G News 24 : गोकर्ण पर्तगाली मठ में पीएम मोदी ने किया 77 फुट की श्रीराम कांस्य प्रतिमा का अनावरण !

 जानें इस मठ का इतिहास और विरासत...

गोकर्ण पर्तगाली मठ में  पीएम मोदी ने किया 77 फुट  की श्रीराम कांस्य  प्रतिमा का अनावरण !

श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगाली मठ में में शुक्रवार 28 नवंबर को एक एतिहासिक घटना घटित हुई। भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार के दिन भगवान राम की 77 फुट लंबी कांसे की मूर्ति का अनावरण किया। साथ ही प्रधानमंत्री के द्वारा रामायण थीम पार्क का भी उद्घाटन किया गया। इस समारोह के जरिए सारस्वत समुदाय के 550 साल के आध्यात्मिक सफर, वंश और संस्कृति का सम्मान किया गया। अगले 11 दिनों तक यह उत्सव चलता रहेगा। 

पर्तगाली मठ का इतिहास और महत्व

यह मठ साउथ गोवा के कैनाकोना जिले में कुशावती नदी के किनारे बसे एक गांव पर्तगाली में बना है और इसलिए इसे पर्तगाली मठ कहा जाता है। एक समय यह स्थान गोकर्ण मठ का हेडक्वार्टर था जो गौड़ सारस्वत ब्राह्मणों की एक वैष्णव संस्था है। यह संस्था द्वैत परंपरा को मानती है। वर्ष 1475 में नारायण तीर्थ ने इसे शुरू किया था (पालिमारू मठ से एक आध्यात्मिक वंश शुरू होने के बाद)। आगे चलकर यह मठ सारस्वतों के लिए मुख्य आध्यात्मिक केंद्र बन गया

इस मठ की शुरुआत 1475 में तब हुई जब पलिमारू मठ से आध्यात्मिक उत्तराधिकार के तहत नारायण तीर्थ ने गोकर्ण/पर्तगाली वंश की स्थापना की। समय के साथ इस मठ ने कई परिवर्तन देखे लेकिन अपने अस्तित्व और आध्यात्मिक ज्ञान को बनाए रखा। आपको बता दें कि श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगाली जीवोत्तम मठ के नाम से प्रसिद्ध श्री पर्तगाली मठ की स्थापना संयोगवश हुई थी। दरअसल पालीमारू मठ के 10वें गुरु श्री रामचंद्र तीर्थ एक बार हिमालय की तीर्थयात्रा पर गए थे। वहां गंभीर रूप से गुरु बीमार पड़ गए। उडुपी से बहुत दूर होने के कारण वो मुख्यालय से संपर्क नहीं कर सकते थे। उन्हें भय था कि अगर उनके प्राण चले गए तो मठ के आचार्यों की परंपरा समाप्त हो सकती है। इसलिए एक वैकल्पिक रास्ता खोजकर उन्होंने एक सारस्वत ब्रह्मचारी को शिष्य बनाया और उसे दीक्षा दी। मठ परंपरा में दीक्षित करने के बाद गुरु ने इस शिष्य को श्री नारायण तीर्थ नाम दिया। गुरु ने दीक्षा देने के बाद श्री नारायण तीर्थ को वापस जाने की सलाह दी। इसके बाद श्री नारायण तीर्थ ने उत्तर भारत के पवित्र तीर्थ स्थलों का दर्शन करने के बाद अंत में श्री संस्थान गोकर्ण र्पतगाली जीवोत्तम मठ की शुरुआत की। 

संस्थान गोकर्ण पर्तगाली मठ के मुख्य देवता भगवान श्री वीर विट्ठल और रामचंद्र जी हैं। इस मठ में गुरु प्रणाली का पालन किया जाता है जिसमें मठ प्रमुख एक शिष्य को चुनता है और जो आगे चलकर मठ का उत्तराधिकारी बनता है। शिष्य का अविवाहित होना इसके लिए अनिवार्य शर्त है। वर्तमान में श्री विद्याधीश तीर्थ, पर्तगाली मठ के मठाधिपति हैं। अभी तक कुल 24 मठाधिपति गोकर्ण पर्तगाली मठ में रहे हैं। 

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