसी डिब्बों को सामान्य डिब्बो में नहीं बदला जाएगा, बल्कि मौजूदा रूप में ही इन सेवाओं के लिये उनका उपयोग किया जाएगा. रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वी के यादव ने शनिवार को कहा, 'हमने अब तक 5 हजार ऐसे डिब्बों को तब्दील किया है और हमारे पास 80 हजार बिस्तर उपलब्ध हैं. ये डिब्बे वहां तैनात किये जाएंगे, जहां कहीं के लिये राज्य इच्छा जाहिर करेंगे. 

लेकिन वे अभी उपयोग में नहीं हैं, ऐसे में हमने उनमें से 50 प्रतिशत डिब्बों का उपयोग श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के डिब्बों के तौर पर करने का फैसला किया है.' उन्होंने कहा कि हालांकि, अन्य डिब्बे कोविड-19 आइसोलेशन केंद्र के तौर पर उपयोग के लिये उपलब्ध हैं. जरूरत पड़ने पर ट्रेनों में इस्तेमाल किये जा रहे इन डिब्बों को कोविड-19 आइसोलेशन केंद्र में तब्दील किया जा सकता है.

रेलवे बोर्ड के 21 मई को जारी आदेश में कहा गया है, 'बोर्ड चाहता है कि कोविड-19 मामलों में सहयोग के लिए निर्धारित किये गये डिब्बों में से 60 फीसदी, यानी 3120 डिब्बों का रेलवे श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने के लिए उपयोग करे. बोर्ड ने इसकी अनुमति दी है.' आइसोलेशन वार्ड बनाते समय इन डिब्बों से बीच की बर्थ हटा दी गई थी और नीचे के हिस्से को प्लाइवुड से जोड़ दिया गया था. बीच की बर्थ नहीं होने से इन डिब्बों वाली ट्रेनों में कम यात्री होंगे. अधिकारियों ने बताया कि यात्रा के दौरान इन डिब्बों में ऑक्सीजन टैंक, वेंटीलेटर और अन्य मेडिकल उपकरण हटा दिए जाएंगे.

अधिकारियों ने बताया कि वैसे तो इन गैर-एसी डिब्बों को फिर सामान्य डिब्बे में नहीं बदला जाएगा, लेकिन उनका उपयोग किया जाएगा क्योंकि वे इसी सेवा के लिए बनाई गई हैं. उन्होंने बताया कि प्रत्येक डिब्बे में चार शौचालयों को दो शौचालय में तब्दील कर दिया गया है. प्रत्येक शौचालय में एक हैंड शावर, बाल्टी और मग होगा. उन्होंने कहा कि इन डिब्बों से पर्दे भी हटाए जाएंगे.

अधिकारियों ने बताया कि प्रत्येक डिब्बे को पृथक-वास वार्ड में तब्दील करने में करीब दो लाख रुपये का खर्च आया है. जबकि उन्हें नियमित गैर-एसी डिब्बों में फिर से तब्दील करने में एक लाख रुपये का खर्च आएगा. उन्होंने बताया कि चूंकि ये डिब्बे आइसोलेशन वार्ड में तब्दील किए जाने के बाद यूं ही पड़े हुए हैं और उन्हें भी तैनात किया जाना बाकी है. ऐसे में रेलवे ने प्रवासी स्पेशल सेवाओं के लिए उनका उपयोग करने का निर्णय लिया है. रेलवे ने एक मई से 36 लाख प्रवासियों को घर पहुंचाने के लिए 2600 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं.