सभी कमलनाथ कैबिनेट में थे मंत्री…

स्पीकर ने 6 विधायकों का इस्तीफा स्वीकार किया


भोपाल l मध्य प्रदेश में विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने सभी 6 बागी मंत्रियों के इस्तीफे मंजूर कर लिए हैं। इन मंत्रियों को शुक्रवार को ही कैबिनेट से बर्खास्त किया जा चुका है। विधानसभा अध्यक्ष ने आज शाम ही कहा था कि कुछ विधायकों के मामले गंभीर हैं, उन पर जल्द फैसला लूंगा। मंत्रियों का इस्तीफा स्वीकार होने के साथ ही मध्यप्रदेश विधानसभा में सदस्यों की संख्या घटकर 222 हो गई है।

इन विधायकों का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद कांग्रेस का गणित कमजोर हो गया है। जिन मंत्रियों के इस्तीफे स्वीकार किए गए, उनके नाम हैं.. इमरती देवी, तुलसी सिलावट, प्रद्युम्न सिंह तोमर, महेंद्र सिंह सिसोदिया, गोविंद सिंह राजपूत और प्रभुराम चौधरी। यह सभी विधायक बेंगलुरु में हैं।

6 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार होने पर भाजपा ने अपना विरोध दर्ज कराया है। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि स्पीकर ने केवल 6 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार किए, जबकि सभी 22 विधायकों ने अपने हाथ से इस्तीफे लिखकर दिए थे। सभी ने इसके वीडियो भी जारी किए। इसके बाद भी सभी विधायकों के इस्तीफे स्वीकार न करना विधानसभा अध्यक्ष की दोहरी नीति है। भार्गव ने आरोप लगाया कि विधानसभा अध्यक्ष निष्पक्ष रूप से अपनी भूमिका नहीं निभा रहे हैं।

बिगड़ सकता है सरकार का गणित
छह विधायकों के इस्तीफे स्वीकार होने के बाद विधानसभा की स्थिति:
मध्यप्रदेश के 2 विधायकों के निधन के बाद कुल सीटें = 228
इस्तीफा देने वाले कांग्रेस के विधायक = 22
6 विधायकों के इस्तीफे मंजूर होने के बाद सदन में सीटें (228-6) = 222
इस स्थिति में बहुमत के लिए जरूरी = 112
भाजपा = 107 (बहुमत से 5 कम)
*कांग्रेस+ = 115 (बहुमत से 3 ज्यादा)
*कांग्रेस के 108 विधायक रह गए हैं।
अगर बाकी बचे 16 विधायकों के इस्तीफे मंजूर हो जाएं:
मध्यप्रदेश के 2 विधायकों के निधन के बाद कुल सीटें = 228
इस्तीफा देने वाले कांग्रेस के विधायक = 22
सभी 22 विधायकों के इस्तीफे मंजूर हुए तो सदन में सीटें (228-22) = 206
इस स्थिति में बहुमत के लिए जरूरी = 104
भाजपा = 107 (बहुमत से 3 ज्यादा)
*कांग्रेस+ = 99 (बहुमत से 5 कम)
इस स्थिति में भाजपा फायदे में रहेगी। उसके पास बहुमत के लिए जरूरी 104 से 3 ज्यादा यानी 107 का आंकड़ा रहेगा। वह सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है।
*कांग्रेस के पास 92 विधायक बचेंगे।

जिन 22 विधायकों ने इस्तीफे दिए हैं, उन पर स्पीकर को ही फैसला लेना है। प्रतापगौड़ा पाटिल बनाम कर्नाटक सरकार केस में सुप्रीम कोर्ट का निर्देश था कि इस्तीफा दिए जाने के 7 दिन के अंदर स्पीकर उनकी वैधता जांचें, यदि वे सही हों तो मंजूर करें, अन्यथा खारिज कर सकते हैं। यदि स्पीकर इस्तीफा स्वीकार नहीं करते हैं, पार्टी व्हिप जारी कर उन्हें सदन में हाजिर होने को कह सकती है। यदि वे फिर भी नहीं आते तो ऐसे में पार्टी उन्हें निष्कासित कर सकती है, तो उनकी सदस्यता बच सकती है। स्पीकर सदस्यों को अयोग्य ठहरा सकते हैं, लेकिन यह अयोग्यता 6 महीने से ज्यादा वक्त के लिए लागू नहीं होगी।

स्पीकर ने विधायकों को नोटिस देकर उपस्थित होने को कहा है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया था कि विधायकों को उपस्थिति के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। ऐसे में फ्लोर टेस्ट को भी स्पीकर अधिक समय तक रोककर नहीं रख सकते। यदि कांग्रेस पार्टी अपने विधायकों के अपहरण का आरोप लगाकर कोर्ट जाती है, तो हैबियस कॉर्पस के तहत केस दर्ज होगा। विधायक कोर्ट में हाजिर होंगे तभी केस खारिज होगा। लेकिन कोर्ट से उन्हें सदन में हाजिर कराने के लिए फिर भी बाध्य नहीं किया जा सकेगा।

राज्यपाल इस बात से सहमत हो जाएं कि प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति बन गई है, तो वे विधानसभा भंग कर सकते हैं या राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं। लेकिन, ऐसा होने की संभावना कम है। स्पीकर विधानसभा भंग नहीं कर सकते। लेकिन, राज्यपाल को इसकी सिफारिश जरूर भेज सकते हैं। सिफारिश को मानना या न मानना राज्यपाल के विवेक पर निर्भर करेगा।

22 विधायकों के इस्तीफे मंजूर होने के बाद कांग्रेस के बाकी विधायक प्रजातंत्र की हत्या का आरोप लगाकर सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दें और स्पीकर इन्हें मंजूर कर ले, तो सदन की सदस्य संख्या आधी रह जाएगी। ऐसे में यदि स्पीकर विधानसभा भंग करने की सिफारिश राज्यपाल को करे तो राज्यपाल उसे मान सकते हैं या रिक्त सीटों पर उपचुनाव की सिफारिश चुनाव आयोग से कर सकते हैं।