सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से लड़ी जा रही मप्र में कोरोना से जंग



कोरोना के कारण जब राष्ट्रीय स्तर पर लॉकडाउन का सामना करना पड़ा उस समय भी मध्य प्रदेश सरकार का कोई भी महत्वपूर्ण कार्य नहीं रुका क्योंकि आईटी का प्रयोग कर संचालित किया गया। ऐसे समय जब कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन हुए मध्यप्रदेश में एक बड़ी आबादी घरों में सिमट गई है।

आम जन-जीवन को सुगम बनाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार अपने तकनीकी संसाधनों द्वारा लगातार प्रयासरत है। आवश्यक प्रशासनिक  व्यवस्थाओं तेजी से लागू करने में सूचना प्रौद्योगिकी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गयी।

सूचना प्रौद्योगिकी ने जिस तरह बहुआयामी भूमिका निभाते हुए मध्यप्रदेश के लोगों कोकोरोना के खिलाफ युद्ध में एकजुट किया, वह काबिले तारीफ है। प्रदेश के सभी वर्गों तक कोरोना से संबंधित आवश्यक जानकारी पहुँचाने, उन्हें जागरूक करने, उन तक आवश्यक मदद पहुंचाने, प्रशासकीय व्यवस्थाओं को चुस्त दुरुस्त रखने, आवश्यक निर्णय लेने के लिए दूरस्थ अधिकारियों से बैठक करने, स्वास्थ्य, राशन, दवाइयों की उपलब्धता तथा अन्य जानकारी अद्यतन करने, स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक सामग्री का लेखा-जोख रखने, विशेषज्ञों से चर्चा करने, गरीब परिवारों तक राशन तथा नगद राशि के भुगतान संबंधी कार्यों में कम्प्यूटर तथा सूचना प्रौद्योगिकी ने मदद की तथा मध्यप्रदेश शासन ने इसे बेहतर ढंग से उपयोग किया।

कोरोना से इस जंग में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका स्वास्थ्य विभाग की थी। प्रदेश के बड़े शहरो से लेकर छोटे सूदूर जिलों तथा तहसील स्तर तक के अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड तैयार करने, बिस्तरों को आरक्षित करने, वेंटिलेटर की स्थिति को आंकनें, दवाइयों की उपलब्धता, आक्सीजन सिलेडरों की व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवा से संबंधित व्यक्तियों का प्रशिक्षण इत्यादि संभी कार्यों में आईटी सेवाओं की मदद ली गई तथा डाटाबेस को व्यवस्थित किया गया ताकि आवश्यकता होने पर तत्काल मदद दी जा सके।

कोरोना से मध्यप्रदेश की जंग में लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने ऑनलाइन वीडियो कांफ्रेंसिंग सेवाओं जैसे जूम, स्काइप आदि का प्रयोग कर दूर गांवों के स्वास्थ्य अमले को कोरोना के संदर्भ में प्रशिक्षण प्रदान किया गया तथा वहां उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की मॉनिटरिंग कर स्वास्थ्य अमले को कोरोना से जंग में मदद के लिये विस्तृत मार्गदर्शिका भी तैयार की गई है।